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अमेरिकी सांसदों ने रोजगार आधारित लंबित ग्रीन कार्ड वाले लोगों के लिए स्थायी निवास का आग्रह किया

By भाषा | Updated: September 1, 2021 12:12 IST

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भारतवंशी सांसद राजा कृष्णमूर्ति की अगुवाई में 40 अमेरिकी सांसदों के एक समूह ने ऐसे 12 लाख लोगों के लिए वैधानिक स्थायी निवासी के तौर पर मार्ग प्रशस्त करने की मांग की है जिनके रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड लंबित हैं। ऐसे लोगों में भारतीय उल्लेखनीय संख्या में हैं। सदन की अध्यक्ष नैन्सी पेलोसी और सीनेट में बहुमत के नेता चक शूमर को लिखे पत्र में सांसदों ने कहा है कि ऐसे लोग जिनके रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड लंबित हैं उन्हें बजट समाधान पैकेज की राहत मिले और इस प्रक्रिया में अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी। पत्र में कहा गया, ‘‘12 लाख लोगों के रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड लंबित हैं और ऐसे लोगों को वैधानिक स्थायी निवासी के तौर पर राहत मुहैया करवाने में विफलता ऐसे आर्थिक सुधार के समान होगी जिसमें एक हाथ पीछे की ओर बंधा हो। ऐसे लोगों में ज्यादातर एच-1बी वीजाधारक हैं।’’ इसमें आगे कहा गया, ‘‘चीन, रूस और अन्य प्रमुख शक्तियां विश्व मंच पर उभर रही हैं, 21वीं सदी के नवोन्मेषकों का केंद्र बनने को लालायित हैं, ऐसे में एच-1बी वीजा धारकों को स्थायी रूप से गैर-आव्रजक दर्जे में रखना निरर्थक होगा। बजट समाधान पैकेज पर अभी चर्चा चल रही है ऐसे में इस विषय पर भी मंथन करना आवश्यक है।’’ सांसदों के मुताबिक वर्तमान प्रणाली में, किसी एक देश के लोगों के लिए सात फीसदी से अधिक रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड उपलब्ध नहीं हैं। परिणाम स्वरूप भारत और चीन जैसे बड़ी आबादी वाले देशों के लोगों को वैधानिक स्थायी निवासी का दर्जा प्राप्त करने के लिए दशकों तक इंतजार करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि उच्च कौशल युक्त आव्रजकों की आर्थिक संभावनाओं का पूरा लाभ उठाने के लिए वैधानिक स्थायी निवासी के तौर पर रास्ता साफ किया जाना चाहिए और प्रणाली में सुधार होना चाहिए। आव्रजन प्रणाली में सुधार अमेरिका के लिए विशेषकर मददगार होगा क्योंकि इससे इसकी अर्थव्यवस्था एवं कार्यबल को वैश्विक महामारी से लगातार उबरने में मदद मिलेगी। सांसदों ने कहा, ‘‘खासकर भारत के नागरिकों को 80 वर्षों से लंबित प्रक्रिया का सामना करना पड़ रहा है और ऐसा अनुमान है कि 2,00,000 लोगों की कानूनी स्थायी निवासी का दर्जा पाने के इंतजार में ही मौत हो जाएगी।’’ उन्होंने आगे कहा, ‘‘यह मनमानी रोक दुनिया के सबसे प्रतिभाशाली लोगों को अमेरिका को अपना स्थायी घर कहने से रोक रही है और वे अपने आविष्कारों, विशेषज्ञता तथा रचनात्मकता को अमेरिका के बजाए किसी अन्य देश में ले जाने को प्रेरित हो रहे हैं।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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