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स्वीडन को नाटो में शामिल करने के लिए सहमत हुआ तुर्की, अमेरिका, जर्मनी और ब्रिटेन ने किया फैसले का स्वागत

By शिवेन्द्र कुमार राय | Updated: July 11, 2023 14:33 IST

इससे पहले तुर्की ने स्वीडन पर उग्रवादियों को शरण देने का आरोप लगाते हुए उसके आवेदन को कई महीने तक रोक रखा था। नाटो के 31 सदस्यों में से एक के रूप में, तुर्की के पास समूह में शामिल होने वाले किसी भी नए देश पर वीटो का अधिकार है।

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ठळक मुद्देनाटो में शामिल होने वाला 32वां देश हो सकता है स्वीडनतुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन समर्थन करने पर सहमत हुए स्वीडन सैन्य गठबंधन नाटो में शामिल होता है तो यह इस संगठन का 32वां सदस्य होगा

North Atlantic Treaty Organisation: तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन नाटो में शामिल होने के स्वीडन के प्रयास का समर्थन करने पर सहमत हो गए हैं। सैन्य गठबंधन के प्रमुख जेन्स स्टोलटेनबर्ग ये जानकारी दी है। लंबे समय से उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) में शामिल करने की कोशिश कर रहे स्वीडन के प्रधान मंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन ने तुकी के इस फैसले पर खुशी जताते हुए कहा है कि यह स्वीडन के लिए एक अच्छा दिन है।

इससे पहले तुर्की ने स्वीडन पर कुर्द उग्रवादियों को शरण देने का आरोप लगाते हुए उसके आवेदन को कई महीने तक रोक रखा था। नाटो के 31 सदस्यों में से एक के रूप में, तुर्की के पास समूह में शामिल होने वाले किसी भी नए देश पर वीटो का अधिकार है। इसी शक्ति का इस्तेमाल करते हुए तुर्की अब तक स्वीडन की राह में रोड़े अटका रहा था।

तुर्की के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने  कहा कि वह राष्ट्रपति एर्दोगन द्वारा समर्थन देने प्रतिबद्धता का स्वागत करते हैं। जर्मनी और ब्रिटेन ने भी तुर्की के इस फैसले का स्वागत किया है। अगर स्वीडन सैन्य गठबंधन नाटो में शामिल होता है तो यह इस संगठन का 32वां सदस्य होगा। बता दें कि लिथुआनिया की राजधानी विनियस में नाटो का शिखर सम्मेलन हो रहा है और तुर्की और स्वीडिश नेताओं के बीच वार्ता के बाद सोमवार, 10 जुलाई की देर रात समझौते की घोषणा की गई।

नाटो एक शक्तिशाली सैन्य गठबंधन है और इसके किसी भी सदस्य देश पर हमला पूरे संगठन पर हमला माना जाता है। उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) को एक सैन्य गठबंधन के रूप में सोवियत संघ के खिलाफ सामूहिक सुरक्षा प्रदान करने के लिये संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा और कई पश्चिमी यूरोपीय देशों द्वारा अप्रैल, 1949 में स्थापित किया गया था। वर्तमान में इसमें 31 सदस्य देश शामिल हैं। 

इसके मूल सदस्य बेल्जियम, कनाडा, डेनमार्क, फ्राँस, आइसलैंड, इटली, लक्ज़मबर्ग, नीदरलैंड, नॉर्वे, पुर्तगाल, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका थे। नाटो का मुख्यालय ब्रुसेल्स, बेल्जियम में है।

टॅग्स :तुर्कीNATOअमेरिकारूस-यूक्रेन विवाद
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