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सदियों तक पर्यावरण में रहने वाले प्लास्टिक का अब होगा 1 सप्ताह में 'इलाज'

By योगेश सोमकुंवर | Updated: May 4, 2022 11:13 IST

विश्व स्तर पर, प्लास्टिक का 10 प्रतिशत से भी कम हिस्सा ही रिसाइकल हो पाया है. इस मामले में FAST-PETase की शुरूआत कुछ हद तक मदद कर सकती है. शोधकर्ताओं का कहना है कि यह सस्ता और पोर्टेबल है.

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प्लास्टिक का कचरा, पर्यावरण को सबसे ज्यादा प्रदूषित करने वाला कचरा है लेकिन प्लास्टिक के इस्तेमाल ने हमारे जीवन को आसान भी बनाया है यहीं वजह है कि दुनिया भर में प्लास्टिक को त्यागने का विचार तो खूब हो रहा है लेकिन इस पर पूरी तरह अमल नहीं किया जा सका है. हालांकि,  प्लास्टिक के प्रदूषण से निपटने के लिए हमारे वैज्ञानिक लगातार शोध कार्य में लगे हुए है. 

एंजाइम से नष्ट होगा प्लास्टिक 

इसी कड़ी में, वैज्ञानिकों ने अब एक ऐसा एंजाइम बनाने का दावा किया है जो प्लास्टिक के कंपोनेंट्स को बहुत जल्दी तोड़ देता है. इससा जुड़े एक शोध की जानकारी Nature जर्नल में छपी है. इसे बनानी वाली टीम का कहना है कि प्लास्टिक प्रदूषण से दूषित जगहों को साफ करने के लिए भी हम इस एंजाइम वैरिएंट का इस्तेमाल कर सकते हैं.

सदियों तक नष्ट होने वाले प्लास्टिक का 1 सप्ताह में ‘इलाज’

टेस्ट में, पॉलिमर पॉलीइथाइलीन टेरेफ्थेलेट (polymer polyethylene terephthalate-PET) यानि एक तरह के प्लास्टिक से बने उत्पादों को वैज्ञानिकों द्वारा तैयार किया गया एंजाइम एक सप्ताह में ही तोड़ देता है जबकि कुछ को टूटने में तो केवल 24 घंटे का समय लगता है. ये प्लास्टिक के वे उत्पाद है जिन्हें प्राकृतिक परिस्थितियों में नष्ट होने में सदियां लग सकती हैं. शोधकर्ताओं की टीम ने इस एंजाइम को FAST-PETase नाम दिया है. यहीं नहीं जब यह एंजाइम प्लास्टिक को खत्म कर देता है, तो उससे बचे हुए पदार्थों को फिर से प्रोसेस करके दोबारा प्लास्टिक बनाया जा सकता है.

दुनिया के लिए खतरा है प्लास्टिक का कचरा

दुनिया में PET का इस्तेमाल बड़े स्तर पर किया जाता है. ऐसा माना जाता है कि यह वैश्विक कचरे का लगभग 12 प्रतिशत हिस्सा है. जबकि विश्व स्तर पर, प्लास्टिक का 10 प्रतिशत से भी कम हिस्सा ही रिसाइकल हो पाया है. इस मामले में FAST-PETase की शुरूआत कुछ हद तक मदद कर सकती है. शोधकर्ताओं का कहना है कि यह सस्ता और पोर्टेबल है. साथ ही, जिस तरह के औद्योगिक स्तर की ज़रूरत होगी, उस आधार पर इसका उत्पादन बढ़ाना मुश्किल नहीं होगा.

टॅग्स :Environment MinistryभारतIndia
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