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रिपब्लिकन उम्मीदवार विवेक रामास्वामी ने कहा, "चीन से निर्भरता को कम करके भारत को देनी चाहिए प्राथमिकता"

By आकाश चौरसिया | Updated: September 22, 2023 12:47 IST

रामास्वामी ने अपनी राष्ट्रपति पद की दावेदारी मजबूत करने के लिए पहले इंटरव्यू में कहा कि इजरायल, भारत, ब्राजील और चिली के साथ व्यापारिक संबंध प्रगाढ़ करने की जरुरत है। इसका सीधा सा असर चीन को होगा और उससे वित्तीय संबंध में चीन से कमी भी आएगी।

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ठळक मुद्देरामास्वामी ने कहा कि भारत से व्यापारिक संबंध प्रगाढ़ करने की जरुरत है।रामास्वामी ने अपनी डिबेट की शुरुआत चीन की आलोचना के साथ की।रिपबल्किकन उम्मीदवार ने कहा कि बीजिंग जितना ज्यादा ग्रीन हाउस गैस का उत्सर्जन करता है

ओहियो: भारतीय उद्यमी और रिपब्लिकन पार्टी की ओर से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार विवके रामास्वामी ने अपनी पहली प्रेसिडेंशियल डिबेट में अमेरिका-चीन की साझेदारी कम करने और भारत के साथ आर्थिक स्तर पर रिश्तों को मजबूत करने की बात कही।

रामास्वामी ने कहा कि इजरायल, भारत, ब्राजील और चिली के साथ व्यापारिक संबंध प्रगाढ़ करने की जरुरत है। इसका सीधा सा असर चीन को होगा और उससे वित्तीय संबंध में चीन से कमी भी आएगी। रिपबल्किन उम्मीदवार रामास्वामी ने आगे कहा कि अब दवा उत्पादकता में आयात की जो निर्भरता चीन से है, उसे भी कई मायनों में कम करने की जरुरत है।

उन्होंने कहा कि अमेरिका चीन के साथ व्यापारिक रिश्ते कम करके ब्राजील और चिली से दुर्लभ खनिज आयात कर सकता है, जिससे सेमी कंडक्टर बनाने की जरुरतों को पूरा किया जा सकता है।

रामास्वामी ने अपनी डिबेट की शुरुआत चीन की आलोचना के साथ की और कहा कि 2001 में विश्व व्यापार संगठन में चीन को शामिल करना एक बड़ी गलती है। उन्होंने कहा कि अमेरिका बर्गर और बेहतरीन खाद्य उत्पाद का निर्यात करने में भी नाकाम रहा है, जिसका फायदा चीन को मिला।

उद्यमी रामास्वामी ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि आज अमेरिका का बड़ा विरोधी कौन है? लोग समझते होंगे की वह यूएसएसआर है लेकिन लोग भूल गए हैं कि उसका तो विभाजन साल 1990 में ही हो गया था। आज की तारीख में अमेरिका का सबसे बड़ा विरोधी चीन है।

रिपबल्किन उम्मीदवार ने अपनी पहली डिबेट में जोर देकर कहा कि अमेरिका का जलवायु एजेंडा धोखा है। रामास्वामी ने कहा कि चीन आर्थिक तौर पर लगातार अमेरिका के बराबरी में आने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि बीजिंग जितना ज्यादा ग्रीन हाउस गैस का उत्सर्जन करता है, उतना कोई और देश नहीं करता है। रामास्वामी ने कहा कि इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के अस्तित्व और उसकी खरीददारी से कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन उन्हें पर्यावरण की नीति को अमेरिका के लिए बदलना जरुरी है।

रिपब्लिकन दावेदार रामास्वामी ने आगे कहा कि एक अहम मुद्दा यह भी है कि चीन कई मामले में छूट देकर उद्योगों को अपने यहां पनपने देता है, जो समस्या पैदा करते हैं। रामास्वामी ने अपने डिबेट में अमेरिका को सलाह देते हुए कहा कि सेमीकंडक्टर की उत्पादकता में जो निर्भरता चीन से है, अमेरिका उसे कम करते हुए जापान और दक्षिण कोरिया से भी अपनी जरूरत को पूरा कर सकता है। इसके अलावा उन्होंने कहा कि यूएस सैन्य उपकरणों में लगने वाले जरूरी सामान की भी निर्भरता चीन से कम करना चाहिए।

टॅग्स :विवेक रामास्वामीअमेरिकाचीनभारतBrazilWTO
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