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पाकिस्तान को मिला मानव रहित हमलावर ड्रोन, तुर्की ने भेजी युद्ध लड़ने में सक्षम ड्रोन पहली खेप

By शिवेंद्र कुमार राय | Updated: April 3, 2023 15:39 IST

पिछले कई साल में छोटे-मोटे क्षेत्रीय संघर्ष में ड्रोन्स के इस्तेमाल ने अपनी उपयोगिता को बखूबी साबित किया है। इसलिए, आज के जमाने में ड्रोन को युद्धक्षेत्र के नए रणनीतिक और प्रभावशाली हथियार के रूप में देखा जा रहा है। ड्रोन के इस्तेमाल ने आर्मीनिया-अजरबैजान युद्ध के परिणाम तय किए थे।

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ठळक मुद्देहमलावर ड्रोन बेरक्तार अकिंसी हेल अब पाकिस्तान की वायुसेना की ताकत बढ़ाएगातुर्की से हमलावर ड्रोन्स बेरक्तार अकिंसी हेल का पहला बैच पाकिस्तान को मिलाबेरक्तार अकिंसी हेल युद्ध लड़ने में सक्षम मानवरहित ड्रोन है

नई दिल्ली: तुर्की का खतरनाक हमलावर ड्रोन बेरक्तार अकिंसी हेल अब पाकिस्तान की वायुसेना की ताकत बढ़ाएगा। तुर्की से हमलावर ड्रोन्स बेरक्तार अकिंसी हेल का पहला बैच पाकिस्तान को मिल गया है। ऊंचाई पर उड़ते हुए यह ड्रोन निगरानी के साथ-साथ हमला करने में भी सक्षम है। इससे  पाकिस्तानी सेना की ताकत बढ़ेगी लेकिन भारत के लिए ये चिंता की बात है। दरअसल ड्रोन की तैनाती पाकिस्तान भारत से लगी सीमा पर ऊंचाई वाले इलाकों में करने की योजना बना रहा है। इसका मतलब ये है कि तुर्की से मिले ड्रोन को पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में तैनात किया जाएगा।

पाकिस्तान को पहले बैच में कितने ड्रोन्स मिले हैं, इसका खुलासा तो नहीं हुआ है। लेकिन माना जा रहा है कि कम से कम छह या सात हो सकते हैं। बेरक्तार अकिंसी हेल ड्रोन युद्ध लड़ने में सक्षम मानवरहित ड्रोन है। इस ड्रोन के अंदर 400 किलोग्राम और बाहर 950 किलोग्राम वजन के हथियार लगाए जा सकते हैं। बेरक्तार अकिंसी ड्रोन का इस्तेमाल आर्मीनिया-अजरबैजान और रूस-यूक्रेन युद्ध में हो चुका है। युद्ध के मैदान में यह ड्रोन अपनी काबिलियत दिखा चुका है और साबित कर चुका है कि इसके इस्तेमाल से परिणाम बदल सकते हैं। दरअसल आर्मीनिया-अजरबैजान युद्ध के दौरान अजरबैजान ने इस ड्रोन का प्रयोग किया था। इसके सामने आर्मिनिया के टैंकों की एक न चली और अजरबैजान युद्ध जीतने में सफल रहा।

बेरक्तार ड्रोन को तुर्की की बायकर कंपनी ने बनाया है। बेकार कंपनी के सीईओ हालुक बायरकतार ने सितंबर 2022 में कहा था कि वह पाकिस्तान को यह ड्रोन देंगे। वह राष्ट्रपति एर्दोगन के दामाद भी हैं। बेरक्तार अकिंसी अधिकतम 25 घंटे 45 मिनट तक उड़ान भर सकता है। अधिकतम रेंज साढ़े सात हजार किलोमीटर है। अधिक से अधिक 38 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़ सकता है। इसकी अधिकतम स्पीड 463 किलोमीटर प्रतिघंटा है।

पिछले कई साल में छोटे-मोटे क्षेत्रीय संघर्ष में ड्रोन्स के इस्तेमाल ने अपनी उपयोगिता को बखूबी साबित किया है। इसलिए, आज के जमाने में ड्रोन को युद्धक्षेत्र के नए रणनीतिक और प्रभावशाली हथियार के रूप में देखा जा रहा है। पिछले साल तुर्की ने दुनिया के सामने अपना बेरक्तार अकिंसी हेल सशस्त्र ड्रोन प्रदर्शित किया था। अमेरिकी MQ-9 की तुलना में तुर्की का ड्रोन हल्के हथियारों से लैस है। इसमें चार लेजर- गाइडेड मिसाइलें लगाई जा सकती हैं। 

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