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Tiananmen Massacre: आज ही के दिन थियानमेन चौक नरसंहार में 10 हजार लोगों की हुई थी मौत, चीन ने निहत्थे छात्रों पर चलवाई थी गोलियां, चढ़वा दिए थे टैंक

By आजाद खान | Updated: June 4, 2022 11:14 IST

Tiananmen Square Massacre: चीन की राजधानी बीजिंग में तैनात तत्कालीन ब्रिटिश राजदूत एलन डोनाल्ड ने दावा किया है कि 33 साल पहले चीनी सरकार ने करीब दस हजार छात्रों को मार दिया था।

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ठळक मुद्दे33 साल पहले आज ही के दिन करीब 10 हजार लोगों को चीनी सरकार ने मार डाला था।ये लोग चीन में लोकतंत्र की बहाली की मांग कर रहे थे। आज भी चीन ने इस घटना को लेकर रिपोर्टिंग पर रोक लगा रखा है।

Tiananmen Square Massacre:चीन में आज ही के दिन करीब दस हजार से भी ज्यादा निहत्थे आंदोलनकारी छात्रों की हत्या हुई थी। यह हत्या चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के इशारे पर पीएलए ने की थी। चीन के दबाव के कारण इस घटना का रिपोर्टिंग भी बहुत कम हुई है। बताया जाता है कि 3 और 4 जून 1989 में कुछ छात्र बीजिंग के थियानमेन चौक पर लोकतंत्र की बहाली के समर्थन में इकट्ठा हुए थे। 

चीनी सरकार को इनका इकट्ठा होना मंजूर नहीं था और ऐसे में इनके आंदोलन को रोकने के लिए सरकार ने बंदूक और टैंकों से कार्रवाई कर करीब दस हजार छात्रों को मौत के घाट उतार दिया था। तब इस घटना की बहुत चर्चा हुई थी और आज भी चीन इस मामले को दबाने और इस पर कोई रिपोर्टिग नहीं करने पर जोर देते रहता है। 

क्या था पूरा मामला

आपको बता दें कि आज से तीन साल पहले सार्वजनिक हुए एक ब्रिटिश खुफिया राजनयिक दस्तावेज में इस घटना का खुलासा हुआ था। यह खुलासा चीन की राजधानी बीजिंग में तैनात तत्कालीन ब्रिटिश राजदूत एलन डोनाल्ड ने किया है। एलन ने उस समय लंदन में पत्र भेजकर इस घटना का पूरा ब्योरा दिया था। एलन के पत्र के मुताबिक, 33 साल पहले चीनी सरकार ने करीब दस हजार छात्रों को मार दिया था। इनके इस पत्र को आज भी ब्रिटेन के नेशनल आर्काइव्ज में सम्भाल कर रखा हुआ है। 

उनके अनुसार, आज ही के दिन बीजिंग के थियानमेन चौक पर लाखों की तादात में लोकतंत्र समर्थक आंदोलनकारी जमा हुए थे और वे लोकतंत्र की मांग कर रहे थे। इस आांदोलन में छात्रों के साथ मजदूरों ने भी हिस्सा लिया था। 

बताया जाता है कि यह आंदोलन कम्यूनिस्ट पार्टी के पूर्व महासचिव और सुधारवादी हू याओबांग की मौत के बाद शुरू हुई थी। यह वहीं हू याओबांग है जिन्हें चीन के सरकार ने उनके राजनीतिक और आर्थिक नीतियों के विरोध करने के कारण उन्हें सरकारी पद से हटा दिया था और फिर बाद में इनकी हत्या कर दी गई थी। 

बंदूक और टैंक से की गई थी हत्या

हू याओबांग की मौत के बाद लोग भड़क गए और वे विरोध और प्रदर्शन करने के लिए सड़क पर उतर गए। इसके बाद उन लोगों ने करीब छह हफ्ते तक इसका विरोध किया और लोकतंत्र की बहाली की मांग की थी। अन्त में आज ही के दिन शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे निहत्थे नागरिकों पर चीनी सेना ने बंदूक और टैंकों से हमला किया था। इस हमले में दस हजार लोगों की मौत हुई थी। यही नहीं चीनी सेना के टैंक को रोकते हुए एक युवक का फोटो भी उस समय खूब वायरल हुआ था। आज भी इस घटना के रिपोर्टिंग को लेकर चीन ने प्रतिबन्ध लगा रखा है।  

टॅग्स :चीनक्राइमक्राइम न्यूज हिंदीLondonब्रिटेनCommunist Party of China
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