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पोप समेत कई धार्मिक नेताओं ने जलवायु संरक्षण की संयुक्त अपील पर किए हस्ताक्षर

By भाषा | Updated: October 4, 2021 17:26 IST

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वैटिकन सिटी, चार अक्टूबर (एपी) पोप फ्रांसिस और दर्जनों अन्य धार्मिक नेताओं ने आगामी संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन के महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को लेकर प्रतिबद्ध होने का सरकारों से आग्रह करते हुए सोमवार को एक संयुक्त अपील पर हस्ताक्षर किए और इस दिशा में अपना योगदान देने का भी वादा किया।

पोप के आधिकारिक आवास अपोस्टोलिक पैलेस में एक औपचारिक समारोह में इस अपील पर हस्ताक्षर किए गए और इसके बाद इसे संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (कॉप26) के प्रमुख आलोक शर्मा को सौंपा गया।

अपील में कहा गया है, ‘‘हमें विरासत में एक बगीचा मिला था, हमें हमारे बच्चों के लिए रेगिस्तान नहीं छोड़ना चाहिए।’’

फ्रांसिस ने 2015 में सभी गिरजाघरों को भेजे गए अपने परिपत्र ‘प्रेज्ड बी’ में व्यापक रूप से और उसके बाद भी कई बार यह कहा है कि भावी पीढ़ियों के लिए ईश्वर की रचना को संरक्षित करने के उद्देश्य से पर्यावरण की देखभाल करना और जलवायु परिवर्तन के कारण सबसे अधिक प्रभावित होने वाले समुदायों की मदद करना धार्मिक नेताओं का नैतिक दायित्व है।

स्कॉटलैंड के ग्लासगो में 31 अक्टूबर से 12 नवंबर तक होने वाले शिखर सम्मेलन से पहले ‘आस्था एवं विज्ञान: कॉप26 से एक अपील’ शीर्षक के तहत यह अपील की गई है।

इससे पहले दुनिया के तीन प्रमुख ईसाई नेताओं-पोप फ्रांसिस, कैंटरबरी के मुख्य पादरी जस्टिन वेलबाये और रूढ़िवादी ईसाई परंपरा के आध्यात्मिक नेता बार्थोलॉम्यू प्रथम ने आगामी जलवायु शिखर सम्मेलन में भाग लेने वाले प्रतिनिधियों से ''पृथ्वी की पुकार को सुनने'' और ग्रह के संरक्षण के वास्ते कदम उठाने की एक संयुक्त अपील की थी। सोमवार को इनके अलावा सुन्नी और शिया इस्लाम, यहूदी धर्म, हिंदू धर्म, बौद्ध धर्म, ताओवाद, जैन धर्म, सिख धर्म और अन्य धार्मिक समूहों के नेताओं ने भी मिलकर ऐसी ही अपील की, लेकिन इस दौरान तिब्बती आध्यात्मिक नेता दलाई लामा अनुपस्थित रहे। वैटिकन अंतरधार्मिक समारोहों से दलाई लामा को वर्षों से बाहर रखता रहा है, क्योंकि वह चीन को नाराज नहीं करना चाहता।

इस अपील को धार्मिक नेताओं और वैज्ञानिकों के साथ कई महीने विचार-विमर्श करने के बाद तैयार किया गया था।

आगामी संयुक्त राष्ट्र जलवायु शिखर सम्मेलन में फ्रांसिस के व्यक्तिगत रूप से भाग लेने की उम्मीद है, लेकिन वैटिकन ने अभी इसकी पुष्टि नहीं की है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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