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ईरान को मिला कच्चे तेल का नया भंडार, हसन रूहानी ने कहा- हम यूएस को बताना चाहते हैं कि हम दौलतमंद देश हैं

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: November 11, 2019 14:13 IST

राष्ट्रपति हसन रूहानी ने कहा, ‘‘ हम आज अमेरिका को बता देना चाहते हैं कि हम एक दौलतमंद देश हैं। उनकी शत्रुता और कड़े प्रतिबंधों के बावजूद ईरान के तेल उद्योग से जुड़े कर्मचारियों और इंजीनियरों ने इतने बड़े तेल भंडार की खोज की हैं।

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ठळक मुद्देउन्होंने कहा, ‘‘यह सरकार की ओर से ईरान के लोगों को एक छोटा-सा तोहफा है।’’नया तेल भंडार ईरान के खुजेस्तान प्रांत में मिला है। यह 2,400 वर्ग किलोमीटर के दायरे में फैला है।

ईरान के दक्षिणी हिस्से में कच्चे तेल का एक नया भंडार मिला है। राष्ट्रपति हसन रूहानी ने रविवार को सरकारी टीवी पर एक संबोधन में देश में 53 अरब बैरल के नए कच्चा तेल भंडार मिलने की घोषणा की।

इस खोज के बाद ईरान के कच्चा तेल भंडार में एक तिहाई से अधिक की वृद्धि होने की उम्मीद है। इस मौके पर अमेरिकी प्रतिबंध के मुद्दे पर रूहानी ने कहा, ‘‘ हम आज अमेरिका को बता देना चाहते हैं कि हम एक दौलतमंद देश हैं। उनकी शत्रुता और कड़े प्रतिबंधों के बावजूद ईरान के तेल उद्योग से जुड़े कर्मचारियों और इंजीनियरों ने इतने बड़े तेल भंडार की खोज की हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘यह सरकार की ओर से ईरान के लोगों को एक छोटा-सा तोहफा है।’’ नया तेल भंडार ईरान के खुजेस्तान प्रांत में मिला है। यह 2,400 वर्ग किलोमीटर के दायरे में फैला है। यह क्षेत्र मुजेस्तान इलाके में इराक सीमा से लेकर करीब 200 किलोमीटर दूर आमिदया शहर तक फैले क्षेत्र में 80 मीटर की गहराई में हैं। इस खोज के बाद ईरान की स्थापित कच्चा तेल भंडार क्षमता में 34 प्रतिशत का इजाफा होगा।

अब ईरान की स्थापित कच्चा तेल भंडार क्षमता 155.6 अरब बैरल होने का अनुमान है। ईरान पेट्रोल निर्यात करने वाले देशों के संगठन ओपेक का संस्थापक सदस्य रहा है। अभी उसके पास दुनिया का चौथा सबसे बड़ा तेल भंडार है और नयी खोज के बाद वह अब दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल भंडार रखने वाला देश बन गया है।

हालांकि अभी यह देखना बाकी है कि इस नयी खोज से देश की अर्थव्यवस्था को कितना फायदा होता है। वैश्विक शक्तियों के साथ अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर किसी समझौते पर पहुंचने में विफल रहने के बाद अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते ईरान का ऊर्जा उद्योग बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

वर्ष 2015 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ऐतिहासिक परमाणु समझौते से निकल जाने के बाद से ईरान को कच्चे तेल के निर्यात में भारी दिक्कतें हो रही हैं। अमेरिका ने उसके परमाणु कार्यक्रम को लेकर पिछले साल से ईरान पर एकतरफा प्रतिबंध लगा दिए हैं।

अमेरिका ने चीन, भारत और तुर्की समेत ईरान के आठ बड़े तेल ग्राहकों को प्रतिबंधों से दी गयी आंशिक छूट भी मई में खत्म कर दी जिसके बाद यह स्थिति और विकट हो चुकी है। हालांकि रूहानी ने जोर देकर कहा कि देश की अर्थव्यवस्था अब स्थिर है। पिछले साल हमारे लोगों ने कड़े दिन गुजारे हैं, लेकिन उनका मानना है कि अब अमेरिका नाउम्मीद हो चुका है। 

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