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नये रोगाणुओं की उत्पत्ति के अध्ययन के लिए गठित डब्ल्यूएचओ सलाहकार समूह में भारतीय वैज्ञानिक

By भाषा | Updated: October 14, 2021 23:47 IST

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(योषिता सिंह)

संयुक्त राष्ट्र/जिनेवा, 14 अक्टूबर भारत के जानेमाने महामारी वैज्ञानिक डॉ रमन गंगाखेडकर को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के एक विशेषज्ञ समूह में नामित किया गया है जो कोविड-19 फैलाने वाले सार्स-सीओवी-2 वायरस समेत महामारी के रोगाणुओं की उत्पत्ति का अध्ययन करेगा।

गंगाखेडकर भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) में महामारी विज्ञान और संचारी रोगों के पूर्व प्रमुख हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बुधवार को ‘नोवेल पैथोजन्स की उत्पत्ति के लिए वैज्ञानिक सलाहकार समूह’ (एसएजीओ) के प्रस्तावित सदस्यों की घोषणा की थी।

यह समूह सार्स-सीओवी-2 समेत महामारी के रोगाणुओं के विकसित होने और पुन: उत्पत्ति का अध्ययन करने के लिए एक वैश्विक रूपरेखा विकसित करने में डब्ल्यूएचओ को सलाह देगा।

डब्ल्यूएचओ ने कहा कि संगठन को मिले सभी आवेदनों पर पूरी तरह विचार-विमर्श करने के बाद अनेक देशों के 26 वैज्ञानिकों को चुना गया और एसएजीओ की सदस्यता के लिए उनके नाम प्रस्तावित किये गये।

डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रस अधानोम घेब्रेयेसस ने कहा, ‘‘नये वायरसों की उत्पत्ति और उनसे स्थानीय तथा वैश्विक महामारियों के फैलने की आशंका प्राकृतिक तथ्य है और सार्स-सीओवी-2 ऐसा सबसे नया वायरस है लेकिन यह आखिरी नहीं होगा।’’

उन्होंने कहा, ‘‘नये रोगाणु कहां से आते हैं, इस बात को समझना भविष्य में स्थानीय और वैश्विक महामारियों को रोकने के लिए जरूरी है और इसके लिए व्यापक विशेषज्ञता की जरूरत है। हम एसएजीओ में दुनियाभर से चुने गये विशेषज्ञों की काबिलियत को देखकर बहुत खुश हैं और दुनिया को सुरक्षित बनाने के लिहाज से उनके साथ काम करने के लिए आशान्वित हैं।’’

गंगाखेडकर कोरोना वायरस महामारी पर मीडिया को सरकार की ओर से जानकारी देने के लिए आईसीएमआर का चेहरा बन गये थे। वह पिछले साल जून में इस शीर्ष स्वास्थ्य अनुसंधान संस्था के महामारी विज्ञान और संचारी रोग प्रमुख के पद से सेवानिवृत्त हुए थे।

उन्होंने एचआईवी/एड्स पर अनुसंधान में भी अहम भूमिका निभाई और राष्ट्रीय नीतियां तथा रोगी सशक्तीकरण में अहम योगदान दिया। वह आईसीएमआर दिल्ली में सेवाएं देने से पहले राष्ट्रीय एड्स अनुसंधान संस्थान (नारी), पुणे के निदेशक-प्रभारी थे।

आईसीएमआर के साथ अपने लगभग चार साल के कार्यकाल के दौरान उन्होंने 2018 में केरल में निपाह वायरस के प्रकोप से निपटने के लिहाज से नीतियां बनाने में और हाल में कोविड-19 महामारी के संदर्भ में अहम काम किया।

समूह के अन्य सदस्यों में अमेरिका के रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्रों में उच्च परिणामी रोगाणु और पैथोलॉजी विभाग के निदेशक डॉ इंगर डेमन, ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में नफील्ड चिकित्सा विभाग में उष्णकटिबंधीय माइक्रोबायलॉजी के प्रोफेसर डॉ स्टुअर्ट ब्लैकसेल, रूस में पाश्चर संस्थान में अनुसंधान के लिए उप निदेशक डॉ व्लादिमीर देदकोव, पर्यावरण और संक्रामक जोखिम इकाई के अनुसंधान निदेशक तथा फ्रांस में इंस्टीट्यूट पाश्चर में इमरजेंसी बायलॉजिकल इंटरवेंशन इकाई के प्रमुख डॉल जियां-क्लाउडे मैनगुएरा शामिल हैं।

इस बीच, डब्ल्यूएचओ द्वारा गठित सलाहकार समूह पर प्रतिक्रिया देते हुए चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान ने बीजिंग में कहा कि चीन हमेशा इस बात पर कायम है कि वायरस की उत्पत्ति के बारे में पता लगाना एक गंभीर और जटिल वैज्ञानिक मुद्दा है, जिसे दुनिया भर के वैज्ञानिकों को संयुक्त अनुसंधान के माध्यम से करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि हालांकि, चीन किसी भी तरह की राजनीति से प्रेरित अटकलों का कड़ा विरोध करेगा।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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