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ईयू के मंत्री अफगानिस्तान व शरणार्थियों पर चर्चा के लिए बैठक करेंगे

By भाषा | Updated: August 31, 2021 20:07 IST

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ब्रसेल्स, 31 अगस्त (एपी) यूरोपीय संघ (ईयू) के न्याय एवं गृह मामलों के मंत्रियों की अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे और इस स्थिति से उपजे शरणार्थी और प्रवासी मुद्दों को लेकर मंगलवार को एक बैठक होगी, जिसमें चर्चा की जाएगी कि यूरोप शरणार्थियों के आने से कैसे निपटे। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब काबुल हवाई अड्डे से अमेरिका के शेष सैनिक भी लौट गए हैं जिसके साथ ही अमेरिका की सबसे लंबी जंग खत्म हो गई है। 27 देशों का संगठन 2015 जैसे शरणार्थी संकट को रोकने की कोशिश में है जो सीरिया में गृह युद्ध की वजह से हुआ था। उस साल लाखों प्रवासी यूरोप आ गए थे जिससे संघ के देशों में ही कलह होने लगी थी। इस बात की संभावना है कि ईयू शरणार्थियों को यूरोप आने से रोकने के लिए अफगानिस्तान की सीमा के पास ही अन्य देशों में उन्हें बसाने के लिए आर्थिक मदद करे। गृह मामलों की यूरोपीय आयुक्त यल्वा जोहान्सन ने मंत्रियों की बैठक से पहले कहा, “ यह अहम है कि हम उस स्थिति में हों जिसमें हम अफगानिस्तान से मानवीय, प्रवासी संकट एवं सुरक्षा खतरे को रोक पाएं।” उन्होंने कहा, “ इसके लिए हमें अभी कदम उठाने की जरूरत है न कि हम तब तक इंतजार करें जबतक हमारी सीमाओं पर लोगों की भीड़ न लग जाए या आतंकी संगठन मजबूत न हो जाएं।” उन्होंने कहा, “ इसलिए हमें अभी कदम उठाने, अफगानिस्तान में लोगों की मदद करने, पड़ोसी देशों की सहायता करने एवं अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ काम करने की जरूरत है।”ऑस्ट्रिया के चांसलर सेबस्टियन कुर्ज़ ने साफ किया कि उनका मुल्क उस व्यवस्था का समर्थन नहीं करेगा जिसमें अफगानिस्तान के तमाम शरणार्थियों को यूरोपीय संघ के देश आपस में साझा करें।इस आशय के प्रस्ताव के बारे में पूछे गए सवाल पर कुर्ज़ ने जर्मनी की राजधानी बर्लिन में पत्रकारों से कहा कि ऑस्ट्रिया ने 2015 से ही अधिक संख्या में प्रवासियों को रखा हुआ है। जर्मनी की चांसलर एंजला मर्केल से मुलाकात के पहले उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रिया में पहले से ही दुनिया का चौथा सबसे बड़ा अफगान समुदाय है। मर्केल ने कहा कि उनकी सरकार का ध्यान इस बात पर है कि अफगानिस्तान के 10,000 से 40,000 नागरिकों की कैसे मदद की जाए जो अपने परिवार के करीबी सदस्यों के संग जर्मनी आने के हकदार हैं, क्योंकि उन्होंने जर्मनी के सैन्य या सहायता संगठनों के साथ काम किया है। उन्होंने कहा, “ हमें यह देखने की जरूरत है कि असल में कितने लोग देश छोड़ना चाहते हैं और कितने मुल्क नहीं छोड़ना चाहते हैं। यह देश में तालिबान द्वारा निर्मित परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।”इस बीच पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने इस्लामाबाद में जर्मनी के अपने समकक्ष हीको मास से मंगलवार को मुलाकात की और कहा कि पाकिस्तान ने गत दशकों में 30 लाख से अधिक अफगान शरणार्थियों को पनाह दी थी और अब उसके पास और अधिक लोगों को शरण देने की क्षमता नहीं है। प्रवासियों को अफगानिस्तान के निकट बसाने की ईयू की मंशा से मानवाधिकार संगठन खुश नहीं हैं। एमनेस्टी इंटरनशेनल ने जोहान्सन को लिखे पत्र में कहा है कि ईयू के देशों को उन उपायों को अपनाने से बचना चाहिए जिनमें शरणार्थियों की सुरक्षा का जिम्मा किसी तीसरे मुल्क पर डाला जाए।मानवाधिकार समूह ने कहा कि यूरोपीय संघ को यूरोप पहुंचने वाले अफगानों को "क्षेत्र तक पहुंच और निष्पक्ष और प्रभावी शरण प्रक्रियाएं उपलब्ध करानी चाहिए तथा सभी अफगान महिलाओं और लड़कियों को अफगानिस्तान में जोखिम के मद्देनजर "प्रथम दृष्टया शरणार्थी" मानना चाहिए। यूरोपीय संघ के कुछ अनुमानों के अनुसार, 2015 से अब तक लगभग 570,000 अफगानों ने यूरोप में शरण के लिए आवेदन किया है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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