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बेलारूस : ईयू की ओर से यात्रा पाबंदी लगाए जाने से मुश्किल में पड़े सरकार के आलोचक

By भाषा | Updated: May 29, 2021 21:15 IST

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कीव (यूक्रेन), 29 मई (एपी) बेलारूस में देश छोड़ने के इच्छुक लोगों के बीच सरकार के आचोलक पत्रकार को गिरफ्तार किये जाने के बाद से चिंताएं बढ़ गई हैं।

दरअसल, रविवार को यूनान से लिथुआनिया जा रहे एक विमान को बेलारूस की राजधानी मिंस्क में उतार लिया गया था। इस विमान में सरकार के आलोचक पत्रकार रेमन प्रातेसेविक सवार थे, जिन्हें विमान से उतारने के बाद गिरफ्तार कर लिया गया। मैसेजिंग ऐप पर चैनल चलाने वाले प्रातेसेविक राष्ट्रपति एलेक्जेंडर लुकाशेंको के खिलाफ प्रदर्शनों का आयोजन किया करते थे।

विमान को मिंस्क की ओर मोड़ने से पहले इसके नियंत्रकों ने चालक दल से कहा था कि विमान में बम होने की जानकारी मिली है, इसलिये इसे उतार लिया जाए।

इस घटना के बाद यूरोपीय यूनियन ने बेलारूस की उड़ानों पर प्रतिबंध लगा दिया, जिसके चलते देश में सरकार विरोधी विचारधारा के लोगों के लिये राष्ट्रपति लुकाशेंकों के तानाशाही शासन से बाहर निकलने के कुछेक विकल्प बचे हैं।

अधिकार समूह की प्रमुख तात्सियाना हत्सुरा-यावोरस्का ने कहा, ''सीमाएं बंद होने के चलते बेलारूस कैदखाना बन गया है। हम बंधक बन गए हैं।''

यावोरस्का का अधिकार समूह जेल से रिहा हुए लोगों की जीवन संवारने में मदद और डॉक्यूमेंट्री फिल्म महोत्सव का आयोजन करता है।

उन्होंने कहा, ''अधिकारियों ने डर का माहौल पैदा करने के लिये हाल ही में दमन को बढ़ा दिया है। ''

यावोरस्का ने कहा कि उनके अधिकतर दोस्त और परिचितों को हिरासत, छापेमारी और बुरी तरह से पिटाई का सामना करना पड़ा है और कई बेलारूस छोड़कर चले गए हैं।

यावोरस्का के यूक्रेनी पति व्लोदिमीर यावोरेस्की को अपने नौ साल के बेटे के साथ बेलारूस छोड़ने के आदेश दिया गया और उनकी वापसी पर दस साल तक पाबंदी लगा दी गई।

व्लोदिमीर ने कीव में एपी से कहा, ''वे मेरे बच्चे को ब्लैकमेल करते थे। उन्होंने पूछताछ के दौरान मेरी पिटाई और जेल में डालने की धमकी दी। आखिर में मुझे देश से बाहर निकाल दिया गया।''

लगभग 93 लाख की आबादी वाले बेलारूस की सत्ता पर करीब 25 साल से काबिज लुकाशेंको को अगस्त 2020 में छठी बार चुनाव में जीत मिलने के बाद से अभूतपूर्व विरोध का सामना करना पड़ रहा है। विपक्षी चुनाव में धांधली का आरोप लगाते हुए इसके परिणामों को खारिज कर चुका है।

लुकाशेंकों ने प्रदर्शनों को दबाने की पुरजोर कोशिश की। इस दौरान 35 हजार से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया जबकि हजारों लोगों की पीटा गया।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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