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Arvind Kejriwal Controversy: मोदी सरकार से खरी-खोटी सुनने के बाद जर्मनी सरकार ने कहा, "केजरीवाल विवाद भारत का आंतरिक मामला, हमारा कोई मतलब नहीं"

By आशीष कुमार पाण्डेय | Updated: March 28, 2024 09:01 IST

नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा अरविंद केजरीवाल गिरफ्तारी विवाद में कड़ा रूख अपनाये जाने के बाद जर्मनी ने यू-टर्न ले लिया है।

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ठळक मुद्देजर्मनी ने अरविंद केजरीवाल गिरफ्तारी विवाद में लिया यू-टर्न, बताया भारत का आंतरिक मामला नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा केजरीवाल विवाद में कड़ा रूख अपनाये जाने के जर्मनी ने स्टैंड क्लीयर कियाजर्मनी ने कहा कि हम भारत के साथ लोकतांत्रिक मूल्यों को साझा करते हैं

नई दिल्ली: नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा अरविंद केजरीवाल गिरफ्तारी विवाद में कड़ा रूख अपनाये जाने के बाद बीते बुधवार को जर्मनी ने यू-टर्न ले लिया है और इस मुद्दे पर पलटते हुए विवाद को भारत का आंतरिक मामला बताते हुए दखल देने से इनकार कर दिया है।

इससे पहले अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता द्वारा दिल्ली शराब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा गिरफ्तार किये गये दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर की गई टिप्पणी पर कड़ी आपत्ति जताते हुए मोदी सरकार ने अमेरिकी राजनयिक को तलब किया था।

समाचार वेबसाइट हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार भारत सरकार के विदेश मंत्रालय द्वारा पिछले शनिवार को एक वरिष्ठ जर्मन राजनयिक को साउथ ब्लॉक में बुलाया गया था और भारत के आंतरिक मामलों पर जर्मन प्रवक्ता के बयान के विरोध में एक डिमार्श दिया गया था। भारत सरकार ने स्पष्ट कहा था कि जर्मन प्रवक्ता की केजरीवाल की गिरफ्तारी के संबंध में की टिप्पणी साधे तौर पर भारतीय न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप और भारतीय न्यायपालिका की स्वतंत्रता को कमजोर करने के रूप में देखा जा रहा है।

विदेश मंत्रालय द्वारा जर्मनी के विदेश मत्रालय से शुरू किए गए ठोस जवाबी कार्रवाई के परिणाम स्वरूप जर्मन प्रवक्ता ने अपने अधिकारी के दिल्ली में तलब किये जाने के बारे में कोई भी विवरण साझा करने से इनकार कर दिया और मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की।

जर्मन प्रवक्ता ने कहा, “इस मामले पर हमारी ओर से कोई टिप्पणी नहीं की जाएगी। यह गोपनीय बातचीत है, जिसकी रिपोर्ट हम नहीं साझा करेंगे। दोनों पक्षों की आपसी सहयोग में गहरी रुचि है और हम और भारतीय पक्ष अगले सरकारी परामर्श की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जो इस वर्ष की शरद ऋतु में होने की उम्मीद है। भारतीय संविधान बुनियादी मानव अधिकारों और स्वतंत्रता की गारंटी देता है। हम एक रणनीतिक भागीदार के रूप में भारत के साथ इन लोकतांत्रिक मूल्यों को साझा करते हैं।''

जर्मनी की ओर से यह प्रतिक्रिया ऐसे समय में आई है जब भारत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका जैसे लोकतांत्रिक देशों को कानून की उचित प्रक्रिया पर साथी सबसे बड़े लोकतंत्र पर टिप्पणी करने में बहुत सावधानी बरतनी होगी। इसके साथ नई दिल्ली ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि तीसरे देशों के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करना दोतरफा रास्ता है और इससे बुरी मिसालें पैदा होंगी।

समझा जाता है कि पश्चिमी यूरोप के एक अन्य देशों ने भी भारत को चुपचाप सूचित कर दिया है कि वह दिल्ली उत्पाद शुल्क नीति घोटाले में ईडी मनी लॉन्ड्रिंग जांच में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे।

टॅग्स :जर्मनीअमेरिकाभारतअरविंद केजरीवाल
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