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2021 : भौतिक वैज्ञानिकों ने पूछा, ‘मानक मॉडल से परे क्या है?’

By भाषा | Updated: December 26, 2021 15:20 IST

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(आरोन मैकगोवन, भौतिक विज्ञान तथा खगोलशास्त्र में प्रमुख व्याख्याता, रोचेस्टर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी)

रोचेस्टर (अमेरिका), 26 दिसंबर (द कन्वरसेशन) अगर आप मेरे जैसे भौतिक विज्ञानी से यह बताने के लिए कहेंगे कि दुनिया कैसे काम करती है तो मेरा जवाब हो सकता है : ‘‘यह मानक मॉडल का पालन करती है।’’

मानक मॉडल ब्रह्मांड कैसे काम करता है,कि भैतिकी को समझाता है। मानक मॉडल, भौतिकशास्त्र का एक सिद्धान्त है जिसका संबंध विद्युत चुम्बकीय, दुर्बल तथा प्रबल नाभिकीय अन्तः क्रियाओं से है।

मैं परमाणु रिएक्टरों से उत्पन्न न्यूट्रिनो का अध्ययन करने वाला भौतिक विज्ञानी हूं। न्यूट्रिनो मानक प्रारूप में 17 मौलिक कणों में से तीन का प्रतिनिधित्व करता है। मैं न्यूट्रिनों और सामान्य कणों के बीच परस्पर क्रिया के गुणों का अध्ययन करता हूं।

दुनियाभर के भौतिक वैज्ञानिकों ने 2021 में कई प्रयोग किए जिसमें मानक मॉडल की जांच की गयी। वैज्ञानिकों ने मॉडल के मूल मानकों को पहले से कहीं अधिक सटीक रूप से मापा।

जेजे थॉमसन ने 1897 में कांच की वैक्यूम ट्यूब और तारों का उपयोग कर पहले मौलिक अणु ‘इलेक्ट्रॉन’ की खोज की। इसके 100 से अधिक वर्षों बाद भौतिक विज्ञानी मानक मॉडल के नए टुकड़ों की अब भी खोज कर रहे हैं।

मानक मॉडल एक भविष्यसूचक रूपरेखा है जो दो चीजे करता है। पहला यह बताता है कि पदार्थ के मूल कण क्या हैं। ये इलेक्ट्रॉन और क्वार्क की तरह हैं जो प्रोटोन और न्यूट्रॉन बनाते हें। दूसरा यह बताता है कि कैसे ये कण ‘‘संदेशवाहक कणों’’ का इस्तेमाल कर एक-दूसरे से संपर्क करते हैं। उन्हें बोसोन्स कहा जाता है और इनमें फोटोन्स तथा हिग्स बोसोन होते हैं।

मानक मॉडल उन कई आयामों का पता लगाने के लिए काफी अच्छा है कि दुनिया कैसे काम करती है लेकिन इसमें कुछ खामियां हैं।

मुख्य रूप से इसमें गुरुत्वाकर्षण का कोई विवरण नहीं है। हालांकि, आइंस्टाइन का सामान्य सापेक्षता का सिद्धांत यह बताता है कि गुरुत्वाकर्षण कैसे काम करता है लेकिन भौतिक विज्ञानी अभी तक उस कण की खोज नहीं कर पाए हैं जो गुरुत्वाकर्षण का बल बताता हो।

मानक मॉडल की एक और खामी है कि इसमें यह नहीं बताया गया कि किसी कण का एक निश्चित द्रव्यमान क्यों होता है।

कुछ अन्य तकनीकी उपलब्धियां डार्क मैटर की खोज में मदद करने के लिए हासिल की गयी। कई खगोल वैज्ञानिकों का मानना है कि आम तौर पर मानक मॉडल में फिट नहीं होने वाले डार्क मैटर कण कुछ महत्वपूर्ण सवालों का जवाब दे सकते हैं जैसे कि गुरुत्वाकर्षण जिस तरीके से सितारों की ओर झुकता है और साथ ही कितनी गति पर तारे सर्पिल आकाशगंगाओं में घूमते हैं। क्रायोजेनिक डार्क मैटर सर्च जैसी परियोजनाओं में अभी तक डार्क मैटर कणों का पता नहीं लगाया गया है लेकिन टीमें वृहद और अधिक संवेदनशील डिटेक्टर्स विकसित कर रहे हैं जिन्हें निकट भविष्य में तैनात किया जाएगा।

उम्मीद है कि इन डिटेक्टर्स का इस्तेमाल कर वैज्ञानिक न्यूट्रिनो के दोलन में मूलभूत विषमता के बारे में सवालों का जवाब दे सकेंगे।

इस साल यह पता चला कि मानक मॉडल ब्रह्मांड के प्रत्येक रहस्य के बारे में बताने में नाकाम रहा है। लेकिन नए मानक और नयी प्रौद्योगिकियां भौतिक वैज्ञानिकों को ‘थ्योरी ऑफ एवरीथिंग’ की खोज में आगे बढ़ने में मदद कर रही हैं।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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