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दिल्ली: शख्स ने कोविड-19 कंट्रोल करने के सरकार के उपायों पर उठाए सवाल, सरकारी से लेकर प्राइवेट लैब में कहा गया 2-3 दिनों के लिए बंद है टेस्टिंग

By सुमित राय | Updated: June 5, 2020 15:18 IST

दिल्ली के रोहिणी में रहने वाले एक शख्स ने कोविड-19 कंट्रोल करने के सरकार के उपायों पर सवाल उठाते हुए फेसबुक पर बताया है कि कैसे सरकारी हॉस्पिटल के चक्कर लगाने के बाद उसकी प्राइवेट लैब में भी टेस्टिंग नहीं हुई।

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ठळक मुद्देकोरोना के बढ़ते प्रकोप के बीच दिल्ली सरकार ने मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था का दावा कर रही है।दिल्ली के एक शख्स ने सरकार के इस दावे पर सवाल उठाते हुए अपनी स्टोरी शेयर की है।शख्स का दावा है कि टेस्टिंग के लिए प्राइवेट लैब में कहा गया कि सरकार ने 2-3 दिन टेस्ट करने से मना किया है।

कोरोना वायरस का संक्रमण देश की राजधानी दिल्ली में लगातार बढ़ता जा रहा है और अब तक 25 हजार से ज्यादा लोग इस महामारी की चपेट में आ चुके हैं। महामारी के बढ़ते प्रकोप के बीच दिल्ली सरकार ने मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था का दावा कर रही है, लेकिन दिल्ली के एक शख्स ने सरकार के इस दावे पर सवाल उठाते हुए अपनी स्टोरी शेयर की है और बताया है कि कोविड-19 की टेस्टिंग के लिए उसको सरकारी और प्राइवेट लैब में कहा गया कि सरकार ने 2-3 दिन टेस्ट करने से मना किया है।

दिल्ली के रोहिणी के रहने वाले वरुण वत्स ने अपने फेसबुक पर अपनी कहानी शेयर की है और बताया है कि "मुझे कोरोना (बुखार, खांसी, जुकाम और सिरदर्द) के लक्षण दिखाई दे रहे हैं, क्योंकि मैं अपने चचेरे भाई के संपर्क में आया था, जो 1 जून को पॉजिटिव पाया गया था। इसके बाद मैंने खुद का टेस्ट कराने का फैसला किया, लेकिन पिछले तीन दिनों में मेरे साथ क्या हुआ यह मैं शेयर कर रहा हूं।"

चैप्टर 1 में शख्स ने बताई हेल्पलाइन नंबर की कहानी

शख्स ने पहले चैप्टर में लिखा है, "मैंने अपने स्टेटस को बहुत ही हाईप्रोफाइल 'आरोग्य सेतु ऐप' पर अपडेट किया, जिसके बाद मुझे लैब्स की लिंक मिला, लेकिन दुर्भाग्य से वह नहीं खुल रही थी। इसके बाद मैंने केंद्र सरकार के कोविड-19 हेल्पलाइन नंबर 1075 पर कॉल किया, जिसके बाद मुझे दिल्ली सरकार की हेल्पलाइन नंबर (011-22307145) दी गई। 1 घंटे के प्रयास के बाद इस नंबर पर किसी ने फोन उठाया और मुझे दिल्ली के रोहिणी वेस्ट में स्थित दिल्ली सरकार के अस्पताल 'डॉ बाबा साहेब अम्बेडकर अस्पताल' जाने के लिए कहा।"

चैप्टर 2 में शख्स ने बताई हॉस्पिटल पहुंचने के बाद की कहानी

दूसरे चैप्टर में शख्स ने लिखा है, "2 जून को दोपहर करीब 12.30 बजे अपने चचेरे भाई की रिपोर्ट लेकर आंबेडकर हॉस्पिटल पहुंचा। मुझे काउंटर से टोकन मिला और उन्होंने दोपहर 3 बजे तक इंतजार करने को कहा, लेकिन मेरा नंबर करीब 4.20 बजे आया। इसके बाद डॉक्टर ने कहा कि अभी दो दिन टेस्ट नहीं हो रहे हैं, आपको 4 जून की डेट दे रहा हूं। इसके बाद दो दिन बाद टेस्ट होने की उम्मीद के साथ में घर वापस आ गया, क्योंकि लक्षण इतने गंभीर नहीं थे।"

चैप्टर 3 में शख्स ने बताई दूसरी बार हॉस्पिटल पहुंचने की कहानी

शख्स ने तीसरे चैप्टर में लिखा है, "मैं 4 जून को बिना किसी सरप्राइज की उम्मीद के सुबह 10.15 बजे हॉस्पिटल पहुंच गया और सबसे पहले मेरा कुछ लोगों से सामना हुआ, जो कोविड-19 टेस्ट के लिए आए थे, लेकिन कोई सैंपल नहीं ले रहा था। इसके बाद मैं आंबेडकर हॉस्पिटल के सैंपल कलेक्शन काउंटर पर गया। काउंटर पर बैठी औरत ने बताया कि अभी टेस्ट नहीं हो रहे, ऊपर से परमिशन नहीं आई। इसके बाद अन्य लोगों के साथ मैं दूसरे काउंटर पर गया, लेकिन किसी ने हमारी दलील नहीं सुनी। इसके बाद मैंने एक बार फिर दिल्ली सरकार के कोविड-19 हेल्पलाइन नंबर को डायल किया तो सामने वाली महिला मेरे कुछ भी बताने से पहले ही स्थिति जान चुकी थी। मैंने उसे अपना क्षेत्र बताया और उसने तुरंत कहा आंबेडकर में टेस्टिंग नहीं हो रही ना, तो रोहिणी सेक्टर 5 में महाराजा अग्रसेन भवन चले जाओ, अगर आपके पास डॉक्टर के पर्चा है तो। मैंने उस पर्चे के बारे में पुष्टि की जिसके बाद मुझे परीक्षण केंद्र का पता दिया गया।"

चैप्टर 4 में महाराजा अग्रसेन भवन की कहानी

चौथे चैप्टर में शख्स ने लिखा है, "इसके बाद मैं रोहिणी सेक्टर 5 में स्थित महाराजा अग्रसेन भवन गया। गेट पर बैठे 2 वॉचमैन ने मुझसे यहां आने का कारण पूछा, जिसके बाद मैंने उन्हें अपने पूरे काम के बारे में बताया। उनमें से एक ने कहा भाई यहां नहीं हो रहे हैं टेस्ट, किट खत्म हो गई। मैंने उनसे कहा कि मुझे राज्य के हेल्पलाइन नंबर पर इस अस्पताल आने के लिए कहा गया है। लेकिन वॉचमैन असहाय थे और कहा कि हम क्या कर सकते हैं, जो है आपके सामने है।"

चैप्टर 5 में शख्स ने बताई प्राइवेट लैब की कहानी

चैप्टर 5 में शख्स ने लिखा है, "मैं उस जगह से बाहर आया और एक प्राइवेट लैब को कॉल किया, क्योंकि मैं थक गया था और सभी लोगों की एक ही बात से काफी नाराज था। अब तक मेरे लक्षण (खांसी और कमजोरी) काफी बढ़ गए थे। ऑपरेटर ने कॉल उठाया, जिसके बाद मैंने निराश होकर अपनी पूरी कहानी सुनाई। तो उसन कहा सर केस ज्यादा हो रहे हैं, किट्स नहीं हैं। दो-तीन दिन के बाद आप पता करना।"

चैप्टर 6 में बताई दूसरे प्राइवेट लैब की कहानी

छठे चैप्टर में शख्स ने लिखा है, "मैं अभी भी उम्मीद कर रहा था कि कुछ प्राइवेट लैब मेरी मदद कर सकते हैं और मैंने डॉक्टर पैथ लैब को कॉल किया। जिस महिला ने फोन उठाया उसने कहा सर सरकार के ऑर्डर हैं। दो-तीन दिन तक टेस्टिंग बंद है। मैं एकदम निराश हो गया था और सोचा कि इसमें कुछ गड़बड़ है। इसके बाद मैंने खुद का टेस्ट कराने के लिए कई प्राइवेट लैब में फोन करने की कोशिश की, लेकिन सभी ने मुझे एक ही जवाब दिया।

शख्स ने अंत में लिखा है कि अब मैं बुखार, खांसी, जुकाम, सिरदर्द और कमजोरी के साथ अपने घर पर लेटा हूं।

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