सुप्रीम कोर्ट की वकील ने कहा- "महिलाओं के सशक्तिकरण और उनके हित के लिए उन्हें सिर्फ महिलाओं के तौर पर ही नहीं, एक इंसान के तौर पर देखा जाना चाहिए। महिलाओं को वो हक मिलने ही चाहिए जो उन्हें संविधान ने दिए हैं।"