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Rakesh Tikait किसान महापंचायत में बोले- हमारे मंच और पंच वही हैं, सरकार आज बात करे या अगले साल, हम तैयार हैं

By गुणातीत ओझा | Updated: February 13, 2021 01:09 IST

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किसान आंदोलनटिकैत की मोदी सरकार को नई चेतावनीKisan Mahapanchayat: नए कृषि कानूनों के विरोध में टीकरी बॉर्डर पर आयोजित किसान महापंचायत में भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने आज फिर दोहराया कि कृषि कानून (Farm Laws) रद्द होने के बाद ही 'घर वापसी' होगी। टिकैत ने कहा कि हम पंचायती प्रणाली को मानने वाले लोग हैं। हम फैसलों के बीच में न पंच बदलते हैं और न ही मंच बदलते हैं। हमारा दफ्तर सिंघु बॉर्डर पर ही रहेगा और हमारे लोग भी वहीं रहेंगे। जो सरकार की लाइन थी बातचीत करने की उसी लाइन पर वह बातचीत कर लें। केंद्र चाहे तो आज बात कर ले या 10 दिनों में या अगले साल, हम तैयार हैं। हम दिल्ली से बैरिकेड्स हटाए बिना नहीं जाएंगे।केंद्र के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ संयुक्त किसान मोर्चा ने किसान आंदोलन को और तेज करने की घोषणा की है। इसके लिए आगे आने वाले दिनों में देशभर में 'किसान महापंचायत' आयोजित की जाएगी। मोर्चा ने साफ कर दिया है कि जब तक विवादित तीनों कृषि कानूनों को वापस नहीं लिया जाता एवं उनकी फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की गारंटी नहीं दी जाती तब तक आंदोलन खत्म नहीं होगा। किसान संगठन ने गुरुवार को एक बयान जारी कर कहा था कि किसानों की टीम राज्यवार महापंचायत के कार्यक्रम के लिए योजना बना रही है। टिकैत ने कहा कि किसान हर साल 2 अक्टूबर को गाजीपुर सीमा पर विरोध प्रदर्शन करते हैं। उन्होंने कहा, "गाजीपुर बॉर्डर पर 2 अक्टूबर, 2018 को किसानों पर आंसू गैस के गोले और गोलियां चलाई गईं थी। तब से हर साल हम गाजीपुर बॉर्डर पर एक कार्यक्रम करते हैं और इस साल भी करेंगे।" किसानों के मुद्दों पर संसद में बहस के बारे में पूछे जाने पर टिकैत ने कहा कि यह अच्छा है कि इस मुद्दे को संसद में उठाया जाए और इस पर बहस की जाए। यह वास्तव में चर्चा का विषय होना चाहिए कि देश के किसान इतने लंबे समय से विरोध कर रहे हैं।टिकैत ने सवाल पूछते हुए कहा, "पूरे देश के किसान सड़कों पर विरोध कर रहे हैं, जरुर इसके पीछे कोई कारण होगा। अगर किसानों द्वारा कृषि कानूनों को स्वीकार नहीं किया जा रहा है, तो उन्हें वापस न लेने की क्या मजबूरी है?"बता दें कि बीते कई महीनों से किसान केंद्र के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ 26 नवंबर से राष्ट्रीय राजधानी की तमाम सीमाओं पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इस बीच कई बार आंदोलन में उतार-चढ़ान भी देखने को मिले। साथ ही सरकार से किसान नेताओं की हुई कई दौर की बातचीत में भी कोई ठोस हल नहीं निकल पाया है। ये सभी किसान इन तीनों कृषि कानूनों को सरकार द्वारा वापस लेने की बात पर अड़े हुए हैं। किसान दिल्ली के तीन सीमाओं सिंघु, टीकरी और गाजीपुर बॉर्डर पर पिछले 79 दिनों से प्रदर्शन कर रहे हैं जिनमें अधिकतर पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हैं।
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