क्या आपको मालूम है कि इस लड़ाई के ठीक बाद धृतराष्ट्र अपने पुत्र दुर्योधन की मृत्यु से इतने हताश थे कि उन्होंने भीम को मारने की योजना बना ली थी। धृतराष्ट्र अपनी इस योजना में कामयाब भी हो जाते अगर श्रीकृष्ण ने चतुराई से काम नहीं लिया होता। ...
मध्य प्रदेश के बुरहानपुर में स्थित असीरगढ़ के किले का संबंध महाभारत काल से बताया जाता है। यह जगह खांडव जिले के पास है जो उस समय खांडव क्षेत्र के नाम से जाना जाता था। ...
कई वर्षों के बाद राधा जब बूढ़ी और कमजोर हो गईं तो उन्होंने आखिरी बार श्रीकृष्ण से मिलने का फैसला किया। अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियों को पूरा कर राधा द्वारका की ओर रवाना हो गईं। ...
महाभारत की कहानी के अनुसार अर्जुन के पुत्र इरावन बेहद आक्रामक और कुशल योद्धा थे। उन्होंने महाभारत के युद्ध में हिस्सा लेते बहादुरी से कौरवों के खिलाफ लड़ाई की और नुकसान पहुंचाया। ...
श्रीकृष्ण ने अर्जुन को पहले ही जयद्रथ को मिले गुप्त वरदान के बारे में बता दिया था। इसके अनुसार जो भी वीर इसका सिर धरती पर गिराएगा, उसके मस्तक में भी विस्फोट होगा। ...
श्रीकृष्ण युद्ध के बाद जब द्वारका लौटने लगे तो वे माता गांधारी का आशीर्वाद लेने उनके पास पहुंचे। गांधारी उन्हें देखते ही आग बलूला हो गईं और श्राप दिया। ...
इस युद्ध में बभ्रुवाहन भारी पड़े और ऐसा तीखा तीर अपने पिता पर चलाया जिससे अर्जुन अपनी जान गंवा बैठे। ब्रभुवाहन भी बेहोश हो गये। इसके बाद चिंत्रागदा भी युद्ध भूमि पहुंच गईं और विलाप करने लगी। ...
करीब 5000 साल पहले की इस कहानी से जुड़े ऐसे कई रोचक प्रसंग हैं जो बहुत लोगों को मालूम नहीं हैं। इसी में से एक है ज्येष्ठ पांडु पुत्र युधिष्ठिर का अपनी ही मां कुंती को श्राप देने का प्रसंग, जिसके बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं। ...