लद्दाख एक ऊंचा पठार है जिसका अधिकतर हिस्सा 3,500 मीटर (9,800 फीट) से ऊंचा है। यह हिमालय और कराकोरम पर्वत श्रृंखला और सिन्धु नदी की ऊपरी घाटी में फैला है। करीब 33,554 वर्गमील में फैले लद्दाख में बसने लायक जगह बेहद कम है। यहां हर ओर ऊंचे-ऊंचे विशालकाय पथरीले पहाड़ और मैदान हैं। यहां के सभी धर्मों के लोगों की जनसंख्या मिलाकर 2,36,539 है। लद्दाख के पूर्वी हिस्से में लेह के आसपास रहने वाले निवासी मुख्यतः तिब्बती, बौद्ध और भारतीय हिन्दू हैं, लेकिन पश्चिम में करगिल के आसपास जनसंख्या मुख्यतः भारतीय शिया मुस्लिमों की है। तिब्बत पर कब्जे के दौरान बहुत से तिब्बती यहां आकर बस गए थे। लद्दाख को चीन, तिब्बत का हिस्सा मानता है। सिन्धु नदी लद्दाख से निकलकर ही पाकिस्तान के कराची तक बहती है। प्राचीनकाल में लद्दाख कई अहम व्यापारिक रास्तों का प्रमुख केंद्र था। Read More
श्रीनगर में इस मौसम की सबसे सर्द रात दर्ज की गई। मौसम विभाग ने यह जानकारी दी। मौसम विभाग के अधिकारी के अनुसार समूचे कश्मीर और लदाख में बुधवार को न्यूनतम तापमान शून्य से कई डिग्री नीचे दर्ज किया गया। हालांकि आसमान साफ रहा। ...
अधिकारियों ने बताया कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कोहरा छाया रहा और आसमान में बादल छाये रहने के कारण धूप की आंखमिचौली जारी रही। सर्द हवाओं के कारण हवा प्रदूषित हो गयी। शाम चार बजे संपूर्ण वायु गुणवत्ता सूचकांक 418 दर्ज किया गया जो बेहद खराब श्रेणी ...
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के निवासी का दर्जा पाने के लिए यहां कम से कम 15 साल रहना पड़ेगा। सरकार ने इस नियम का प्रस्ताव दिया है। हालांकि अभी अंतिम फैसला नहीं लिया गया। ...
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह कहा कि नगालैंड आज शांति और विकास के क्षेत्र में एक उदाहरण के रूप में उभरा है। उसने अतीत के सभी कड़वे अनुभवों को परे रख दिया है तथा उसी रफ्तार से आगे बढ़ रहा है जिससे भारत के कुछ विकसित राज्य आगे बढ़ते हैं। ...
मौसम विभाग ने बताया कि श्रीनगर में शनिवार को सीजन की सबसे ठंडी रात रही और पारा औसत के मुकाबले 1.6 डिग्री सेल्सियस और गिरकर शून्य से 2.5 डिग्री सेल्सियस नीचे पहुंच गया। उत्तरी कश्मीर का गुलमर्ग, घाटी का सबसे ठंडा इलाका बना हुआ है, जहां तापमान शून्य से ...
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की एक राजपत्रित अधिसूचना के अनुसार, ‘‘केंद्र सरकार ने मोटर वाहन अधिनियम 1988 में निहित शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए तत्कालीन भूतल परिवहन मंत्रालय द्वारा 12 जून 1989 को प्रकाशित अधिसूचना एसओ-444(ई) में संशोधन किया है ...