हिन्दू धर्म में गणेश चतुर्थी एक महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक माना जाता है। हमारे शास्त्रों में भगवान गणेश को प्रथम पूजनीय कहा गया है। कोई भी शुभ काम हो या किसी तरह की विपत्ति आन पड़ी हो तो सबसे पहले विघ्न हर्ता भगवान गणेश की पूजा की जाती है। पुराणों की मानें तो गणेश चतुर्थी के दिन ही गणेश जी का जन्म हुआ था। 10 दिनों तक चलने वाले इस गणेश चतुर्थी के पर्व की धूम पूरे देश में रहती है मगर इसका असली रंग आपको महाराष्ट्र में देखने को मिलेगा। शिवपुराण में भाद्रपद मास के कृष्णपक्ष की चतुर्थी को मंगलमूर्ति गणेश की अवतरण-तिथि बताया गया है जबकि गणेशपुराण के मत से यह गणेशावतार भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को हुआ था। Read More
हमारे धर्म ग्रंथों के अनुसार गणेश चतुर्थी को चंद्र दर्शन नहीं करने चाहिए क्योंकि इस रात्रि को चंद्र दर्शन करने से झूठे आरोप लगते हैं। इस सम्बन्ध में हमारे धर्म ग्रंथों में दो कथाएं है। ...
भगवान शिव और विष्णु की ही तरह श्री गणेश ने भी असुरों के नाश और धर्म की रक्षा के लिए कई बार अवतार लिया था। पुराणों के अनुसार हर युग में असुरी शक्ति को खत्म करने के लिए उन्होंने विकट, महोदर, विघ्नेश्वर जैसे आठ अलग-अलग नामों के अवतार लिए हैं। ...
भाद्र मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को गणेशजी का जन्म हुआ था, इस उपलक्ष्य में हर साल गणेश चतुर्थी का पर्व मनाया जाता है। गणेश चतुर्थी को विनायक चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। ...
कोरोना वायरस ने इस साल सभी त्यौहारों का मजा किरकिरा कर दिया है। ऐसे में इस बार गणेश चतुथी भी सभी अपने-अपने घरों में मना रहे हैं। इसी क्रम में टीवी एक्ट्रेस अंकिता लोखंडे ने सोशल मीडिया पर तस्वीरें शेयर की हैं। ...
कोरोना संकट की वजह से महाराष्ट्र सरकार की ओर से जारी दिशा-निर्देश में इस साल सार्वजनिक पंडालों में और घरों में आयोजित होने वाली इस पूजा में भगवान गणेश की प्रतिमा की उंचाई को सीमित कर दिया गया है। ...
भाद्रपद मास में कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को भगवान श्रीगणेश के अवतरण की तिथि माना गया है। यह तिथि सभी संकटों का नाश करने वाली है। इस तिथि को सर्व कामनाओं को प्रदान करने वाली माना जाता है। ...
आपको बता दे कि कोरोना वायरस के चलते इस बार गणेशोत्सव को लेकर काफी नियम बदले गए हैं। जिसके चलते कई बड़े पंडाल जहां ये त्योहार नहीं मना रहे हैं वहीं छोटे पंडाल और घरों में लोग भगवान गणेश को स्थापित कर रहें हैं ...