शून्य से 50 के बीच एक्यूआई ‘अच्छा’, 51 से 100 के बीच ‘संतोषजनक’, 101 से 200 के बीच ‘मध्यम’, 201 से 300 के बीच ‘खराब’, 301 से 400 के बीच ‘बहुत खराब’ और 401 से 500 के बीच ‘गंभीर’ माना जाता है। ...
पारिस्थितिकी संतुलन का बड़ा आधार है पेड़-पौधे और जीव-जंतुओं का सहज प्राकृतिक आवास. यह संतुलन यदि बिगड़ता है तो पर्यावरण को सीधे तौर पर नुकसान होता है. ...
धरती के सारे जीव प्रकृति के सृजन में लगे हैं लेकिन मनुष्य एकमात्र ऐसा जीव है जो धरती से लेकर अंबर तक अपनी हरकतों से प्रकृति को नष्ट करने में लगा है. यह समझना जरूरी है कि प्रकृति तो हमारे बगैर भी रह लेगी, हम प्रकृति के बगैर एक पल भी नहीं रह पाएंगे! ...
विशेषज्ञों के अनुसार, जलवायु परिवर्तन गर्मी, तूफान, बाढ़, सूखे, जंगल में लगने वाली आग और वायु प्रदूषण के अलावा खाद्य असुरक्षा, दूषित पानी एवं भोजन से होने वाली बीमारियों, मच्छर जनित बीमारियों, पलायन और संघर्ष के जरिए गर्भावस्था को प्रभावित करता है। ...
प्रकृति और मनुष्य के बीच संघर्ष का परिणाम पर्यावरण संकट के रूप में आ रहा है. हवा, पानी और भोजन जैसे जीवन जीने के लिए अनिवार्य तत्व घोर प्रदूषण की गिरफ्त में आ रहे हैं. ...