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राष्ट्रपति उम्मीदवार ने जताई बिग टेक कंपनियों को तोड़ने की इच्छा, फेसबुक CEO मार्क जुकरबर्ग ने दिया जवाब

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: October 2, 2019 17:50 IST

फेसबुक पर डेटा लीक मामले में आरोप लग चुका है औऱ इसके लिये उसे जुर्माना भी भरना पड़ा। इसके अलावा यूजर्स का फोन नंबर भी लीक करने का मामला सामने आया था।

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ठळक मुद्देराष्ट्रपति उम्मीदवार एलिजाबेथ वॉरेन ने कहा कि वह बिग टेक कंपनियों को तोड़ना चाहती हैं।इसके पीछे उन्होंने बताया कि यह बहुत ताकतवर हो जाती हैं और कई चीजों को प्रभावित करती हैं।

फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्क ने कंपनी से जुड़े कई सवालों के जवाब दिये। जैसे 2020 की राष्ट्रपति उम्मीदवार एलिजाबेथ वारेन ने कहा कि उनकी सरकार बनी तो वह बिग टेक कंपनियों जैसे फेसबुक, गूगल, अमेजन को तोड़ देंगी। वर्ज के मुताबिक एक लीक ऑडियो के जरिये ये बातें सामने आयी हैं। 

बिग टेक कंपनियों को तोड़ने के एलिजाबेथ के बयान पर जुकरबर्ग ने कहा यदि वह प्रेसीडेंट चुनी जाती हैं तो हमारे सामने एक बड़ा कानूनी चैलेंज होगा और मैं आपसे दावा करता हूं कि हम कानूनी लड़ाई जीतेंगे। और यह हमारे लिये गंभीर चुनौती होगी।

मेरे कहने का मतलब यह नहीं है कि मैं अपनी ही सरकार के खिलाफ बड़ा केस करना चाहता हूं, लेकिन देखिए, अगर कोई किसी के अस्तित्व को खतरे में डालेगा तो आप लड़ते हैं।

दूसरा पक्ष- वॉरेन ने जुकरबर्ग के लीक कॉमेंट का जवाब देते हुये ट्वीट किया कि क्या होगा यदि हम उस भ्रष्ट सिस्टम को खत्म नही करते हैं जो फेसबुक जैसी बड़ी कंपनियों को गैरकानूनी, प्रतिस्पर्धा विरोधी प्रयास, यूजर के गोपनीय अधिकारों को तोड़ने और लोकतंत्र की रक्षा करने के दायित्व को बार बार तोड़ते हैं।

बड़ी बात- फेसबुक ने हाल ही में कई नियामकों के साथ मामला सुलझाया और जीत हासिल किया। वर्ज लिखता है कि इतने के बाद भी भविष्य को लेकर कंपनी अंदर से चिंतित रहती है। 

फेसबुक बिग टेक कंपनियों के केंद्र में है और वॉरेन के बयान के बाद जुकरबर्ग ने हाल ही में टॉप लॉ मेकर्स से मिलने के लिये डीसी का दौरा किया।

जुकरबर्ग- ऑडियो में जुकरबर्ग ने बार बार कहा कि यदि वह कंपनी के कंट्रोल के लिये बातचीत न करते तो उन्हें बहुत पहले सीईओ के रुप में निकाल दिया जाता।

बिग टेक को तोड़ने पर जुकरबर्ग- फेसबुक, गूगल और अमेजन कपनियों को तोड़ना समस्या को हल करना नहीं है। आप जानते हैं कि इनकी चुनाव में हस्ताक्षेप की खबरे कम नहीं हैं बल्कि अब औऱ अधिक संभावना है क्योंकि अब कंपनियां क्वार्डिनेट नहीं करती और साथ काम भी नहीं करती।

दूसरे देशों में गवाही देने से इनकार करने पर- जब पिछले साल कैम्ब्रिज एनालिटिका से जुड़ा मुद्दा सामने आय़ा था तो मैने यूएस में सुनवाई की। मैंने ईयू में सुनवाई की। इसका कोई मतलब नहीं कि मैं एक-एक देश में सुनवाई के लिये जाऊं।

फेसबुक के लिब्रा क्रिप्टोकैरेंसी प्रोजेक्ट पर जुकरबर्ग- मुझे लगता है कि सार्वजनिक चीजें थोड़ी ज्यादा नाटकीय हो जाती हैं। हालांकि, इसमें सबसे अहम बात पूरी दुनिया के रेगुलेटर्स के साथ निजी भागीदारी है और वो, मुझे लगता है कि अक्सर ज्यादा मौलिक और कम नाटकीय रहता है। ऐसे मीटिंग मुझे नहीं लगते कि कैमरे के लिए किये जाते हैं बल्कि यह वह जगह होती है जहां खूब चर्चा और विस्तृत बातों से इन मुद्दों पर उलझन खत्म होती है।

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