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Hariyali Teej 2019: हरियाली तीज कब है? जानिए क्या है शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, व्रत कथा और महत्व

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: July 24, 2019 15:22 IST

हरियाली तीज उत्सव को भी भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। मान्यता के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तप किया था।

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ठळक मुद्देसावन के शुक्ल पक्ष की तृतीया को हर साल मनाया जाता है हरियाली तीजहरियाली तीज इस बार 3 अगस्त को, सुहागिन महिलाएं करती हैं भगवान शंकर और माता गौरी की पूजा

Hariyali Teej 2019: हिंदू धर्म में सावन मास की तरह इसमें पड़ने वाले हरियाली तीज पर्व का भी बहुत महत्व है। हरियाली तीज हर साल सावन माह की शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाई जाती है। इस दिन सुहागिन महिलाएं भगवान शंकर और माता गौरी की पूजा करती हैं पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं। सावन में हरियाली तीज के अलावा सोमवार व्रत, शिवरात्रि, नागपंचमी और रक्षाबंधन सहित जैसे महत्वपूर्ण त्योहार भी आते हैं जिसका काफी महत्व है। हरियाली तीज के बाद हरतालिका तीज का भी पर्व आता है जो बिहार-नेपाल आदि क्षेत्रों में काफी लोकप्रिय है। 

Hariyali Teej 2019: हरियाली तीज कब है?

सावन में पड़ने वाला हरियाली तीज इस बार अगस्त में पड़ रहा है। यह पर्व अगस्त के पहले हफ्ते में यानी 3 अगस्त को पड़ रहा है। यह शनिवार का दिन है। वहीं, हरियाली तीज के बाद आने वाला हरतालिका तीज 1 सितंबर को पड़ेगा। हरियाली तीज के अवसर पर देशभर में कई जगह मेले लगते हैं और सुहागिनें एक साथ इकट्ठा होकर माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा करती हैं।

Hariyali Teej: हरियाली तीज मनाने की क्या है परंपरा

इस त्योहार को ज्यादातर महिलाएं अपने मायके में मनाती हैं। इस दिन महिलाएं दिन भर का उपवास रखती हैं और पति सहित समस्त घर के सुख, समृद्धि की कामना करती हैं। अगर महिला ससुराल में है तो इस दिन खासतौर पर मायके से उनके लिए कपड़े, गहने, श्रृंगार का सामान, मेहंदी, मिठाई और फल आदि भेजे जाते हैं। मान्यता है कि इस दिन विवाहिता स्त्री को ससुराल से भेजी गई चीजों का ही प्रयोग करना चाहिए। सावन के महीने में हर ओर हरियाली होती है और प्रकृति अपना सौंदर्य बिखेर रही होती है। ऐसे में इस दिन झूला झूलने का भी विशेष महत्व है।    

Hariyali Teej 2019: हरियाली तीज का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

हरियाली तीज 2019 शनिवार यानी 3 अगस्त को पड़ रहा है। सावन के शुक्ल पक्ष की तृतया तिथि 3 अगस्त को 1.36 बजे से शुरू होगी और रात 22.05 बजे (11 बजकर 5 मिनट) खत्म हो जाएगी। इस दिन विवाहिता महिलाओं को तड़के उठकर स्नान आदि कर नये वस्त्र पहनने चाहिए और श्रृंगार करना चाहिए। हाथों में मेहंदी लगाए और फिर मंदिर या फिर घर में माता पार्वती और शिव की विधिवत पूजा करें।

हरियाली तीज की कथा सुनने या पढ़ने का इस दिन विशेष महत्व है। आप इसके लिए किसी पास के मंदिर में भी जा सकती हैं जहां समूह में पुरोहित हरियाली तीज की कथा सुनाते हैं। हरियाली तीज के दिन महिलाएं पूरी रात जागरण और कीर्तन भी करती हैं।

Hariyali Teej: हरियाली तीज की कथा

हरियाली तीज उत्सव को भी भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तप किया था। इस कड़ी तपस्या से माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त किया। 

कथा के अनुसार माता गौरी ने पार्वती के रूप में हिमालय के घर पुनर्जन्म लिया था। माता पार्वती बचपन से ही शिव को वर के रूप में पाना चाहती थीं। इसके लिए उन्होंने कठोर तम किया। एक दिन नारद जी पहुंचे और हिमालय से कहा कि पार्वती के तप से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु उनसे विवाह करना चाहते हैं। यह सुन हिमालय बहुत प्रसन्न हुए। दूसरी ओर नारद मुनि विष्णुजी के पास पहुंच गये और कहा कि हिमालय ने अपनी पुत्री पार्वती का विवाह आपसे कराने का निश्चय किया है। इस पर विष्णुजी ने भी सहमति दे दी।

नारद इसके बाद माता पार्वती के पास पहुंच गये और बताया कि पिता हिमालये ने उनका विवाह विष्णु से तय कर दिया है। यह सुन पार्वती बहुत निराश हुईं और पिता से नजरें बचाकर सखियों के साथ एक एकांत स्थान पर चली गईं।

घने और सूनसान जंगल में पहुंचकर माता पार्वती ने एक बार फिर तप शुरू किया। उन्होंने रेत से शिवलिंग का निर्माण किया और उपवास करते हुए पूजन शुरू किया। भगवान शिव इस तप से प्रसन्न हुए और मनोकामना पूरी करने का वचन दिया। इस बीच माता पार्वती के पिता पर्वतराज हिमालय भी वहां पहुंच गये। वह सत्य बात जानकर माता पार्वती की शादी भगवान शिव से कराने के लिए राजी हो गये।

शिव इस कथा में बताते हैं कि बाद में विधि-विधान के साथ पार्वती के साथ विवाह हुआ। शिव कहते हैं, 'हे पार्वती! तुमने जो कठोर व्रत किया था उसी के फलस्वरूप हमारा विवाह हो सका। इस व्रत को निष्ठा से करने वाली स्त्री को मैं मनवांछित फल देता हूं।'

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