लाइव न्यूज़ :

महाभारत की लड़ाई के दौरान कैसे हुई 18 दिनों तक कौरव-पांडव के लाखों सैनिकों के खाने की व्यवस्था?

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: February 23, 2021 16:26 IST

महाभारत की लड़ाई में करीब 45 लाख से अधिक योद्धाओं ने हिस्सा लिया था। ऐसे में इन सभी के लिए खाने की व्यवस्था एक बड़ी जिम्मेदारी थी। एक राजा ने इसकी जिम्मेदारी संभाली थी और 18 दिन तक कौरव और पांडवों की सेना को खाना खिलाया था।

Open in App
ठळक मुद्देमहाभारत में कौरवों के पास 11 अक्षैहिणी तो पांडवों के पास 7 अक्षैहिणी सेना थी18 दिनों तक चला था महाभारत का युद्ध, कुल 45 लाख से अधिक सैनिकों की भोजन की व्यवस्था थी बड़ी चुनौती

महाभारत की कहानी कई रोचक प्रसंगों से भरी हुई है। पांडवों और कौरवों के बीच चले 18 दिनों के युद्ध की इस कहानी में कई दिलचस्प मोड़ हैं। कुछ बातें तो ऐसी हैं, जिसके बारे में कई लोग नहीं जानते हैं। इसी में एक रोचक प्रसंग महाभारत के योद्धाओं के भोजन की व्यवस्था से भी जुड़ा है।

महभारत को सबसे बड़ा युद्ध माना जाता है, जिसमें लाखों सैनिकों ने हिस्सा लिया था। कौरवों के पास 11 अक्षैहिणी तो पांडवों के पास 7 अक्षैहिणी सेना थी। इन्हें मिलाकर कुल करीब 45 लाख सैनिकों ने महाभारत के युद्ध में हिस्सा लिया था। ऐसे में क्या आपने सोचा है कि युद्ध में हिस्सा ले रहे इन सैनिकों के लिए भोजन की व्यवस्था कैसे हुई थी।

उडुपी नरेश ने की थी लाखों सैनिकों के भोजन की व्यवस्था

कौरव और पांडव में जब युद्ध की ठहर गई तो हर पक्ष दूसरे राजा को अपनी ओर मिलाने में लगा था। किंवदंती के अनुसार कौरव-पांडव के प्रतिनिधि उडुपी नरेश को भी अपनी ओर से युद्ध लड़ने के लिए मनाने में लगे थे। 

दोनों पक्षों की बातें सुनकर उडुपी नरेश तय नहीं कर पाए कि वह किसकी ओर से युद्ध लड़ें। ऐसे में उडुपी नरेश श्रीकृष्ण से मिलने पहुंचे। उन्होंने श्रीकृष्ण से कहा कि भाईयों के बीच होने जा रहे इस भयंकर युद्ध के वह समर्थक नहीं हैं। हालांकि ये भी सच है कि वे इसे टाल नहीं सकते। 

ऐसे में वे इस युद्ध में भूमिका तो निभाना चाहते हैं लेकिन शस्त्रों के माध्यम से हिस्सा नहीं लेना चाहते। उडुपी ने इस ओर भी श्रीकृष्ण का ध्यान दिलाया कि सभी राजा-महाराजा लड़ने के लिए तो आ रहे हैं कि लेकिन किसी ने नहीं सोचा कि इस महायुद्ध के दौरान सैनिकों के लिए भोजन की व्यवस्था कैसे होगी।

श्रीकृष्ण समझ गए उडुपी नरेश की बात

श्रीकृष्ण समझ गए कि उडुपी नरेश क्या कहना चाहते थे। फिर भी उन्होंने कहा- आपने बिल्कुल सही सोचा है और मुझे ऐसा लगता है कि आपके पास इस समस्या का कोई निदान है। 

उडुपी ने इसके बाद अपनी इच्छा रखते हुए कहा कि वे इस युद्ध में दोनों पक्षों के योद्धाओं के लिए भोजन का प्रबंध करना चाहते हैं। इस पर श्रीकृष्ण भी मान गए और उडुपी नरेश ने इस प्रकार अपनी सेना के साथ बिना शस्त्रों के ही महाभारत के इस महायुद्ध में भाग लिया। 

उडुपी नरेश ने दोनों ओर के सैनिकों के लिए 18 दिन तक रोजाना भोजन उपलब्ध कराया। युधिष्ठिर ने भी युद्ध के बाद अपने राजतिलक समारोह के दौरान उडुपी नरेश की प्रशंसा की।

टॅग्स :महाभारतभगवान कृष्ण
Open in App

संबंधित खबरें

क्रिकेटबांके बिहारी दरबार पहुंचे कुलदीप यादव और वंशिका, मांगा आशीर्वाद, वीडियो

पूजा पाठBasant Panchami 2026: ब्रज में बसंत पंचमी से अगले 40 दिनों तक खेली जाएगी होली, जानें इस उत्सव के बारे में

पूजा पाठBhagwat Geeta: गीता की विचारधारा सदियों से मानवीय चिंतन को प्रभावित करती रही है?

पूजा पाठठाकुर जी की कृपा के बिना श्रीमद भागवत का श्रावण संभव नहीं: चारु लाडली

पूजा पाठमथुरा के बांके बिहारी मंदिर में बड़ा बदलाव, जगमोहन में प्रवेश और दर्शन पर रोक

पूजा पाठ अधिक खबरें

पूजा पाठPanchang 20 May 2026: आज कब से कब तक है राहुकाल और अभिजीत मुहूर्त का समय, देखें पंचांग

पूजा पाठRashifal 20 May 2026: आज मिथुन राशिवालों को होगी परेशानी, जानें सभी राशियों का भविष्य

पूजा पाठGuru Gochar: 2 जून से 5 माह तक इन 3 राशि वालों का गोल्डन पीरियड, भाग्य में वृद्धि, धन वर्षा के संकेत

पूजा पाठPanchang 19 May 2026: आज कब से कब तक है राहुकाल और अभिजीत मुहूर्त का समय, देखें पंचांग

पूजा पाठRashifal 19 May 2026: रोजमर्रा के कामों में आ सकती हैं रुकावटें, जानें अपना भाग्यफल