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Shivratri: भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह आज के दिन हुआ था तय, जानिए माघ मासिक शिवरात्रि का महत्व

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: January 23, 2020 07:40 IST

ऐसी मान्यता है कि माघ मासिक शिवरात्रि के दिन ही भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह तय हुआ था। इसके एक महीने बाद इनका विवाह संपन्न हुआ।

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ठळक मुद्देमाघ मासिक शिवरात्रि के दिन हुआ था भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह तयमाघ मासिक शिवरात्रि को नर्क निवारण चतुर्दशी भी कहा जाता है

Shivratri: हिंदू धर्म में माघ मास का बहुत महत्व है। इस महीने में मकर संक्रांति से लेकर मौनी अमावस्या और षट्तिला एकादशी जैसे कई महत्वपूर्ण व्रत पड़ते हैं। ये वह महीना भी होता है जब देवता अपनी निद्रा से जगते हैं। इन सबके बीच माघ में मासिक शिवरात्रि का भी विशेष महत्व है।

इस बार माघ मासिक शिवरात्रि 23 जनवरी (गुरुवार) को है। इसे नर्क निवारण चतुर्दशी भी कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को करने वाले नर्क नहीं जाते हैं। यह शिवरात्रि इस लिहाज से भी महत्वपूर्ण है क्योंकि महाशिवरात्रि से पहले की ये आखिरी मासिक शिवरात्रि होती है।

माघ मासिक शिवरात्रि के दिन हुई थी भगवान शिव की शादी तय

ऐसी मान्यता है कि माघ मासिक शिवरात्रि के दिन ही भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह तय हुआ था। इस तिथि के एक महीने बाद यानी फाल्गुन की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को उनका विवाह संपन्न हुआ।

विवाह के इसी शुभ मौके के महाशिवरात्रि के तौर पर धूमधाम से मनाया जाता है। इस लिहाज से भी माघ मासिक शिवरात्रि का महत्व काफी बढ़ जाता है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती के साथ-साथ गणेश जी, कार्तिकेय और शिवगणों की भी पूजा करनी चाहिए।

Shivratri: माघ मासिक शिवरात्रि का व्रत करने वाले नहीं जाते नर्क

मासिक शिवरात्रि में निराहार रहकर व्रत का पालन किया जाता है। इस बार रात में शिवजी की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त आज रात में 12.25 बजे से 1.16 बजे (24 जनवरी) तक का है। वैसे चतुर्दशी की शुरुआत हो चुकी है। यह बुधवार देर रात 1.48 बजे से शुरू हुई और इसका समापन आज रात 2.17 (24 जनवरी) बजे हो जाएगा। 

ऐसी मान्यता है कि मासिक शिवरात्रि का व्रत जो भी व्यक्ति पूरी श्रद्धा से करता है, उसके सभी पाप नष्ट होते  हैं। इस व्रत की महिमा से व्यक्ति दीर्घायु, ऐश्वर्य, आरोग्य, संतान और विद्या प्राप्त कर आखिर में शिवलोक जाता है।

यह व्रत साधकों के लिए नर्क के द्वार भी बंद करता है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार मृत्यु के बाद सभी अपने-अपने कर्मों के अनुसार स्वर्ग और नर्क जाते हैं। नर्क जाने से मुक्ति प्राप्त करने के लिए माघ मासिक शिवरात्रि का व्रत करना सबसे फलदायक माना जाता है। इसलिए इस दिन पूरे विधि-विधान से शिवजी की पूजा करनी चाहिए।

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