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उत्‍तर रामायण: जब लव-कुश ने चाचा लक्ष्मण और श्री हनुमान को बना लिया था बंदी, भगवान राम ने अपने ही बेटों से किया था युद्ध-पढ़ें रोचक कथा

By मेघना वर्मा | Updated: April 19, 2020 08:55 IST

रामायण में रावण वध के बाद अब जल्द ही उत्तर रामायण की प्रसारण किया जाना है। जिसमें श्री राम के पुत्रों लव-कुश की कहानी दिखाई जाएगी।

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ठळक मुद्देहनुमान और लक्ष्मण की कोई खबर न मिलने पर भगवान राम स्वयं युद्ध के लिए यहां पहुंचे थे। राम जी ने जैसे ही माता सीता को छूने की कोशिश की वो पाताल लोक में समां गईं।

रविवार से दूरदर्शन पर उत्तर रामायण शुरू होने जा रही है। लॉकडाउन की बढ़ी हुई अवधि में लोगों का मनोरंजन करने के लिए भारत सरकार ने रामानंद सागर की रामायण को एक बार फिर से शुरू किया था। जिसने सारी टीआरपी को तोड़ते हुए बच्चे, बूढ़े, बुजुर्ग सभी का दिल जीत लिया। रामायण में रावण वध के बाद अब जल्द ही उत्तर रामायण की प्रसारण किया जाना है। जिसमें श्री राम के पुत्रों लव-कुश की कहानी दिखाई जाएगी।

लव-कुश जितने तेजस्वी थे उतने ही महान भी। बचपन से ही उनमें वीरता भरी थी। जिसका जिक्र आपको उत्तम रामायण में पढ़ने को मिलेगा। सीता जब मर्हर्षि वाल्मीकि के आश्रम में आकर रुकी तभी से लव-कुश उसी आश्रम में बड़े हुए। लव-कुश का जन्म कहां हुआ, सीता माता धरती में कहां वीलिन हुई जैसी बहुत सी बातों पर किदवंती मिलती है। आइए आपको बताते हैं ऐसी ही एक कथा जिसमें लव-कुश ने श्री हनुमान और चाचा लक्ष्मण दोनों को अपना बंदी बना लिया था-

बिठूर में हुआ था लव-कुश का जन्म

बताया जाता है कि लव-कुश का जन्म कानपुर शहर से 17 किलोमीटर दूर बिठूर नाम स्थान पर हुआ था। जो उस समय महर्षि वाल्मीकि का आश्रम हुआ करता था। बताया ये भी जाता है कि इसी आश्रम में सीता माता धरती की गोद मं समां भी गई थीं। आज भी इस जगह पर हर साल सैलानी घूमने आते हैं। श्रद्धा का सैलाब यहां देखा जा सकता है। 

आठ लाख साल पहले आई थीं माता सीता

मान्यता है कि आठ लाख साल पहले इस मंदिर में माता सीता आई थीं। यहीं पर लव-कुश का जन्म हुआ था। सिर्फ यही नहीं लव-कुश ने यही पर मर्हषि वाल्मीकि से शिक्षा भी प्राप्त की थी। यहां पर आज भई पुराने अतीत की कुछ झलकियां मिलती हैं। 

लव-कुश ने श्री हनुमान को बनाया बंदी

वाल्मीकि रामायण में इस बात का जिक्र मिलता है कि भगवान राम अश्वमेघ यज्ञ कराया करते थे। कोई भी राजा उनके अश्वमेघ घोड़े को पकड़ने की हिम्मत नहीं कर पाया। मगर जब घोड़ा बिठूर पहुंचा तो लव-कुश ने उसे बांध लिया।  इसके बाद श्री हनुमान जब घोड़े को छुड़ाने आए तो लव-कुश से युद्ध में पराजित हुए और लव-कुश ने श्री हनुमान को बंदी बना लिया। सिर्फ यही नहीं लक्ष्मण जी भी इस प्रयास में असफल हुए और लव-कुश ने उन्हें भी बंदी बना लिया।

जब राम से मिले लव-कुश

हनुमान और लक्ष्मण की कोई खबर न मिलने पर भगवान राम स्वयं युद्ध के लिए यहां पहुंचे थे। युद्ध के बीच में ही उन्हें पता चला था कि जिन लव-कुश से वे युद्ध कर रहे हैं, वे उनके ही पुत्र हैं। इसके बाद माता सीता से राम की मुलाकात भी यहीं पर हुई थी।

और सीता मां समां गई धरती में

बताया जाता है कि जब भगवान राम, सीता से मिले तो सभी का दिल भर आया। मगर राम जी ने जैसे ही माता सीता को छूने की कोशिश की वो पाताल लोक में समां गईं। उस समय पूरा संसार विलाप करने लगा। आज भी बिठूर में वो जगह है जहां माता सीता ने खुद को धरती में समां लिया था। 

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