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मथुरा-वृंदावन के इन 5 मंदिरों में दिखेगी जन्माष्टमी की असल रौनक

By मेघना वर्मा | Updated: August 28, 2018 09:21 IST

krishna Janmashtami 2018 Celebration in Mathura & Vrindavan: जन्माष्टमी के मौके पर अगर आप मथुरा जा रहे हैं तो राधा रमण मंदिर के दर्शन करने जरूर जाएं।

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हिन्दू धर्म के सबसे बड़े त्योहारों में से एक जन्माष्टमी की तैयारियां अभी से ही शरू हो गई हैं। इस साल यह त्योहार 2 सितंबर को है लेकिन अभी से बाजारों में कृष्ण के जन्मोत्सव की रौनक देखी जा सकती है। हिन्दू कैलेंडर के अनुसार भाद्र माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान विष्णु के 8वें अवतार श्रीकृष्ण ने जन्म लिया था। तभी से हर साल इस दिन को श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। जन्माष्टमी को लगभग पूरे भारत में मनाया जाता है, मगर इसकी असल रौनक आपको कृष्ण की जन्मभूमि मथुरा-वृंदावन में देखने को मिलेगी। तो इस बार अगर आप जन्माष्टमी जोरों-शोरों से मनाना चाहते हैं तो इस वीकेंड मथुरा-वृन्दावन का प्लान बना लें। यहां हम आपको मथुरा के कुछ प्रसिद्ध मंदिरों के बारे में बताने जा रहे हैं जहां जाकर आप जन्माष्टमी की असल रौनक देख सकते हैं। 

1. श्रीकृष्णजन्मभूमि मंदिर

श्रीकृष्ण का जन्म कारागार में हुआ था। मथुरा में इसी जगह पर भगवान कृष्ण के सबसे प्राचीन मंदिर का निर्माण करवाया गया है जिसे श्रीकृष्णजन्मभूमि मंदिर के नाम से जाना जाता है। यह मंदिर मथुरा के बिल्कुल बीचोबीच स्थित है। बताया जाता है कि यहां पहला मंदिर 80-57 ईसा पूर्व बनाया गया था। इस विषय पर महाक्षत्रप सौदास के समय में मिले एक शिलालेख से ज्ञात होता है कि किसी वसु नामक व्यक्ति ने यह मंदिर बनाया था।

जबकि दूसरा मंदिर सन् 800 में विक्रमादित्य के काल में बनाया गया था। वर्तमान समय में महामना पंडित मदनमोहन मालवीय की प्रेरणा से यह एक भव्य और आकर्षण मन्दिर के रूप में स्थापित है। इस मंदिर का असल रंग जन्माष्टमि पर देखने को मिलता है। जगह-जगह भोग, प्रसाद और सांस्कृतिक कार्यक्रम आपका मन मोह लेंगे। 

2. द्वारकाधीश मंदिर

मथुरा का द्वारकाधीश मंदिर भी श्रीकृष्ण से जुड़ा हुआ है। यह भव्य नक्काशी दार मंदिर अपने आरती के लिए जाना जाता है। इस मंदिर के मुख्य आश्रम में रानी राधिका की प्रतिमाएं भी हैं। इस मंदिर को इसके अनोखे अंदाज में होली खेले जाने के लिए भी जाना जाता है।

असकुंडा घाट के समीप बनें इस मंदिर का प्रसाद इसकी अपनी पाकशाला में तैयार किया जाता है। बेहतरीन नक्काशी के साथ यह मंदिर का स्थापत्य कला की दृष्टि से भी महत्व पूर्ण है। 

3. बांके बिहारी मंदिर

वृंदावन में एक मंदिर और है जो भगवान के सुन्दर रूप को दर्शाने के साथ देश-विदेश सभी जगह बेहद फेमस है। ये मंदिर है बांके-बिहारी का मंदिर। माना जाता है कि इस मंदिर में आए बिना आपकी वृंदावन की यात्रा पूरी नहीं होती। यहां भगवान कृष्ण के होने वाले अलग-अलग श्रृगांर आपको इस मंदिर की ओर और भी ज्यादा आकर्षित करते हैं। इस मंदिर में जन्माष्टमि के एक सप्ताह पहले से ही भक्तों की भीड़ देखी जा सकती है। 

4. राधा रमण मंदिर

जन्माष्टमी के मौके पर अगर आप मथुरा जा रहे हैं तो राधा रमण मंदिर के दर्शन करने जरूर जाएं। भव्य और प्राचीन इस मंदिर की सुंदरता देखते ही बनती है। इस मंदिर का निर्माण 1542 में किया गया था। इस मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण और राधारानी शालिग्रान के रूप में स्थापित हैं। इस मंदिर में जन्माष्टमी के दिन काफी भीड़ होती है। आरती से लेकर जन्मोत्सव तक सारे कार्यक्रम यहां बहुत भव्य तरीके से किए जाते हैं। 

5. गोवर्धन पर्वत

गोवर्धन पर्वत की कहानी कई लोगों को पता होगी। इसके आसपास के क्षेत्र को ब्रज भूमि भी कहा जाता है। द्वापर युग में भगवान कृष्ण ने ब्रजवासियों को इंद्र के प्रकोप से बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी तर्जनी अंगुली पर उठा लिया था। इसे गिरिराज भी कहते हैं। आज दूर-दूर से भक्त इसके दर्शन करने आते हैं। बहुत से श्रद्धालू ऐसे भी हैं जो इस 21 किलोमीटर लम्बे पर्वत की परिक्रमा भी करते हैं। इसके रास्ते में राधा कुंड, कुसुम सरोवर, मानसी गंगा, गोविंद कुंड, पूंछरी का लोटा, दानघाटी आदि भी पड़ते हैं। 

तो बस इस जन्माष्टमी पर परिवार के साथ निकल जाइए मथुरा-वृंदावन की दो दिन की सैर पर और देख आइए जन्माष्टमी का रंग। 

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