हिन्दू धर्म में श्रावण का महीना अपने साथ कई सारे छोटे-बड़े त्योहार लेकर आता है। लेकिन इस महीने के खत्म होने के ठीक बाद भी एक त्योहार आता है जो सुहागन महिलाओं के लिए बेहद खास होता है। यह है 'कजरी तीज' का त्योहार, जिसे कजली तीज के नाम से भी जाना जाता है। इस साल कजरी तीज 29 अगस्त को है। सूर्य उदय से ही व्रत का शुभ मुर्हूत आरम्भ हो जाएगा और शाम ढलने से पहले पूजा की जाएगी। आपको बता दें कि यह त्योहार सुहागन के साथ कुंवारी कन्याओं के लिए भी खास होता है। आइए आपको यहां कजरी तीज का महत्व, व्रत-पूजा विधि और कुंवारी कन्याएं क्यों करें इस दिन का व्रत, सभी एक-एक करके बताते हैं।
क्या है कजरी तीज
हिन्दू कैलेंडर के अनुसार हर साल भादों मास में कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को कजरी तीज मनाई जाती है। हिन्दू धर्म में साल में तीन बार तीज मनाई जाती है- हरतालिका तीज, हरियाली तीज और कजरी तीज। ये सभी सुहागन महिलाओं से जुड़ी हैं। इस दिन महिलाएं व्रत करती हैं और अपने पति की लंबी आयु की कामना करती हैं। सुहागन के अलावा कुंवारी कन्याएं भी योग्य पति पाने के लिए इस दिन व्रत-पूजां करती है।
कब है कजरी तीज
इस साल 29 अगस्त को कजरी तीज मनाई जाएगी। इस दिन सुहागनें सुबह जल्दी उठकर स्नान करके व्रत का संकल्प करती हैं। पूरा दिन अपने पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन पाने के लिए उपवास पर रहती हैं और अगले दिन व्रत का पारण करती हैं।
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कुंवारी कन्याओं के लिए कजरी तीज
यदि किसी कन्या की कुंडली में विवाह बाधा हो या वह शीघ्र विवाह चाहती हो, तो उसे कजरी तीज का व्रत करना चाहिए। इसके अलावा अच्छा वर प्राप्त करने के लिए भी कन्याएं कजरी तीज का आवृत कर सकती हैं। मान्यता है कि इस तीज का व्रत करने से विवाह संबंधी हर बाधा समाप्त हो जाती है।
कजरी तीज व्रत विधि
कजरी तीज पर कुछ सुहागनें दिनभर निर्जला उपवास करती हैं, लेकिन कुछ फलाहार का सेवन करके भी व्रत का पालन करती हैं। यह अपने मन की इच्छा अनुसार किया जा सकता है। रात्रि में पूजा के बाद ही व्रत खोला जाता है।
कजरी तीज पूजा विधि
- तीज से ठीक एक दिन पहले व्रती अपने लिए श्रृंगार और व्रत का सारा सामान एकत्रित कर ले- श्रृंगार में नए वस्त्र, मेहंदी, चूड़ियां, सिंदूर, बिंदी सबसे महत्वपूर्ण वस्तुएं होती हैं- पूरा दिन व्रत करने के बाद शाम को शिव मंदिर जाएं और वहां भगवान शिव-पार्वती की पूजा करें- मंदिर में कजरी तीज की कथा को पढ़ें और मां पार्वती को श्रृंगार का सभी सामान भेंट स्वरूप अर्पित करें- शिव-पार्वती के समक्ष घी का दीपक जलाएं और अपने पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करें- यदि कुंवारी कन्या व्रत कर रही है तो उसे श्रृंगार सामग्री अर्पित करना अनिवार्य नहीं है। वह केवल अंत में अच्छा वर प्राप्त करने या शीघ्र विवाह की कामना करे