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कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालु जरूर जान लें ये नए नियम

By उस्मान | Updated: April 13, 2019 13:23 IST

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भगवान शिव को समर्पित सबसे प्रसिद्ध शिव धामों में से एक कैलाश मानसरोवर यात्रा (Kailash Mansarovar Yatra) 8 जून से शुरू होकर 8 सितंबर तक चलेगी। यात्रा के लिए श्रद्धालुओं का पंजीकरण 09 मई तक होगा। सूचना के अनुसार इस यात्रा के लिए 18 से 70 वर्ष की आयु के बीच के लोग ही पंजीकरण करा सकते हैं। यह यात्रा मंत्रालय द्वारा दो मार्गों से होकर गुजरेगी। 

इस बीच नेपाल में भारतीय दूतावास ने इस हिमालयी देश से होकर कैलाश मानसरोवर की यात्रा करने की योजना बना रहे भारतीय नागरिकों को यात्रा शुरू करने से पहले इसके लिए उचित चीनी वीजा और यात्रा परमिट प्राप्त करने को कहा है। दूतावास ने तीर्थयात्रियों को यह सुनिश्चित करने के लिए भी सलाह दी कि ऊंचाई वाली जगहों पर जाने पर होने वाली बेचैनी, आपातकालीन चिकित्सा राहत सहित अन्य सभी उपायों के लिए उनके पास पर्याप्त बीमा कवरेज हो। परामर्श में कहा गया कि इस यात्रा के लिए नयी दिल्ली स्थित चीनी दूतावास से वीजा लिया जाना चाहिए न कि काठमांडू स्थित चीनी दूतावास से।

कैलाश मानसरोवर यात्रा किराया

मंत्रालय द्वारा यात्रा के लिए गठित किया गया पहला मार्ग लिपुलेख दर्रे से होकर गुजरेगा। इस मार्ग से यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं के लिए यात्रा का कुल किराया 1.8 लाख रूपये प्रति व्यक्ति बताया गया है। इस रूट पर 60-60 लोगों के कुल 18 जत्थे जाएंगे। प्रत्येक जत्थे को 24 दिनों में अपनी यात्रा पूर्ण करनी है। यात्रा के दौरान हर व्यक्ति की सभी सुख सुविधाओं के साथ दिल्ली में तीन दिन रुकने की सुविधा भी दी जा रही है।

कैलाश मानसरोवर यात्रा के बारे में खास बातें

1. कैलाश मानसरोवर संस्कृत के दो शब्दों को मिलाकर बना है - मानस और सरोवर, अर्थात् मन का सरोवर।  इस सरोवर के ठीक पास में 'रकसताल' नाम का सरोवर है।  इन्हीं दो सरोवरों की उत्तरी दिशा में स्थित है विशाल कैलाश पर्वत। 

2. यह विशाल पर्वत समुद्र की सतह से तकरीबन 22 हजार फुट ऊंचा है।  इसी पर्वत की सतह पर कैलाश मानसरोवर झील है जो इसकी धार्मिक महत्ता को दर्शाता है।

3. कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील, दोनों के साथ ही चार धर्म जुड़े हैं - तिब्बती बौद्ध, बौद्ध धर्म, जैन धर्म, हिन्दू धर्म।  तिब्बती मानते हैं कि कैलाश पर्वत पर एक तिब्बती संत ने वर्षं तपस्या की थी। पर्वत पर बनने वाला स्वास्तिक का निशान डेमचौक और दोरजे फांगमो का निवास स्थान है।  

4. वहीं बौद्ध धर्म के अनुयायियों का मानना है कि कैलाश पर्वत पर भगवान बुद्ध तथा मणिपद्मा का निवास है।  जैनियों के मतानुसार यह पर्वत आदिनाथ ऋषभदेव का निर्वाण स्थल है। हिन्दू धर्म के अनुसार कैलाश ब्रह्माण्ड की धुरी है और यह भगवान शिव का निवास स्थान है।

5. इन चार धर्मों के अलावा सिख धर्म के लोग भी यह मानते हैं कि उनके संस्थापक गुरु नानक ने यहाँ कुछ दिन रूककर तपस्या की थी।  इसलिए उनके लिए भी कैलाश और मानसरोवर, दोनों पवित्र स्थल हैं।

टॅग्स :भगवान शिवहिमालय
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