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Jaya Ekadashi 2020: जया एकादशी व्रत की पूजा विधि, कथा, शुभ मुहूर्त और पारण का समय, जानिए सबकुछ

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: February 5, 2020 08:18 IST

Jaya Ekadashi 2020: जया एकादशी को बेहद फलदायी बताया गया है। ऐसा कहा गया है कि इस व्रत को करने वाले को अग्निष्टोम यज्ञ के बराबर फल मिलता है।

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ठळक मुद्देमाघ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को किया जाता है जया एकादशी व्रतभगवान विष्णु की करते हैं इस दिन विशेष पूजा, दान का भी होता है बहुत महत्व

Jaya Ekadashi 2020: हर साल माघ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को किया जाने वाले जया एकादशी व्रत की काफी मान्यता है। पुराणों में भी इस दिन को बेहद फलदायी बताया गया है। ऐसी मान्या है कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और एकादशी का व्रत करने वालों को न केवल पापों से मुक्ति मिलती है बल्कि भूत-पिशाच जैसी नीच योनि भी प्राप्त नहीं होती। ऐसा कहा गया है कि इस व्रत को करने वाले को अग्निष्टोम यज्ञ के बराबर फल मिलता है। पाप का अंत होता है और घर-परिवार में समृद्धि आती है। 

Jaya Ekadashi: जया एकादशी की पूजा विधि

हर एकादशी की तरह इस दिन भी साधक को अन्न का त्याग करना चाहिए। साथ ही भगवान विष्णु की विशेष पूजा करनी चाहिए। जया एकादशी पर दान का भी विशेष महत्व है। नारदपुराण के अनुसार जया एकादशी का व्रत करने वाले को ब्रह्म मुहूर्त में जगना चाहिए। इस दिन भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर पूजा घर में स्थापित करें और तुलसी, फूल, गंगा जल आदि से उनका पूजन करें। भगवान विष्णु के सामने घी के दीये जलाएं और विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें। इसके बाद उनकी आरती उतारें। शाम के समय भी भगवान विष्णु की पूजा करें और फिर आरती उतारें। 

Jaya Ekadashi: जया एकादशी पूजा का मुहूर्त

एकादशी पर सुबह की पूजा महत्वपूर्ण होती है। इसलिए इस दिन प्रात: काल ही भगवान विष्णु की पूजा करें। इस बार के जया एकादशी व्रत की बात करें तो एकादशी तिथि की शुरुआत 4 फरवरी की रात 9.49 बजे से हो चुकी है। इसका समापन 5 तारीख (बुधवार) को रात 9.30 बजे होगा। व्रत के अगले दिन स्नान और पूजा आदि के बाद पारण करें।

Jaya Ekadashi: जया एकादशी और पारण का मुहूर्त

एकादशी के अगले दिन भी सूर्योदन से पहले जगे। स्नान और पूजा आदि के बाद जरूरतमंदों को दान करें। साथ ही ब्राह्मणों को भी दान करें और भोजन कराएं। दान में तिल का महत्व विशेष है। साथ ही अन्न और गर्म कपड़े का भी दान करें। इसके बाद ही स्वयं अन्न ग्रहण करें। द्वादश तिथि में पारण का मुहूर्त सुबह 7.11 बजे से 9.28 के बीच है।

टॅग्स :एकादशीभगवान विष्णु
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