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होली से पहले जरूर जपें भद्रा के ये 12 नाम, किसी भी काम में नहीं आएगी अड़चन

By उस्मान | Updated: March 14, 2019 13:09 IST

ऐसा माना जाता है कि सुबह के समय भद्रा के 12 नामों का स्मरण करने वाले व्यक्ति को कभी भी मानसिक कष्ट और शारीरिक कष्ट का भय नहीं रहता है।

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इस बार होली पर भद्रा काल लग रहा है। हिन्दु धर्म शास्त्रों के अनुसार ऐसे कई योग और नक्षत्र हैं, जिन्हें अशुभ माना गया। भद्रा काल भी उन्हीं में एक है। इस योग में किसी भी शुभ कार्य का आरम्भ या अंत अशुभ होता है। यही वजह है कि भद्रा काल में कोई भी जातक शुभ कार्य बिलकुल भी नहीं करता है। यह भी ध्यान रखा जाता है कि किसी भी कार्य का समापन भी इस योग में ना हो।

ऐसा माना जाता है कि सुबह के समय भद्रा के 12 नामों का स्मरण करने वाले व्यक्ति को कभी भी मानसिक कष्ट और शारीरिक कष्ट का भय नहीं रहता है। इतना ही नहीं, उसके किसी भी काम में अड़चन नहीं आती है। मनुष्य जीवन के हर क्षेत्र में सफल हो जाता है और सभी कार्य सिद्ध हो जाते हैं। इसलिए आपको रोजाना भद्रा के इन 12 नामों का जाप शुरू कर देना चाहिए।

आपको रोजाना भद्रा के इन 12 नामों का स्मरण करना चाहिए 1) धान्या, 2) दधि मुखी, 3) भद्रा, 4) महामारी, 5) खरानना, 6) कालरात्रि, 7) महारूद्रा, 8) विष्टिकरण, 9) कुलपुत्रिका, 10) भैरवी, 11) महाकाली, 12) असुर क्षयकारी

भद्रा कौन है? पुराणों के अनुसार भद्रा भगवान सूर्यदेव की पुत्री और राजा शनि की बहन है। शनि की तरह ही इसका स्वभाव भी कड़क बताया गया है। उनके स्वभाव को नियंत्रित करने के लिए ही भगवान ब्रह्मा ने उन्हें कालगणना या पंचांग के एक प्रमुख अंग विष्टि करण में स्थान दिया। भद्रा की स्थिति में कुछ शुभ कार्यों, यात्रा और उत्पादन आदि कार्यों को निषेध माना गया है। 

क्यों अशुभ है भद्रा? किसी भी मांगलिक कार्य में भद्रा योग का विशेष ध्यान रखा जाता है, क्योंकि भद्रा काल में मंगल-उत्सव की शुरुआत या समाप्ति अशुभ मानी जाती है अत: भद्रा काल की अशुभता को मानकर कोई भी आस्थावान व्यक्ति शुभ कार्य नहीं करता। ज्योतिष विज्ञान के अनुसार अलग-अलग राशियों के अनुसार भद्रा तीनों लोकों में घूमती है। जब यह मृत्युलोक में होती है, तब सभी शुभ कार्यों में बाधक या या उनका नाश करने वाली मानी गई है।

टॅग्स :होलीहिंदू त्योहारशनि देव
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