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गंगा दशहरा 2020: गंगा दशहरा पर 520 साल बाद बन रहा है ये संयोग, पापों का हरण करती हैं मां गंगा

By मेघना वर्मा | Updated: May 28, 2020 15:51 IST

हर साल गंगा दशहरा को लोग पूरी श्रद्धा और आस्था के साथ मनाते हैं। माना जाता है कि इसी दिन मां गंगा का आगमन धरती पर हुआ था।

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ठळक मुद्दे गंगा नदी सभी पापों को धुल देती हैं। ज्योतिष शास्त्र की मानें तो इस बार गंगा दशहरा पर आनन्द के स्थान पर सिद्ध योग व रवि योग बन रहा है।

गंगा नदी का प्रमुख गंगा दशहरा इस साल एक जून को पड़ रहा है। गंगा नदी को देवों की नदी कहा जाता है। हिन्दू धर्म  में गंगा नदी का काफी महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इसमें एक बार स्नान करने से सभी तरह के पापों का नाश होता है। 

हर साल गंगा दशहरा को लोग पूरी श्रद्धा और आस्था के साथ मनाते हैं। माना जाता है कि इसी दिन मां गंगा का आगमन धरती पर हुआ था। गंगा दशहरा वाले दिन लोग मां गंगा की पूजा करते हैं। काशी, हरिद्वार और प्रयाग के घाटों पर गंगा में डुबकी लगाने जाते हैं

गंगा दशहरा तिथि व मुहूर्त 2020

दशमी तिथि प्रारंभ - 31 मई 2020 को 05:36 बजे शामदशमी तिथि समाप्त - 01 जून को 02:57 बजे शामहस्त नक्षत्र प्रारंभ- 01 जून को 3 बजकर एक मिनट पर सुबहहस्त नक्षत्र समाप्त- 02 जून को 01 बजकर 18 मिनट, सुबह

520 साल बाद बन रहा है महा-संयोग

ज्योतिष शास्त्र की मानें तो इस बार गंगा दशहरा पर आनन्द के स्थान पर सिद्ध योग व रवि योग बन रहा है। दस में से बाकी आठ योग वहीं हैं जो गंगावतरण पर बने थे। चन्द्र कन्या राशि हस्त नक्षत्र में, वृष राशि में सूर्य, व्यतिपात योग व गर करण। इस गंगा दशमी पर सूर्योदय समय पर शुक्र स्वराशि लग्न में, राहु बुध और उच्च व स्वराशि के धन भाव में है। वहीं भाग्य भाव में वक्रीय शनि गुरु की युति, विंशोत्तरी दशा चन्द्र मंगल आदि ऐसे विलक्षण योग 520 वर्ष बाद पड़ रहा है। 

दस पापों का करता है नाश

मान्यता है कि गंगा नदी सभी पापों को धुल देती हैं। मानयता है कि गंगा नदी दस पापों को नाश करती हैं। इन दस वैदिक गणनाओं में ज्येष्ठ माह, शुक्ल पक्ष, दसवां दिन, गुरुवार, हस्त नक्षत्र, सिद्ध योग, गर-आनंद यौग और कन्या राशि में चंद्रमा और वृष राशि में सूर्य शामिल हैं। मान्यता ऐसी है कि इस दिन मां गंगा की पूजा करने से मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है। 

टॅग्स :पूजा पाठहिंदू त्योहारगंगा दशहरा
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