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Dussehra 2025: दशहरा से जुड़ी ये 10 रोचक बातें, जानकर हैरान हो जाएंगे आप

By अंजली चौहान | Updated: September 25, 2025 12:44 IST

Dussehra 2025: दशहरा 2025, या विजयादशमी, 2 अक्टूबर, 2025 को मनाया जाएगा, जो भगवान राम की रावण पर और देवी दुर्गा की महिषासुर पर विजय के माध्यम से बुराई पर अच्छाई की जीत का उत्सव है।

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Dussehra 2025: पूरे भारत में दशहरे का त्योहार अलग-अलग रूपों में मनाया जाता है। यह साल का वह समय होता है जब पूरा देश बुराई पर अच्छाई की जीत का जश्न मनाता है। दशहरा या विजयदशमी का त्योहार, जिस दौरान शारदीय नवरात्रि भी मनाई जाती है। ये दोनों त्योहार नौ दिनों तक चलता है। यह त्योहार अधर्म पर धर्म की, असत्य पर सत्य की और बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश देता है, जिसे दो प्रमुख पौराणिक कथाओं से बल मिलता है।

नौ दिनों तक चलने वाली रामलीला (भगवान राम के जीवन पर आधारित नाट्य मंचन) का समापन रावण वध के साथ होता है।

हालांकि, बहुत से लोग दशहरा से जुड़ी इन बातों को नहीं जानते। आज आपको दशहरा से जुड़ी दस रोचक बातें बताने वाले हैं...

1- मिट्टी का गरबा या गरबी

इस त्योहार के दौरान, देवी दुर्गा के भक्त नौ रातों तक अपनी प्रार्थना करते हैं। परिवार 'गरबी' नामक एक मिट्टी का बर्तन लेते हैं, जिसे पूरी रात जलाया जाता है, और भक्त 'गरबी' के चारों ओर पूजा करते हैं और गाते-नाचते हैं।

2- यह पर्व एक साथ दो महान विजयों का प्रतीक है। जिसमें पहले तो महिषासुर पर माँ दुर्गा की विजय (शक्ति की विजय)। और दूसरारावण पर भगवान राम की विजय (धर्म की विजय)।

3- यह दिन प्राचीन काल से ही शस्त्र पूजा के लिए शुभ माना जाता है। इस दिन सेना, पुलिस और विभिन्न व्यवसाय से जुड़े लोग अपने अस्त्र-शस्त्र, औजारों और उपकरणों की पूजा करते हैं, जो शक्ति के सम्मान का प्रतीक है।

4- विजयादशमी को 'साढ़े तीन शुभ मुहूर्तों' में से एक माना जाता है। इसलिए, लोग इस दिन नया व्यवसाय शुरू करना, नई संपत्ति खरीदना या कोई भी शुभ कार्य शुरू करना अत्यंत फलदायी मानते हैं।

5- कर्नाटक के मैसूर में यह पर्व शाही अंदाज में मनाया जाता है, जिसे मैसूर दशहरा कहते हैं, जिसमें देवी चामुंडेश्वरी की भव्य शोभायात्रा निकलती है। हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में भी यह रथ यात्रा के रूप में प्रसिद्ध है।

6- उत्तर भारत में दशहरे का सबसे प्रमुख आकर्षण रावण, मेघनाद और कुम्भकरण के विशाल पुतलों का दहन है। यह बुराई को प्रतीकात्मक रूप से नष्ट करने का कार्य है। नौ दिनों तक चलने वाले भगवान राम के जीवन पर आधारित नाट्य मंचन, रामलीला का समापन विजयादशमी की रात रावण दहन के साथ होता है।

7- पूर्वी भारत (मुख्यतः बंगाल, ओडिशा) में यह पर्व विजया दशमी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन माँ दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाता है। 'सिंदूर खेला' की परंपरा भी इसी दिन होती है।

8- पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, विजयादशमी की तिथि को 'अपराजिता तिथि' भी कहा जाता है। इस दिन देवी अपराजिता (जो हर कार्य में विजय दिलाती हैं) की पूजा का विधान है।

9- विजयादशमी के उत्सव में भोजन पूरी तरह शाकाहारी होता है। हालाँकि, बंगालियों के लिए ऐसा नहीं है। मांसाहारी भोजन इस वर्ग का एक सांस्कृतिक हिस्सा है और इसलिए दशहरा पूजा के दौरान इसे नहीं छोड़ा जाता। हालाँकि, बाकी लोगों के लिए, विजयादशमी के अंतिम दिन तक पूरी तरह शाकाहारी भोजन का पालन करना मुख्य सिद्धांत है।

10- दशहरा के अंतिम दिन जगह-जगह रावण दहन के मेले का आयोजन किया जाता है। इस दिन विशेषतौर पर लोग जलेबी खाते हैं। 

टॅग्स :दशहरा (विजयादशमी)शारदीय नवरात्रिहिंदू त्योहारत्योहार
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