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शुक्रवार की रात करें यह गुप्त उपाय, मां लक्ष्मी की कृपा से बरसेगा अपार धन

By गुणातीत ओझा | Updated: September 11, 2020 17:40 IST

धन-संपत्ति के लिए हर कोई परेशान है। जिसके पास है, वो भी और जिसके पास नहीं है, वो भी। वर्तमान की बात करें तो ऐसा कोई भी इंसान नहीं होगा धन संचित करने की जुगत में न लगा हो।

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ठळक मुद्देधन को स्थाई बनाने के लिए मां लक्ष्मी की पूजा करनी पड़ती है और मंत्रों का उच्चारण करना पड़ता है।ध्यान रहे कि लक्ष्मी पूजन बहुत गोपनीय तरीके से किया जाता है। यह गुप्त पूजा होती है।

धन-संपत्ति के लिए हर कोई परेशान है। जिसके पास है, वो भी और जिसके पास नहीं है, वो भी। वर्तमान की बात करें तो ऐसा कोई भी इंसान नहीं होगा धन संचित करने की जुगत में न लगा हो। धन के अभाव में व्यक्ति मान सम्मान से भी वंचित रह जाता है। शास्त्रों की मानें तो धन की देवी मां लक्ष्मी की कृपा से मनुष्य इस समस्या से निजात पा सकता है। यह भी सत्य है कि मां लक्ष्मी चंचला होती हैं। मतबल वह एक स्थान पर टिक कर नहीं रहतीं। धन को स्थाई बनाने के लिए मां लक्ष्मी की पूजा करनी पड़ती है और मंत्रों का उच्चारण करना पड़ता है। लेकिन ध्यान रहे कि लक्ष्मी पूजन बहुत गोपनीय तरीके से किया जाता है। यह गुप्त पूजा होती है।

अष्ट लक्ष्मी में मां के 8 रूप इस प्रकार हैं…

1. श्री आदि लक्ष्मी – ये जीवन के प्रारंभ और आयु को संबोधित करती है तथा इनका मूल मंत्र है – ॐ श्रीं।।

2. श्री धान्य लक्ष्मी – ये जीवन में धन और धान्य को संबोधित करती है तथा इनका मूल मंत्र है – ॐ श्रीं क्लीं।।

3. श्री धैर्य लक्ष्मी – ये जीवन में आत्मबल और धैर्य को संबोधित करती है तथा इनका मूल मंत्र है – ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं।।

4. श्री गज लक्ष्मी – ये जीवन में स्वास्थ और बल को संबोधित करती है तथा इनका मूल मंत्र है – ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं।।

5. श्री संतान लक्ष्मी – ये जीवन में परिवार और संतान को संबोधित करती है तथा इनका मूल मंत्र है – ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं।।

6. श्री विजय लक्ष्मी यां वीर लक्ष्मी – ये जीवन में जीत और वर्चस्व को संबोधित करती है तथा इनका मूल मंत्र है – ॐ क्लीं ॐ।।

7. श्री विद्या लक्ष्मी – ये जीवन में बुद्धि और ज्ञान को संबोधित करती है तथा इनका मूल मंत्र है – ॐ ऐं ॐ।।

8. श्री ऐश्वर्य लक्ष्मी – ये जीवन में प्रणय और भोग को संबोधित करती है तथा इनका मूल मंत्र है – ॐ श्रीं श्रीं।।

कैसे करें पूजन:

– अष्ट लक्ष्मी की पूजा शुक्रवार की रात करनी चाहिए। इनकी पूजा रात 9 बजे से 10 बजे के बीच होती है।

– इनकी पूजा हमेशा गुलाबी कपड़े पहनकर और गुलाबी आसन पर बैठकर ही करें।

– गुलाबी कपड़े पर श्री यत्र और अष्ट लक्ष्मी की तस्वीर स्थापित करें।

– किसी भी थाली में गाय के घी के 8 दीप जलाएं।

– गुलाब के सुगंध की अगरबत्ती जलाएं और लाल फूल और लाल माला चढ़ाएं।

– मावे की बर्फी का भोग लगाएं।

– अष्ट गंध से श्री यंत्र और अष्ट लक्ष्मी पर तिलक लगाएं।

– कमल गट्टे की माला हाथ में लेकर ‘ऐं ह्रीं श्रीं अष्टलक्ष्मीयै ह्रीं सिद्धये मम गृहे आगच्छागच्छ नम: स्वाहा।।’

– इस मंत्र का 108 बार जाप करें।

– जाप पूरा होने के बाद आठों दीप को घर के आठ दिशाओं में स्थापित कर दें।

– कमलगट्टे की माला को तिजोरी में स्थापित करें। यदि कमलगट्टे की माला नहीं है तो कमलगट्टे को हाथ में रख कर भी आप मंत्रों का जाप कर सकते हैं और उसे फिर तिजोरी में रख दें।

– इस उपाय से जीवन के आठों वर्ग में आपको सफलता प्राप्त होगी।

शुक्रवार को करें यह भी उपाय

1. दक्षिणावर्ती शंख में जल भरकर विष्णु भगवान का अभिषेक करें। इससे आर्थिक संकट हमेशा के लिए समाप्त हो जाता है।

2. गाय के घी का दीप जलाएं। दीप में लाल रंग धागा रखें।

3. गरीबों को दान करें। सफेद रंग की वस्तु का दान ज्यादा शुभ होता है।

4. शुक्रवार को 3 कुंवारी कंयाओं को खीर खिलाएं और पीला वस्त्र व दक्षिणा देकर विदा करें।

5. शुक्रवार के दिन श्रीयंत्र का दूध से अभिषेक करें। इससे अचूक धन की प्राप्ति होती है।

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