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Dev Uthani Ekadashi 2019: सालों बाद देवउठनी एकादशी पर नहीं है विवाह का कोई अबूझ मुहूर्त, ये हैं शादी के लिए शुभ तिथि

By मेघना वर्मा | Updated: November 7, 2019 13:29 IST

देवउठनी एकादशी वाले दिन मान्यता है कि भगवान विष्णु अपनी चार महीने की नींद से जागते हैं और इसी के साथ इस दिन से सभी शुभ कार्य शुरू हो जाते हैं।

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ठळक मुद्देइस बार देवउठनी एकादशी 8 नवंबर को पड़ रही है।मान्यता है कि देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु अपनी चार महीने की नींद से जागते हैं।

हिन्दू धर्म में शादी को सबसे महत्वपूर्ण बताया गया है। जब किन्हीं दो लोगों की शादी होती है तो हर तरह से ग्रह और नक्षत्र देखकर, सही मुहूर्त देखकर शादी की जाती है। साल में तीन बार शादी के लिए अबूझ मुहूर्त होता है। जिसमें बसंत पंचमी, देवउठनी एकादशी और फुलैरा दौज शामिल हैं। मगर इस बार पड़ रही देवउठनी एकादशी में सालों बाद विवाह के लिए अबूझ मुहूर्त नहीं हैं। 

दरअसल ग्रहों की चाल और राशियों के हेर-फेर से इस बार देवउठनी एकादशी दो दिन पड़ रही हैं। मगर ज्योतिषाचार्य के मुताबिक 8 नवंबर को ही देवउठनी एकादशी का पर्व मनाया जाना शुभ माना जा रहा है। इस कारण सूर्य तुला राशि में है। तुला राशि में सूर्य के होने से विवाह के कोई मुहूर्त नहीं बन रहे हैं। वहीं इस साल विवाह के लिए पहला शुभ मुहूर्त 18 नवंबर को पड़ रहा है।

देवउठनी एकादशी वाले दिन मान्यता है कि भगवान विष्णु अपनी चार महीने की नींद से जागते हैं और इसी के साथ इस दिन से सभी शुभ कार्य शुरू हो जाते हैं। बताया जाता है कि कार्तिक मास की एकादशी अबूझ मुहूर्त होती है जिसमें सभी मांगलिक कार्यक्रम होते हैं। एकादशी के पहले विवाह का कारक ग्रह बृहस्पति राशि बदलकर 12 साल बाद अपनी ही राशि धनु में आ रहा है।

8 नवंबर को सूर्यरदय पर एकादशी होने के कारण इसी तिथि को मनाना शुभ होगा। शाम को तुलसी विवाह घर-घर में होगा। इसी तैयारी में श्रद्धालु जुटे हैं. पं. उमेश तिवारी ने बताया कि देवउठनी एकादशी के साथ ही विवाह के शुभ मुहूर्त हैं। इस माह 19, 20, 21, 22, 23, 27, 28 और 29 नवंबर को विवाह के शुभ मुहूर्त हैं।

दिसंबर की बात करें तो 1 से 12 दिसंबर तक विवाह का शुभयोग है। 13 दिसंबर से खरमास शास्त्रों के अनुसार शुक्र तारा के अस्त होने पर विवाह आदि मांगलिक कार्य शुभ नहीं माने जाते। 13 दिसंबर से खरमास का प्रारंभ होगा। इसके साथ ही इस साल विवाह के मुहूर्त 12 दिसंबर तक ही होंगे। 15 जनवरी 2020 को मकर संक्रांति के बाद एक बार पुन: मांगलिक कार्यों का श्रीगणेश होगा।

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