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चाणक्य नीति: पुरुष के अंदर नहीं होनी चाहिए ये तीन स्थितियां, दुर्भाग्य के होते हैं संकेत

By धीरज पाल | Updated: January 24, 2018 20:26 IST

किसी व्यक्ति का भाग्य अगर उसके साथ है को उसके सारे बिगड़े काम बन जाते हैं।

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जिंदगी में  भाग्य और अभाग्य की बात अक्सर होती रहती है। दोनों ही एक दूसरे के पूरक होते हैं। भाग्य यानी सुख-समृद्धि और श्रेष्ठ जीवन। अभाग्य यानी दुख और परेशानियों से भरा जीवन। अक्सर आपने सुना होगा कि किसी व्यक्ति का भाग्य साथ दे दिया तो उसके बिगड़े हुए काम बन जाते हैं और लेकिन जिस किसी के साथ उसका भाग्य साथ नहीं है ऐसी स्थिति में उसके बने काम पर पानी फिर जाता है। आचार्य चाणक्य ने तीन परिस्थितियां ऐसी बताई हैं जो किसी भी पुरुष के दुर्भाग्य की ओर इशारा करती हैं। यहां जानिए ये तीन परिस्थितियां कौन-कौन सी हैं...

1. चाणक्य ने कहा कि वृद्धकाले मृता भार्या बन्धुहस्ते गतं धनम्। भोजनं च पराधीनं त्रय: पुंसां विडम्बना:।। अर्थात् यदि किसी वृद्ध पुरुष की पत्नी मृत्यु को प्राप्त हो जाती है तो उस पुरुष के लिए यह दुर्भाग्य की बात है। यदि युवावस्था में जीवन साथी का साथ छुटता है तो पुरुष दूसरा विवाह भी कर सकता है, लेकिन बुढ़ापे में यह सभी के लिए संभव नहीं हो पाता। वृद्धावस्था में पति और पत्नी दोनों के लिए जीवन साथी का साथ बहुत महत्वपूर्ण होता है, उस समय का अकेलापन निराशाजनक और मानसिक तनाव बढ़ाने वाला होता है।

2. यदि किसी पुरुष का धन किसी शत्रु या बुरे स्वभाव वाले के हाथों में चले जाए तो यह दुर्भाग्य की बात है। व्यक्ति का खुद का कमाया हुआ धन शत्रु के हाथ में चले जाएगा तो दोहरी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। पहली बात तो ये कि धन हानि के कारण आर्थिक संकट का सामना करना पड़ेगा और दूसरी बात ये कि शत्रु के हाथ में गए हुए धन का उपयोग हमारे विरुद्ध ही किया जा सकता है।

3. किसी भी पुरुष के लिए यह दुर्भाग्य की बात है कि उसे अपने घर में न रहकर किसी पराये घर में रहना पड़े। पराए घर में रहते हुए व्यक्ति को खुद की इच्छा से कोई भी काम करने के लिए दूसरों की अनुमति का इंतजार करना पड़ता है। गुलाम या पराए घर में रहने वाले पुरुष की स्वतंत्रता पूरी तरह छीन जाती है। गुलामी का जीवन भयंकर कष्ट देता है। ऐसी परिस्थिति में व्यक्ति तन और मन से दुखी रहता है।

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