लाइव न्यूज़ :

Chaitra Navratri 2026 Ashtami Navami date: महाष्टमी व महानवमी तिथि कब है? जानें कन्या पूजन तिथि, विधि, मुहूर्त और महत्व

By रुस्तम राणा | Updated: March 19, 2026 13:46 IST

हिन्दू पंचाग के अनुसार, इस साल चैत्र नवरात्रि की महाष्टमी 26 मार्च 2026, गुरुवार को मनाई जाएगी। यह दिन मां महागौरी को समर्पित है। इस दिन सुबह कन्या पूजन करना फलदायी माना जाता है।

Open in App

Chaitra Navratri 2026 Ashtami Navami date: आज (19 मार्च) से चैत्र नवरात्रि व्रत प्रारंभ हो चुके हैं। नौ दिनों तक चलने वाले इस धार्मिक पर्व में मां दुर्गा के नौ रूपों की आराधना की जाती है। मां शक्ति के उपासक चैत्र नवरात्रि में नौ दिनों तक व्रत का पालन करते हुए देवी की उपासना करते हैं। जिस प्रकार नवरात्रि के पहले दिन चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को कलश स्थापना करके मां के प्रथम स्वरूप की पूजा की जाती हैं। वहीं अष्टमी या नवमी के दिन कन्या पूजन के साथ इस व्रत का समापन (पारण) किया जाता है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि चैत्र नवरात्रि 2026 में अष्टमी और नवमी तिथि कब पड़ रही है। 

कब है चैत्र नवरात्रि की अष्टमी और रामनवमी 2026?

हिन्दू पंचाग के अनुसार, इस साल चैत्र नवरात्रि की महाष्टमी 26 मार्च 2026, गुरुवार को मनाई जाएगी। यह दिन मां महागौरी को समर्पित है। इस दिन सुबह कन्या पूजन करना फलदायी माना जाता है। जबकि चैत्र नवरात्र की नवमी तिथि 27 मार्च 2026, दिन शुक्रवार को पड़ रही है। इसी दिन मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम का जन्मोत्सव मनाया जाएगा।

महाष्टमी और महानवमी तिथि पर कन्या पूजन मुहूर्त

इस दिन कन्या पूजन का मुहूर्त सुबह 6:18 से 7:50 बजे और 10:55 से 1:59 बजे तक है। 27 मार्च को कन्या पूजन का समय सुबह 6:17 से 10:54 बजे और दोपहर 12:27 से 1:59 बजे तक है। पूजा में भगवान राम को तुलसी जरूर अर्पित करें।

कन्या पूजन का विधि

-सुबह स्नान करें, साफ कपड़े पहनें और कन्या पूजन का संकल्प लें।-इसके बाद सबसे पहले घर और पूजा स्थल को साफ करें।-कन्याओं का प्रेम पूर्वक स्वागत करें, उनके पैर धोएं, माथे पर तिलक लगाएं और चरणों में फूल-माला पहनाएं।-उन्हें लाल चुनरी या रुमाल दें और पूरी, हलवा, चना का भोजन कराएं।-भोजन के बाद कन्याओं को दक्षिणा, फल, मिठाई या छोटे उपहार दें।-चरण स्पर्श कर उनका आशीर्वाद लें और उन्हें विदा करें।

कन्या पूजन का महत्व

धार्मिक मान्यता के अनुसार, कन्याओं में स्वयं मां दुर्गा वास करती हैं। इसलिए कन्या पूजन करना माता के बाल रूप की पूजा माना जाता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार यह पूजा माता की कृपा और नवरात्रि के 9 दिन की पूजा का पूर्ण फल प्राप्त करने का माध्यम है। भोग में पूरी, काले चने, हलवा या खीर रखा जाता है। उपहार में लाल चुनरी, चूड़ियां, बिंदी, पेन-कॉपी, फल, मिठाई, नारियल या छोटे खिलौने दिए जा सकते हैं।

टॅग्स :चैत्र नवरात्रिमां दुर्गाहिंदू त्योहार
Open in App

संबंधित खबरें

पूजा पाठMay 2026 Festival Calendar: मोहिनी एकादशी से लेकर बुद्ध पूर्णिमा तक, नोट कर लें मई महीने की त्योहारों की तारीख

पूजा पाठUpcoming Hindu Festivals List: अप्रैल 2026 में 6 बड़े त्योहार, ये तारीखें नोट कर लें वरना पछताएंगे

पूजा पाठAkshaya Tritiya 2026: सोना खरीदने के पैसे नहीं हैं, अक्षय तृतीया पर खरीदें ये 7 चीजें बदल देंगी किस्मत!

पूजा पाठBohag Bihu 2026: कब है रोंगाली बिहू? जानिए क्यों खास हैं उत्सव के ये 7 दिन

पूजा पाठHanuman Jayanti Puja Muhurat 2026: नोट कर लें बजरंगबली की पूजा के ये 2 सबसे शुभ मुहूर्त, बरसेगी पवनपुत्र की कृपा

पूजा पाठ अधिक खबरें

पूजा पाठPanchang 19 May 2026: आज कब से कब तक है राहुकाल और अभिजीत मुहूर्त का समय, देखें पंचांग

पूजा पाठRashifal 19 May 2026: रोजमर्रा के कामों में आ सकती हैं रुकावटें, जानें अपना भाग्यफल

पूजा पाठPanchang 18 May 2026: आज कब से कब तक है राहुकाल और अभिजीत मुहूर्त का समय, देखें पंचांग

पूजा पाठRashifal 18 May 2026: आज कर्क समेत 5 राशियों के लिए भाग्यशाली है दिन, नौकरी-व्यापार में प्राप्त होंगे नए अवसर

पूजा पाठपंच केदार तीर्थयात्राः रहिए तैयार, 18 मई को खुलेंगे श्री रुद्रनाथ मंदिर के कपाट, पवित्र डोली धार्मिक मंत्रोच्चार, पुष्प वर्षा और गढ़वाल राइफल्स सेना बैंड द्वारा बजाई गई धुनों के बीच रवाना