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Aaj Ka Panchang 30 September 2021: आज का पंचांग, देखें राहुकाल और अभिजीत मुहूर्त का समय

By रुस्तम राणा | Updated: September 30, 2021 07:36 IST

आज का पंचांग, आज की तिथि, वार, नक्षत्र, करण, योग के साथ-साथ अभिजीत मुहुर्त, राहुकाल, सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय, चंद्रास्त, चंद्र राशि, सूर्य राशि के बारे में जानकारी देता है।

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Today Panchang | आज का पंचांग, 30 सितंबर 2021

तिथिनवमी, 22:04 तक
नक्षत्रपुनर्वसु, 25:26 तक
योगवरीघा, 18:40 तक
करण

प्रथम- तैतिल, 09:22 तक

द्वितीय - गारा, 22:04 तक

वारगुरुवार
सूर्योदय06:16
सूर्यास्त18:04
चंद्रोदय24:43
चंद्रास्त14:19
अमांतभाद्रपद
पूर्णिमांतआश्विन
पक्षकृष्ण
सूर्य राशिकन्या
चंद्र राशिमिथुन
राहुकाल13:38 − 15:07
अभिजीत मुहूर्त11:46 − 12:34
विक्रमी संवत्2078
शक संवत्1943 पलवा

हिन्दू शास्त्र के अनुसार, पंचांग पांच अंगों से मिलकर बना होता है। ये पांच अंग तिथि, नक्षत्र, योग, करण और वार हैं। हिन्दू धार्मिक परंपरा में किसी भी शुभ मुहूर्त को निकालने के लिए पंचांग का प्रयोग किया जाता है। भारतीय पंचांग ग्रह, नक्षत्र की चाल पर आधारित है, जिसकी गणना सटीक होती है। यही कारण है कि हिन्दू संस्कृति में शादी-मुंडन, गृह प्रवेश सहित सोलह संस्कार एवं महत्वपूर्ण कार्यक्रम, उद्घाटन समारोह, नया व्यवसाय या अन्य किसी तरह के शुभ कार्य के लिए पंचांग से शुभ मुहुर्त निकाला जाता है। आज का पंचांग, आज की तिथि, वार, नक्षत्र, करण, योग के साथ-साथ मुहुर्त, राहुकाल, सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय, चंद्रास्त, चंद्र राशि, सूर्य राशि के बारे में जानकारी देता है।  

पंचांग के पांच अंग

तिथि- तिथि को अगर सरल शब्दों में परिभाषित करें तो यह एक प्रकार से दिनांक है। हालांकि इसकी गणना भिन्न रूप से की जाती है। पंचांग के एक मास को दो पक्ष (शुक्ल और कृष्ण) में विभाजित किया गया है। वहीं एक पक्ष में 15 तिथियां होती हैं। प्रतिपदा, द्वितीय, तृतीया, चतुर्थी, पंचमी, षष्ठी, सप्तमी, अष्टमी, नवमी, दशमी, एकादशी, द्वादशी, त्रयोदशी, चतुर्दशी, पूर्णिमा/अमावस्या।

नक्षत्र- हिन्दू काल गणना के अनुसार, आकाश में तारों के समूह को नक्षत्र कहते हैं जिनकी संख्या 27 बताई गई है। अश्विन नक्षत्र, भरणी नक्षत्र, कृत्तिका नक्षत्र, रोहिणी नक्षत्र, मृगशिरा नक्षत्र, आर्द्रा नक्षत्र, पुनर्वसु नक्षत्र, पुष्य नक्षत्र, आश्लेषा नक्षत्र, मघा नक्षत्र, पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र, उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र, हस्त नक्षत्र, चित्रा नक्षत्र, स्वाति नक्षत्र, विशाखा नक्षत्र, अनुराधा नक्षत्र, ज्येष्ठा नक्षत्र, मूल नक्षत्र, पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र, उत्तराषाढ़ा नक्षत्र, श्रवण नक्षत्र, घनिष्ठा नक्षत्र, शतभिषा नक्षत्र, पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र, उत्तराभाद्रपद नक्षत्र, रेवती नक्षत्र।

योग- योग भी 27 होते हैं। सूर्य-चंद्र की विशेष दूरियों की स्थितियों को योग कहा जाता है। योग के नाम इस प्रकार हैं- विष्कुम्भ, प्रीति, आयुष्मान, सौभाग्य, शोभन, अतिगण्ड, सुकर्मा, धृति, शूल, गण्ड, वृद्धि, ध्रुव, व्याघात, हर्षण, वज्र, सिद्धि, व्यातीपात, वरीयान, परिघ, शिव, सिद्ध, साध्य, शुभ, शुक्ल, ब्रह्म, इन्द्र और वैधृति।

करण- करण 11 होते हैं जो इस प्रकार हैं- बव, बालव, कौलव, तैतिल, गर, वणिज, विष्टि, शकुनि, चतुष्पाद, नाग और किस्तुघ्न। विष्टि करण को भद्रा कहते हैं और भद्रा में शुभ कार्य वर्जित माने गए हैं।

वार - वार का मतलब दिन होता है। एक सप्ताह में सात वार होते हैं। ये सात वार ग्रहों के नाम से रखे गए हैं - सोमवार, मंगलवार, बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार, शनिवार, रविवार।

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