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राहुल गांधी ने कृषि कानूनों को लेकर सरकार पर साधा निशाना, तो बचाव में राजनाथ बोले- किसानों से बातचीत को तैयार

By अनुराग आनंद | Updated: February 12, 2021 07:15 IST

विपक्षी दलों ने सरकार से तीन विवादित कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग की है। कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस सहित कुछ विपक्षी दलों का कहना है कि जब किसानों ने इन कानूनों की मांग नहीं की तब इसे क्यों लाया गया।

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ठळक मुद्देनरेंद्र मोदी सरकार विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों के साथ अब तक 11 दौर की बातचीत कर चुकी है। इस मुद्दे पर पिछले दो महीने से अधिक समय से दिल्ली की सीमाओं पर पंजाब, हरियाण, उत्तर प्रदेश के कुछ क्षेत्रों के हजारों किसान विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

नयी दिल्ली: कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने बृहस्पतिवार को तीन नये कृषि कानूनों को लेकर केंद्र सरकार एवं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला और कहा कि इनके कारण मंडिया खत्म हो जाएंगी और कृषि क्षेत्र कुछ बड़े उद्योगपतियों के नियंत्रण में चला जाएगा।

वहीं, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि सरकार इन कानूनों पर खुलकर बातचीत करने और जरूरी होने पर संशोधन करने को तैयार है। एक दिन पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में कृषि कानूनों का पुरजोर बचाव किया था और कृषि क्षेत्र को निजी उद्यमों के समर्थन एवं अधिक निवेश की जरूरत बतायी थी।

राहुल गांधी ने नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए आगे ये कहा

राहुल गांधी ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि इन कानूनों से भारत की खाद्य सुरक्षा प्रणाली खत्म हो जायेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचेगा। उन्होंने दावा किया कि इन कानूनों से मंडियां खत्म हो जाएंगी और कृषि क्षेत्र कुछ बड़े उद्योगपतियों के नियंत्रण में चला जाएगा।

कांग्रेस नेता ने कहा कि इसका उद्देश्य मंडियां खत्म करने, असीमित जमाखोरी करने से संबंधित है और जब किसान अपनी उपज का सही दाम मांगेगा तो उसे अदालत में नहीं जाने दिया जाएगा। राहुल गांधी ने कहा कि इन कानूनों के बाद देश का कृषि क्षेत्र दो-चार उद्योगपतियों के हाथ में चला जाएगा। भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि पिछले साल देश की संसद में तीन कृषि विधेयक पारित किए गए जिन्हें कानून का रूप दिया गया।

राजनाथ सिंह ने कहा कि कृषि कानूनों को लेकर देश में निहित स्वार्थों के चलते एक भ्रम पैदा किया गया-

इन कानूनों का निर्माण देश के आम किसानों को उनकी फसल का वाजिब मूल्य दिलाने और अपनी उपज को कहीं भी बेचने की आजादी देने के लिए किया गया था। राजनाथ सिंह ने जोर देकर कहा, ‘‘ इन कृषि कानूनों को लेकर देश में निहित स्वार्थों के चलते एक भ्रम का वातावरण पैदा किया गया और कहा गया कि मंडियां खत्म हो जाएंगी, एमएसपी खत्म हो जाएगी, किसानों की जमीन गिरवी चली जाएगी।’’

मध्य प्रदेश भाजपा की ओर से आयोजित एक ऑनलाइन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने भी पिछले दिनों देश की संसद में साफ-साफ कहा है कि एमएसपी था, एमएसपी है और एमएसपी रहेगा तथा मंडी व्यवस्था भी कायम रहेगी।

सरकार इन कृषि कानूनों पर खुलकर बात करने और जरूरत पड़ी संशोधन के लिए तैयार-

रक्षा मंत्री ने कहा, ‘‘ सरकार इन कृषि कानूनों पर खुलकर बात करने और जरूरत पड़ी तो उनमें संशोधन के लिए भी तैयार है । ’’ बिहार के मुख्यमंत्री और जदयू नेता नीतीश कुमार ने कानूनों का समर्थन करते हुए कहा कि ये कानून किसानों के हित में हैं और उनके खिलाफ नहीं हैं।

मोदी के साथ बैठक के बाद कुमार ने कहा कि इस मुद्दे पर उनकी पार्टी, सरकार के साथ है और तीन कृषि कानूनों को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों के साथ बातचीत करके केंद्र सरकार ने सही कदम उठाया है। उन्होंने कहा, ‘‘ उम्मीद करते हैं कि मुद्दे का समाधान निकल जायेगा। ’’

जब किसानों ने इन कानूनों की मांग नहीं की तब इसे क्यों लाया गया-

उल्लेखनीय है कि कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस सहित कुछ विपक्षी दलों का कहना है कि जब किसानों ने इन कानूनों की मांग नहीं की तब इसे क्यों लाया गया। विपक्षी दलों ने सरकार से तीन विवादित कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग की है।

इस मुद्दे पर पिछले दो महीने से अधिक समय से दिल्ली की सीमाओं पर पंजाब, हरियाण, उत्तर प्रदेश के कुछ क्षेत्रों के हजारों किसान विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। सरकार विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों के साथ अब तक 11 दौर की बातचीत कर चुकी है। 

(एजेंसी इनपुट)

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