लखनऊः परिसीमन के साथ नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक लोकसभा में गिरने के बाद योगी सरकार द्वारा 30 अप्रैल को बुलाए गए विधानमंडल के विशेष सत्र में पहली बार सत्ता पक्ष और विपक्ष की महिला विधायक अपनी ताकत और वाकपटुता का अहसास कराएगी. योगी सरकार इस विशेष सत्र में विपक्ष के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाने की तैयारी में हैं.
सरकार की मंशा है कि सदन कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) को महिला विरोधी होने की तोहमत लगाई जाए. यूपी की जनता के बीच यह संदेश दिया जाए कि इन दो महिला विरोधी दलों की वजह से सदन में महिलाओं की आरक्षण को लेकर लाया गया नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक लोकसभा में पास नहीं हो सका.
वही विपक्ष दल सदन में यह साबित करने में जुटेंगे कि नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक के जरिए केंद्र सरकार देश का चुनावी नक्शा बदलना चाहती थी, जिसे विपक्ष की एकता ने नाकाम कर दिया है. कुल मिलकर विधानमंडल का ये विशेष सत्र काफी हंगामा भर होने की उम्मीद है.
बिल गिरने के अगले दिन से ही यूपी में विरोध शुरू
इस तरह ही उम्मीद करने की वजह यह ही कि गत 17 अप्रैल को लोकसभा में महिला आरक्षण संशोधन बिल गिरने के तुरंत बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की महिला सांसदों ने संसद परिसर में विपक्ष के खिलाफ प्रदर्शन किया. इसके अगले दिन प्रधानमंत्री ने राष्ट्र को संबोधित किया और विपक्ष की आलोचना की.
इसके के बाद भाजपा ने इस मुद्दे पर सपा और कांग्रेस को घेरने के लिए यूपी में बड़ा अभियान शुरू कर दिया. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की. फिर मुख्यमंत्री के नेतृत्व में उनके आवास से महिलाओं की आक्रोश रैली निकाली गई. इस दौरान भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक समेत तमाम बड़े नेता मौजूद थे.
इसी दरमियान विधानमंडल का विशेष सत्र बुलाकर इस मामले में विपक्ष के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित करने के राजनीतिक प्लान तैयार हुआ. चूंकि दोनों सदनों में भाजपा के पास पर्याप्त बहुमत है. इस वजह से यह प्रस्ताव पारित होना तय माना जा रहा है. बताया जा रहा है कि निंदा प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष की ओर से महिला विधायकों और मंत्रियों को आगे रखा जाएगा.
इस दौरान सपा सरकार में महिलाओं के खिलाफ हुई आपराधिक घटनाओं का भी जिक्र भी किया जाएगा, ताकि विपक्ष को महिला विरोधी साबित किया जा सके. लेकिन महिलाओं के आरक्षण पर विपक्ष को घेरना भाजपा नेताओं के लिए आसान नहीं होगा, यह दावा भी किया जा रहा है.
विपक्ष भी इस मामले में चौकस है
भाजपा के इस प्लान से कांग्रेस और सपा के विधायक भी चौकस हैं. इन दोनों की दलों ने योगी सरकार के शासनकाल में महिलाओं के साथ हुए अपराध की आंकडों के साथ योगी सरकार को सदन में घेरने की तैयारी की है. सपा विधायक रागनी सोनकर के अनुसार, केंद्र सरकार नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक के जरिए परिसीमन बिल लाई थी.
सरकार जनगणना के बिना ही परिसीमन कराना चाहती थी. इससे देश के पिछड़े और दलित वर्ग को नुकसान होता. ये विशेष सत्र भी भाजपा अपने एजेंडे को लागू करने के लिए बुला रही हैं. भाजपा की इस नौटंकी की विपक्ष की महिला विधायक पोल खोलकर रख देंगी.
इसके साथ ही योगी सरकार के शासन में हाथरस कांड, उन्नाव रेप कांड और बीएचयू में छात्रा के साथ हुए रेप के साथ ही गाजीपुर में हुई लड़की की मौत क मामला भी उठाया जाएगा. कुल मिलाकर सदन में योगी सरकार के राजनीतिक दांव की पोल खोली जाएगी.
इस अध्यादेश की जानकारी देगी सरकार
जाहिर है कि विपक्ष की यह मंशा सदन में सरकार के मंत्री-विधायकों को रास नहीं आएगी और हंगामा होगा. जिसे रोक पाना सदन के भीतर मुश्किल होगा क्योकि इस विधानसभा में कुल 51 महिला सदस्य हैं, इनमें सर्वाधिक 30 सदस्य भाजपा की हैं. सपा की 15, अपना दल की चार, कांग्रेस व रालोद की एक-एक महिला सदस्य हैं.
जबकि 100 सीटों वाली विधान परिषद में मात्र चार महिला सदस्य हैं। इनमें तीन भाजपा व एक निर्दलीय हैं. महिला विधायकों में सपा की रागनी सोनकर और कांग्रेस के आराधना मिश्रा मोर्चा संभालेंगी, वही भाजपा की तरफ से बेबी रानी मौर्य, गुलाब देवी और रजनी तिवारी विपक्ष के हमले का जवाब देंगी. मुख्यमंत्री योगी और दोनों उप मुख्यमंत्री तो इस मसले पर सदन में बोलेंगे ही.
इस विशेष सत्र में उत्तर प्रदेश लोक सेवा अधिकरण संशोधन अध्यादेश, उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता संशोधन अध्यादेश, उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता द्वितीय संशोधन अध्यादेश, उप्र वानिकी एवं औद्यानिकी विश्वविद्यालय अध्यादेश, उप्र दंड विधि (अपराधों का शमन और विचारणों का उपशमन) संशोधन अध्यादेश तथा उप्र निजी विश्वविद्यालय संशोधन अध्यादेश की जानकारी सरकार सदन को देगी.