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क्या गंगा मैली ही रहेगी?

By लोकमत समाचार हिंदी ब्यूरो | Updated: August 1, 2018 04:44 IST

 एनजीटी ने यह भी कहा है कि शीघ्रातिशीघ्र केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को अपनी वेबसाइट पर एक मानचित्र डाल देना चाहिए जिसमें यह बताया जा सके कि किन किन स्थलों पर गंगा का जल पीने और नहाने लायक नहीं है।

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(गौरीशंकर राजहंस)

सावन का महीना शुरू हो गया है और देश के विभिन्न गंगा घाटों से गंगा जल लेकर लोग पड़ोस के शिव मंदिर में जल चढ़ा रहे हैं। हाल ही में ‘हरित न्यायाधिकरण’ यानी एनजीटी ने एक अत्यंत कटु टिप्पणी करते हुए कहा है कि हरिद्वार से बंगाल की खाड़ी तक बहने वाली गंगा में अनेक जगह जहरीले पदार्थ मिल जाते हैं और उस पानी का सेवन करने वाले को सच्चाई का पता लग ही नहीं पाता है। एनजीटी ने यह भी कहा कि यदि सिगरेट और तम्बाकू के विभिन्न पैकेटों पर सरकार द्वारा यह लिखा जाता है कि इनके सेवन से स्वास्थ्य पर बहुत बुरा असर पड़ेगा तो उसी तरह गंगा की धारा जहां जहां विषैली हो गई है वहां साइन बोर्ड लगाकर लोगों को यह चेतावनी क्यों नहीं दी जाए कि यहां का जल पीने लायक या उपयोग में लाने लायक नहीं है।

 एनजीटी ने यह भी कहा है कि शीघ्रातिशीघ्र केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को अपनी वेबसाइट पर एक मानचित्र डाल देना चाहिए जिसमें यह बताया जा सके कि किन किन स्थलों पर गंगा का जल पीने और नहाने लायक नहीं है। प्रश्न यह है कि क्या केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अविलंब इसकी जानकारी लोगों को देगा? अधिकृत सर्वे से अब यह पता चल गया है कि उत्तर प्रदेश और बिहार में सरकार के लाख मना करने के बाद भी चमड़ा उद्योग की फैक्ट्रियों और दूसरे उद्योग धंधों से प्रदूषित पानी नालों के द्वारा गंगा में गिरता रहता है। विभिन्न राज्य सरकारें लोगों की आंखों में धूल झोंकने का काम करती हैं और इन गंदे नालों, जिनसे प्रदूषित पानी गंगा में बिना रोक टोक गिर रहा है, को रोकने का कोई ठोस प्रबंध नहीं करती हैं। 

विभिन्न सर्वेक्षणों में यह भी पाया गया है कि गंगा की धारा उन स्थानों पर ज्यादा विषाक्त हो गई है जहां ये जहरीले नाले गंगा में गिरते रहते हैं। इन स्थानों में लोगों को कई प्रकार की गंभीर जानलेवा बीमारियां जैसे टीबी, दमा, डायरिया, कैंसर, टाइफाइड आदि हो जाती हैं। भारत सरकार के एक पूर्व पर्यावरण मंत्री ने हाल में कहा है कि पिछले कुछ वर्षो में गंगा की सफाई पर 9 हजार करोड़ रुपए खर्च हो गए हैं। कुछ पता नहीं चल रहा है कि यह पैसा कैसे खर्च हुआ है किसकी जेब में गया। केवल केंद्र सरकार और राज्य सरकारें ही गंगा की सफाई के लिए सक्रिय न हों बल्कि आम जनता में जागरूकता फैलाई जाए, क्योंकि यदि गंगा का पानी जहरीला होता गया तो उसके परिणाम पूरे देश को भुगतने होंगे। 

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