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Bihar Jitan Ram Manjhi: क्लर्क से केंद्र में मंत्री, जानें कौन हैं बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और गया के सांसद मांझी, नीतीश सरकार में मंत्री हैं बेटा संतोष सुमन

By एस पी सिन्हा | Updated: June 9, 2024 20:02 IST

Bihar Jitan Ram Manjhi: जीतन राम मांझी का जन्म 1944 में गया जिले के खिजरसराय के महकार गांव में हुआ था। पत्नी शांति देवी, दो बेटे और पांच बेटियां हैं। बेटे डॉ. संतोष सुमन बिहार सरकार में मंत्री हैं।

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ठळक मुद्देBihar Jitan Ram Manjhi: जदयू से अलग होने के बाद हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा का गठन किया।Bihar Jitan Ram Manjhi: लोकसभा चुनाव में हम को एनडीए ने गया की एक सीट दी थी। Bihar Jitan Ram Manjhi: जीतन राम मांझी ने चुनाव लड़ा और बड़ी जीत हासिल की।

Bihar Jitan Ram Manjhi: केन्द्र की मोदी सरकार में मंत्री बनने वाले ’हम' के संयोजक और सांसद जीतन राम मांझी 79 साल के हैं। केन्द्रीय मंत्रिमंडल में सबसे ज्यादा उम्र के मंत्री बनने का जीतन राम मांझी के एक नाम यह एक रिकॉर्ड होगा। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री मांझी मुसहर(दलित) जाति से आते हैं और गया संसदीय सीट से चुनाव जीता है। वह पहली बार वर्ष 1980 में विधायक चुने गए थे। बाद में कई बार विधानसभा के सदस्य निर्वाचित हुए। साथ ही अलग अलग सरकारों में मंत्री रहे। इस बीच 20 मई 2014 से 20 फरवरी 2015 तक वे बिहार के मुख्यमंत्री भी रहे। जीतन राम मांझी का जन्म 1944 में गया जिले के खिजरसराय के महकार गांव में हुआ था। उनकी पत्नी शांति देवी के साथ उनके दो बेटे और पांच बेटियां हैं। उनके बेटे डॉ. संतोष सुमन बिहार सरकार में मंत्री हैं।

बिहार में लंबा सियासी अनुभव रखने वाले जीतन राम मांझी ने जदयू से अलग होने के बाद हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा का गठन किया। इस बार के लोकसभा चुनाव में हम को एनडीए ने गया की एक सीट दी थी। इस सीट में जीतन राम मांझी ने चुनाव लड़ा और बड़ी जीत हासिल की। इसके पहले मांझी तीन बार गया से लोकसभा चुनाव लड़े थे, लेकिन कभी भी उन्हें सफलता नहीं मिली।

यह पहला मौका है जब वे सांसद बने और अब पहली बार लोकसभा पहुंचते ही केंद्र में मंत्री भी बन गए हैं। जीतन राम मांझी का राजनीतिक जीवन काफी रोचक है। उन्होंने 14 साल तक टेलीफोन विभाग में क्लर्क के रूप में काम किया, लेकिन 1966 में राजनीति में रुचि के चलते नौकरी छोड़ दी।

 1980 में वे पहली बार कांग्रेस पार्टी से फतेहपुर विधानसभा (अब बोधगया) से विधायक चुने गए और राजस्व राज्य मंत्री बने। 1983 से 1985 तक और फिर 1988 से 2000 तक वे बिहार सरकार में राज्यमंत्री रहे। 2008 में उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया गया।

 उन्होंने विभिन्न मंत्रालयों में काम किया, जैसे भूमि सुधार राजस्व विभाग, समाज कल्याण विभाग, अनुसूचित जाति जनजाति कल्याण विभाग, उच्च शिक्षा विभाग आदि। 20 मई 2014 से 20 फरवरी 2015 तक वे बिहार के मुख्यमंत्री रहे और दलित समुदाय के तीसरे मुख्यमंत्री बने। वह बाराचट्टी और मखदुमपुर से विधायक रहे। एक बार फतेहपुर विधानसभा से 147 वोटों से हार का सामना करना पड़ा। वर्तमान में वे इमामगंज से विधायक भी हैं।

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