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1400000 महिलाएं लोकल गवर्नमेंट बॉडीज में कर रहीं काम?, नारी शक्ति वंदन को समर्पित?, पीएम मोदी बोले-नया इतिहास रचने के करीब, वीडियो

By सतीश कुमार सिंह | Updated: April 13, 2026 12:29 IST

हमारे देश की संसद एक नया इतिहास रचने के करीब है। एक ऐसा नया इतिहास, जो अतीत की संकल्पनाओं को साकार करेगा, जो भविष्य के संकल्पों को पूरा करेगा।

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ठळक मुद्दे हमारी कार्य संस्कृति का, हमारी निर्णय प्रक्रिया का स्वाभाविक हिस्सा हो।देश की संसद तक दशकों की प्रतीक्षा के अंत का समय 16, 17, 18 अप्रैल है। 2023 में नई संसद में हमने नारीशक्ति वंदन अधिनियम के रूप प्रथम कदम उठाया था।

नई दिल्लीः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विज्ञान भवन में नेशनल लेवल के ‘नारी शक्ति वंदन सम्मेलन’ में शामिल हुए। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता भी मौजूद हैं। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने कहा, "नारी शक्ति वंदन अधिनियम हमारी मातृ शक्ति के सालों के संघर्ष और साधना के लोकतांत्रिक सिद्धि का महापर्व है। यह महिलाओं के सामर्थ्य आत्म सम्मान और लोकतांत्रिक भागीदारी को सुनिश्चित करने वाला युगांतकारी परिवर्तन है।" प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "देश की विकास यात्रा के इन अहम पड़ावों के बीच भारत 21वीं सदी के सबसे बड़े निर्णयों में से एक निर्णय लेने जा रहा है। मैं बहुत जिम्मेदारी के साथ कह रहा हूं कि 21वीं सदी के महत्वपूर्ण निर्णयों में से एक महत्वपूर्ण निर्णय ये है। ये निर्णय नारी शक्ति को समर्पित है। नारी शक्ति वंदन को समर्पित है।"

इस समय देश में बैसाखी के पर्व की उमंग है। कल देश के अलग अलग हिस्सों में नववर्ष भी मनाया जाएगा। मैं आज जलियांवाला बाग नरसंहार के वीर बलिदानियों को भी श्रद्धांजलि देता हूं। देश की विकास यात्रा के इन अहम पड़ावों के बीच भारत 21वीं सदी के सबसे बड़े निर्णयों में से एक निर्णय लेने जा रहा है। मैं बहुत जिम्मेदारी के साथ कह रहा हूं कि 21वीं सदी के महत्वपूर्ण निर्णयों में से एक महत्वपूर्ण निर्णय ये है।

ये निर्णय नारी शक्ति को समर्पित है। नारी शक्ति वंदन को समर्पित है। राज्यों की विधानसभाओं से लेकर देश की संसद तक दशकों की प्रतीक्षा के अंत का समय 16, 17, 18 अप्रैल है। 2023 में नई संसद में हमने नारीशक्ति वंदन अधिनियम के रूप प्रथम कदम उठाया था। वह समय से लागू हो सके, महिलाओं की भागीदारी हमारे लोकतंत्र को मजबूती दे, इसके लिए 16 अप्रैल से संसद के बजट सत्र की विशेष बैठक का आयोजन होने जा रहा है और उससे पहले आज नारीशक्ति वंदन का ये कार्यक्रम, इसके जरिए हमें देश की कोटि-कोटि माताओं बहनों का आशीर्वाद मिल रहा है।

आप सभी देश के कोने-कोने से आई हैं। आपकी इस उपस्थिति के लिए, इस महत्वपूर्ण काम के लिए आपने जो समय निकाला है, उसके लिए मैं आप सबका हृदय से अभिनंदन करता हूं। साथ ही भारत की सभी महिलाओं को एक नए युग के आगमन की बधाई भी देता हूं। 2014 में हमारे देश में करोड़ों महिलाएं ऐसी थी, जिन्होंने कभी बैंक का दरवाजा भी नहीं देखा था।

महिलाएं बैंकिंग सेक्टर से जुड़ी ही नहीं थी, तो उन्हें बैंकिंग का लाभ कैसे मिलता। हमने जनधन योजना शुरू की, तो देश की 32 करोड़ से ज्यादा महिलाओं के बैंक खाते खुले। लोकतांत्रिक संरचना में महिलाओं को आरक्षण देने की जरूरत दशकों से हर कोई महसूस कर रहा था। इस विमर्श को करीब 4 दशक बीत गए। इसमें सभी पार्टियों के और कितनी ही पीढ़ियों के प्रयास शामिल हैं।

हर दल ने इस विचार को अपने-अपने ढंग से आगे बढ़ाया है। 2023 में जब नारी शक्ति वंदन अधिनियम आया था, तब भी सभी दलों ने सर्वसम्मति से इसे पास कराया था। तब एक सुर में ये बात भी उठी थी कि इसे हर हाल में 2029 तक लागू हो जाना चाहिए। खासकर, हमारे विपक्ष के सभी साथियों ने मुखर होकर इस बात पर जोर डाला था कि 2029 में ये लागू हो जाना चाहिए।

हमारा प्रयास और प्राथमिकता है कि इस बार भी ये काम संवाद, सहयोग और सहभागिता से हो। मुझे पूरा विश्वास है कि जिस प्रकार से इस अधिनियम को पारित किया गया था और संसद का गौरव बढ़ा था। इस बार भी सबके सामूहिक प्रयास से संसद की गरीमा और नई ऊंचाइयों को छुएगी। इस समय भी हमारे देश में राष्ट्रपति जी से लेकर वित्त मंत्री जैसे अहम पद महिलाएं ही संभाल रही हैं।

उन्होंने देश की गरिमा और गौरव, दोनों को बढ़ाया है। हमारे देश में महिला नेतृत्व का एक बेहतरीन उदाहरण पंचायती राज संस्थाएं भी हैं। आज भारत में 14 लाख से अधिक महिलाएं लोकल गवर्नमेंट बॉडीज में सफलतापूर्वक काम कर रही हैं। लगभग 21 राज्यों में तो पंचायतों में उनकी भागीदारी करीब-करीब 50% तक पहुंच चुकी है।

हमारे देश की संसद एक नया इतिहास रचने के करीब है। एक ऐसा नया इतिहास, जो अतीत की संकल्पनाओं को साकार करेगा, जो भविष्य के संकल्पों को पूरा करेगा। एक ऐसे भारत का संकल्प जो समतामूलक हो, जहां सामाजिक न्याय केवल एक नारा न हो, बल्कि हमारी कार्य संस्कृति का, हमारी निर्णय प्रक्रिया का स्वाभाविक हिस्सा हो।

टॅग्स :महिला आरक्षणनरेंद्र मोदीदिल्लीसंसदरेखा गुप्ता
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