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वियतनाम के प्रधानमंत्री साल के अंत में भारत आएंगे

By भाषा | Updated: September 1, 2021 19:06 IST

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वियतनाम के प्रधानमंत्री फाम मिन्ह चिन्ह द्विपक्षीय व्यापक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के वास्ते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ चर्चा करने के लिए 2021 के अंत में भारत का दौरा करेंगे। वियतनाम के राजदूत फाम सान चाऊ ने बुधवार को इसकी जानकारी दी। इस साल अप्रैल में कार्यभार संभालने के बाद वियतनाम के प्रधानमंत्री का भारत का यह पहला दौरा होगा। राजदूत ने कहा, ‘‘वियतनाम के प्रधानमंत्री फाम मिन्ह चिन्ह द्विपक्षीय व्यापक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने की दिशा में प्रधानमंत्री मोदी के साथ उपायों पर चर्चा करने के लिए 2021 के अंत में भारत की आधिकारिक यात्रा करने वाले हैं।’’ प्रधानमंत्री मोदी ने जुलाई में टेलीफोन पर बातचीत के दौरान चिन्ह को वियतनाम का प्रधानमंत्री बनने पर बधाई दी थी और उन्हें जल्द से जल्द उपयुक्त तारीख पर भारत की यात्रा के लिए आमंत्रित किया था। प्रधानमंत्री मोदी ने विश्वास व्यक्त किया था कि भारत-वियतनाम व्यापक रणनीतिक साझेदारी चिन्ह के सक्षम मार्गदर्शन में मजबूत होती रहेगी। विदेश राज्य मंत्री मीनाक्षी लेखी और चाऊ ने चाणक्यपुरी के राजनयिक एन्क्लेव में कौटिल्य मार्ग पार्क में वियतनाम के संस्थापक और पूर्व राष्ट्रपति हो ची मिन्ह की एक आवक्ष प्रतिमा का भी अनावरण किया। यह भारत में हो ची मिन्ह की दूसरी आवक्ष प्रतिमा है। एक प्रतिमा कोलकाता में है। चाऊ ने कहा कि वियतनाम के हो ची मिन्ह शहर में महात्मा गांधी की प्रतिमा का अनावरण दो अक्टूबर को उनकी 152वीं जयंती के अवसर पर किया जाएगा। उन्होंने कहा, ‘‘हो ची मिन्ह शहर के सबसे खुले और खूबसूरत पार्क ताओ दान पार्क में महात्मा गांधी की प्रतिमा लगायी जाएगी। क्या यह संयोग है? नहीं, यह नियति है। एक नियति जिसने मानव जाति के दो महापुरुषों को उनके विचारों में एक साथ लाया...जिसने वियतनामी और भारतीय लोगों को एक साथ लाया।’’ लेखी ने कहा कि जिस तरह की भावना महात्मा गांधी और भारत को लेकर वियतनामी लोगों के दिलों में है ‘‘उसी तरह हो ची मिन्ह हमारे भी नायक हैं। वह हमारे दिलों में रहते हैं।’’ विदेश राज्य मंत्री ने कहा, ‘‘हो ची मिन्ह को सम्मान देने के लिए यहां आकर खुशी हो रही है, जिनके प्यार ने हमारे देश के लिए राजनीति, कूटनीति, अर्थशास्त्र, रक्षा, सुरक्षा, शिक्षा प्रशिक्षण, विज्ञान और प्रौद्योगिकी तथा लोगों के आपसी संबंधों पर वियतनाम-भारत संबंधों की नींव रखी। दोनों देशों की वर्तमान राजनीतिक संरचना भिन्न हो सकती है, लेकिन हम एक मजबूत ऐतिहासिक और सांस्कृतिक बंधन साझा करते हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘दोनों देश हजारों वर्षों से अपना इतिहास साझा करते हैं। उस समय, भारत और वियतनाम की सीमा समीप रही होगी...और आज भी हमारे दिल और दिमाग में कोई सरहद नहीं है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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