पटना: भाजपा के राज्यसभा सांसद और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री रहे सुशील मोदी ने शराब मामले में पटना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस द्वारा कथिततौर पर फोन के बाद आईपीएस के खिलाफ मामले को रफा-दफा करने करने वाले राज्य के पुलिस महानिदेशक एसके सिंघल के मामले में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को घेरने की कोशिश की है।
अपने ट्विटर हैंडल से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और डीजीपी एसके सिंघल को घेरते हुए सुशील मोदी ने इस पूरे प्रकरण की जांच सीबीआई के करवाने की मांग की है। सुशील मोदी का आरोप है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार फर्जीफोन कांड में फसे डीजीपी को बचाने का प्रयास कर रहे हैं।
अपने वीडियो में सुशील मोदी कह रहे हैं कि नीतीश कुमार कह रहे हैं कि डीजीपी दो महीने में रिटायर होने वाले हैं। ये भी कोई तुक है। मुख्यमंत्री जी पटना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस द्वारा गया के तत्कालीन एसएसपी आदित्य कुमार के मामले में डीजीपी को एक-दो बार नहीं बल्कि दर्जनों बार फोन किया जाता है और डीजीपी उस फोन का वैरिफिकेशन भी नहीं करवाते हैं।
डीजीपी ने क्यों नहीं इस बात को समझा कि आखिर कोई चीफ जस्टिस किसी आरोपी को बचाने के लिए क्यों सूबे के सबसे वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को फोन करेगा। ये सीधे-सीधे डीजीपी की गंभीर लापरवाही का मामला है। क्या कोई चीफ जस्टिस किसी एसएसपी के लिए मोबाइल से फोन करता है और वो भी कई बार।
डीजीपी ने एक बार भी यह नहीं सोचा कि आखिर चीफ जस्टिस अपने मोबाईल से किसी आरोपी को बचाने के लिए एक बार नहीं, दो बार नहीं बल्कि दर्जनों बार कॉल कर रहे हैं तो ये फोन कॉल फर्जी भी हो सकता है।
आखिर क्यों नहीं डीजीपी ने उस मोबाइल की जांच करवाई। इतना ही नहीं डीजीपी ने आनन-फानन में आईपीएस आदित्य कुमार को शराब मामले में दर्ज एफआईआर से राहत प्रदान कर दी और केस में क्लोजर रिपोर्ट लगा दी। उन्हें क्लीन चीट देने से पहले आपने फर्जी फोनकॉल के बारे में एक बार भी नहीं सोचा।
इसी बिहार में शराबबंदी के मामले में आपने चार लाख लोगों को जेल भेजा लेकिन एक आईपीएस को उसी तरह से मामले में दोषमुक्त कर दिया गया। ऐसे में सवाल उठता है कि आदित्य कुमार से डीजीपी का क्या संबंध था।
सुशील मोदी ने कहा कि जब राज्य का डीजीपी संदिग्ध आरोपों में घेरे में है तो क्या राज्य की जांच शाखा उनकी जांच कर पायेगा। इस कारण भाजपा डीजीपी एसके सिंघल के खिलाफ सीबीआई से जांच की कराये जाने की मांग करती है।