नई दिल्ली: तबलीगी जमात के सदस्यों पर विवादिट टिप्पणी को लेकर कानपुर GSVM मेडिकल कॉलेज की प्रिसिंपल डॉक्टर आरती लाल चंदानी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। हालांकि, यह वीडियो पुराना है लेकिन विवाद बढ़ने के बाद डॉक्टर लाल चंदानी ने इस पर अपनी सफाई पेश की है। नए वीडियो में वह कह रही हैं कि मेरे संपर्क में कई मुस्लिम भाई-बहन और बच्चे हैं, जिन्हें मैंने अपनों की तरह प्यार किया है।
इसपर ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने कटाक्ष करते हुए मिर्जा गालिब का एक शेर साझा किया है। उन्होंने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर लिखा 'ये फ़ित्ना आदमी की ख़ाना-वीरानी को क्या कम है, हुए तुम दोस्त जिस के दुश्मन उस का आसमाँ क्यूँ हो।'
कानपुर मेडिकल कॉलेज की प्रिंसिपल ने तबलीगी जमातियों पर की विवादित टिपण्णी
बता दें कि कानपुर के गणेश शंकर विद्यार्थी मेडिकल कॉलेज की प्रिंसिपल डॉक्टर आरती लालचंदानी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में डॉ. आरती को कहते सुना जा सकता है,''ये फर्जी हैं। ये तो आए ही हैं ये करने। ये तो टेररिस्ट हैं। देखिए कहना नहीं चाहिए पर ये टेररिस्ट हैं और इनको हम वीआईपी ट्रीटमेंट दे रहे हैं। खाना-पीना दे रहे हैं, अपनी मैनपावर लगा रहे हैं। अपना रिसोर्स इन पर लगा रहे हैं। अपने डॉक्टरों को बीमार कर रहे हैं। रोज लाख-सवा लाख होटल बिल का पे कर रहे हैं। अगर ये नहीं होते, तो हमारे पास एक मरीज था पॉजिटिव''
डॉक्टर आरती लालचंदानी किसके के बारे में बात कर रही हैं, वीडियो से ये साफ है। लालचंदानी ने ही अप्रैल 2020 की शुरुआत में कानपुर में भर्ती हुए तबलीगी जमात के कोविड-19 पॉजिटिव मरीजों पर आरोप लगाया था कि वह डॉक्टरों पर थूक रहे हैं। ये वीडियो भी उसी वक्त का है। लालचंदानी पत्रकारों से ये सब बात ऑफ द रिकॉर्ड कर रही हैं। वीडियो में किसी मीडिा संस्थान का माइक भी दिख रहा है। जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। वीडियो में डॉक्टर यह भी कहती हुई दिख रही हैं, 'उन्हें जंगलों में भेजें, उन्हें कालकोठरी में फेंक दें। इन 30 करोड़ों के कारण 100 करोड़ लोग भुगत रहे हैं। उनकी वजह से वित्तीय आपातकाल है।'
मालूम हो कि तबलीगी जमात के ये सदस्य निजामुद्दीन मरकज में शामिल हुए थे और बाद में इनमें से कई कोरोना संक्रमित पाए गए थे। बाद में इनके अपने प्रदेश में लौटने पर देश में कोरोना के केसों की संख्या में इजाफा हुआ था।