जम्मू: उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने जम्मू विश्वविद्यालय के विशेष दीक्षांत समारोह में बीते गुरुवार को कहा कि लोग अपने विवेक का इस्तेमाल करें, राष्ट्रवाद के प्रति दृढ बने और भारत की विकास गाथा को कमजोर करने के लिए किये जा रहे भयावह मंसूबों को हल्के में न लें।
उपराष्ट्रपति ने दीक्षांत समारोह के संबोधन में कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर परोक्ष हमला करते हुए कहा, “यह त्रासदीपूर्ण है और हम सभी का मजाक है कि विरोधी ताकतों द्वारा देश के विरोध में सुनियोजित तरीके से झूठी कहानियां फैलाई जाती हैं। दुखद यह है कि हममें से कुछ लोग इसे गंभीरता से नहीं लेते लेकिन ऐसा करने वालों की संख्या कम है।"
समाचार वेबसाइट इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार नरेंद्र मोदी शासन के पिछले नौ वर्षों का जिक्र करते हुए उपराष्ट्रपति धनखड़ ने कहा, "हमारे देश में जो हो रहा है, हमें उस पर गर्व होना चाहिए। हमने देश की ऐसी तरक्की के बारे में कभी सपने में भी नहीं सोचा था। एक दशक पहले हम दुनिया की 11वीं अर्थव्यवस्था थे और सितंबर 2022 में भारत अपने औपनिवेशिक शासक इंग्लैंड से आगे निकलते हुए विश्व की 5वीं सबसे बड़ी वैश्विक अर्थव्यवस्था बन गया है।"
उन्होंने मोदी सरकार द्वारा अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35ए को संसद द्वारा निरस्त करने पर कहा कि वह पिछले 20 वर्षों से इसकी वकालत कर रहे हैं। धनखड़ ने कहा, "यह (अनुच्छेद 370) संविधान में एक अस्थायी प्रावधान के रूप में रखा गया था, लेकिन बावजूद इसके वह 70 साल तक चला।"
उन्होंने लोगों से गौरवान्वित भारतीय होने और देश की उपलब्धियों पर गर्व करने का आह्वान करते हुए कहा, "जब हम प्रगति के रास्ते पर अग्रसर हैं तो दुनिया हमसे ईर्ष्या कर रही है, हम सबने देखा है कि दुनिया आज की तारीख में भारत का जितना सम्मान कर रही है, उतना पहले कभी नहीं हुआ। आज पूरी दुनिया इस बात का इंतजार करती है कि सबसे बड़े लोकतंत्र भारत का नेता किसी खास मुद्दे पर क्या कहता है।"
इसके साथ ही उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा, "देश में कुछ ऐसे भी लोग हैं, जो अपने को कानून से ऊपर मानते हैं। लेकिन अब ऐसा नहीं है, अगर उनके भ्रष्ट कृत्यों पर जांच एजेंसी द्वारा जवाब-तलब किया जाता है, तो वे सड़कों पर कैसे उतर सकते हैं।"
उपराष्ट्रपति ने कहा, "देश अब भ्रष्टाचार के लिए जीरो टॉलरेंस पॉलिसी रखता है। संदेश जोरदार और स्पष्ट है कि आप कोई भी हों, किसी भी पहचान या किसी भी धर्म के हों, आप कानून के प्रति जवाबदेह हैं।"