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कोवैक्सीन या स्पूतनिक V मान्य नहीं! भारतीय छात्रों को अमेरिकी विश्वविद्यालयों ने फिर टीका लेने को कहा

By दीप्ती कुमारी | Updated: June 6, 2021 09:18 IST

कई अमेरिकी विश्वविद्यालय ने उन भारतीय छात्रों को फिर से कोरोना का टीका लेने को कहा है जिन्होंने कोवैक्सीन या स्पूतनिक-V ली है। अमेरिकी विश्वविद्यालयों ने इन छात्रों को WHO द्वारा अनुमोदित टीका लेने को कहा है।

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ठळक मुद्देअमेरिका विश्वविद्यालय ने कई छात्रों को रीवैक्सीनेशन कराने के लिए कहा है अमेरिका विश्वविद्यालयों ने कहा है कि वे WHO द्वारा अनुमोदित वैक्सीन को ही मान्यता देंगे जिन भारतीय छात्रों ने कोवैक्सीन या स्पूतनिक वी ली है, उन्हें भी कराना होगा रीवैक्सीनेशन

दिल्ली:  भारत में सरकार टीकाकरण अभियान को जल्द से जल्द पूरा करना चाहती है ताकि लोगों को कोरोना महामारी से सुरक्षित किया जा सके। फिलहाल देश में 18 से अधिक उम्र के सभी लोगों को  टीका लगाया जा रहा है। ऐसे में अमेरिका के कई विश्वविद्यालयों ने उन छात्रों को दोबारा टीका लेने को कहा है जिन्होंने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा मान्यता प्राप्त वैक्सीन नहीं ली है।

इसमें वे भारतीय छात्र भी शामिल हैं जिन्होंने भारत बायोटेक की बनी कोवैक्सीन या रूसी  वैक्सीन स्पूतनिक वी लिया है।  

दरअसल अमेरिकी विश्वविद्यालय टीकों की प्रभावशीलता और सुरक्षा के बारे में उपलब्ध डाटा की कमी को इसका कारण बता रहा है।  संबंधित छात्रों को नए सेमेस्टर शुरू होने से पहले पुनः टीकाकरण कराने के लिए कहा जा रहा है। हालांकि, अब छात्र दो अलग-अलग टीका लेने की बात को लेकर चिंतित है कि यह कितना सुरक्षित होगा । 

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार 25 साल की मिलोनी दोशी कोलंबिया यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ इंटरनेशनल एंड पब्लिक अफेयर्स में पढ़ाई करने वाली हैं। उन्होंने भारत में पहले ही कोवैक्सीन की दो खुराकें ले ली है। रिपोर्ट के अनुसार विश्वविद्यालय ने उन्हें अब अलग वैक्सीन के साथ परिसर में आने पर फिर से टीकाकरण करने के लिए कहा है।

दोशी ने कहा कि 'मैं सिर्फ दो अलग-अलग टीका लेने के बारे में चिंतित हूं । उन्होंने कहा कि आवेदन की प्रक्रिया का चक्र सबसे कठिन हिस्सा होता है लेकिन वास्तव में यह अनिश्चित और चिंता पैदा करने वाला रहा है ।'

दो अलग-अलग कोरोना टीके लेना कितना सुरक्षित?

इस पर रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (सीडीसी) के प्रवक्ता क्रिश्चियन नोर्डलंड ने कहा कि दो अलग-अलग टीकों को लेना की सुरक्षा और प्रभावशीलता का अध्ययन नहीं किया गया है । उन्होंने कहा कि 'जिन लोगों ने पहले वैक्सीन ली है लेकिन  वह डब्ल्यूएचओ द्वारा अनुमोदित  वैक्सीन नहीं  है  तो उन्हें अमेरिका में डब्ल्यूएचओ द्वारा अनुमोदित वैक्सीन की पहली खुराक लेने के लिए 28 दिनों का इंतजार करना होगा ।'

डब्ल्यूएचओ द्वारा यूएस आधारित दवा कंपनियों फाइजर इंक. मॉडर्ना इंक  और जॉनसन एंड जॉनसन द्वारा उत्पादित टीकों को स्वीकृति प्रदान की गई है । 

छात्रों के लिए डब्ल्यूएचओ द्वारा अनुमोदित टीकों को अनिवार्य करने की प्रक्रिया से अमेरिका के विश्वविद्यालयों के राजस्व को नुकसान होने की संभावना है, जो हर साल शिक्षण शुल्क की मदद से  लगभग 39  बिलियन डॉलर कमाते हैं।

लगभग 2 लाख भारतीय छात्र हर साल अमेरिकी विश्वविद्यालयों में जाते हैं । उनमें से कई को अब अपने विश्वविद्यालयों द्वारा अनुमोदित टीकों के साथ टीकाकरण कराने के लिए नियुक्तियों को निर्धारित करना मुश्किल हो रहा है । छात्र अब इस बात को लेकर चिंतित है कि इस नए नियम का उनकी भविष्य की योजनाओं पर क्या प्रभाव पड़ सकता है।

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