लखनऊः उत्तर प्रदेश में पुलिस में आरक्षी (सिपाही) तथा उसके समकक्ष 32,679 पदों पर पदों पर भर्ती में सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों की आयु सीमा में तीन वर्ष की छूट देने का मामले का मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निस्तारण कर दिया. योगी सरकार के राज्य मंत्री डॉ. अरुण कुमार, निषाद पार्टी के विधायक अनिल कुमार त्रिपाठी और भाजपा के हैदरगढ़ से विधायक दिनेश रावत ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर पुलिस भर्ती के अभ्यर्थियों को तीन साल की छूट देने का आग्रह किया था. इस मामले में विपक्ष के विधायक भी सीएम योगी के उस गोरखपुर में जनता दरबार में किए गए वादे की याद दिलाने लगे जिसमें उन्होंने कहा था कि पुलिस भर्ती के अभ्यर्थियों को तीन साल की छूट दी जाएगी.
चौतरफा हो रही इस मांग का संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री योगी ने दिल्ली जाने के पूर्व सोमवार को पुलिस भर्ती में सभी वर्गों के अभ्यर्थियों को तीन साल की छूट प्रदान कर दी. सीएम योगी के इस फैसले के कुछ घंटे की भीतर प्रदेश पुलिस में होने वाली आरक्षी तथा उसके समकक्ष 32,679 पदों के लिए अधिकतम आयु सीमा में एकमुश्त तीन वर्ष का शिथिलीकरण प्रदान करने का शासनादेश जारी हो गया.
ऐसे हुआ फैसला, इससे इन्हें होगा लाभ
प्रदेश सरकार के इस फैसले का लाभ आरक्षी नागरिक पुलिस (पुरुष/महिला), आरक्षी पीएसी/सशस्त्र पुलिस (पुरुष), आरक्षी विशेष सुरक्षा बल (पुरुष), महिला बटालियन हेतु महिला आरक्षी, आरक्षी घुड़सवार पुलिस (पुरुष) तथा जेल वार्डर (पुरुष एवं महिला) पदों पर भर्ती प्रक्रिया में सम्मिलित होने वाले सभी वर्गों के अभ्यर्थियों को होगा.
सरकार द्वारा यह निर्णय उत्तर प्रदेश लोक सेवा (भर्ती के लिए आयु सीमा का शिथिलीकरण) नियमावली-1992 के नियम-3 के आलोक में लिया गया है। यह फैसला 31 दिसंबर 2025 को जारी भर्ती विज्ञप्ति के अनुक्रम में 5 जनवरी 2026 को जारी शासनादेश के माध्यम से लागू किया गया है, जिससे बड़ी संख्या में ऐसे अभ्यर्थियों को अवसर मिलेगा जो आयु सीमा के कारण अब तक भर्ती प्रक्रिया से बाहर हो रहे थे.
मुख्यमंत्री सचिवालय के अफसरों के अनुसार, बीते गुरुवार को उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड ने पुलिस में आरक्षी व समकक्ष के 32,679 पदों पर भर्ती का विज्ञापन निकाला गया था. इसमें सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों की अधिकतम आयु 22 वर्ष निर्धारित की गई थी. जिसके बाद ही सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों को आयु सीमा में छूट दिए जाने की मांग सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायक करने लगे. इन लोगों का कहना था कि योगी सरकार ने ही वर्ष 2023 में 60,244 सिपाहियों की भर्ती में अभ्यर्थियों को अधिकतम आयु में तीन वर्ष की छूट दी थी.
इसलिए इस बार भी सामान्य वर्ग के अभ्यर्थी अधिकतम आयु 25 वर्ष की जाए. विधायकों की इस मांग को लेकर सरकार को भी अपने पूर्व के फैसले की याद आयी और आनन-फानन में सोमवार को इस संबंध में सीएम योगी के डीजीपी राजीव कृष्ण को बुलाकर अपने फैसले से उन्हे अवगत कराया. जिसके कुछ देर बाद ही शासनादेश जारी कर दिया गया.
सरकार का दावा
सीएम सचिवालय के अफसरों के अनुसार, सीएम योगी का यह फैसला ये संदेश देता है कि प्रदेश की सरकार युवाओं की वास्तविक समस्याओं को समझती है और समाधान के लिए ठोस फैसले लेने से पीछे नहीं हटती. प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों को न्यायसंगत अवसर देना, रोजगार के अधिक से अधिक विकल्प उपलब्ध कराना.
प्रशासनिक निर्णयों में संवेदनशीलता बनाए रखना योगी सरकार की कार्यशैली का हिस्सा बन चुका है. जिसके चलते ही पुलिस भर्ती में आयु सीमा शिथिलीकरण का फैसला लिया गया है और इस निर्णय लाखों युवाओं की उम्मीदों को नया बल देगा.