लखनऊः उत्तर प्रदेश के लखनऊ सहित 17 नगर निगमों (बड़े शहरों) में इन दिनों बहुत सारे घरों-मोहल्लों से कूड़ा नहीं उठ रहा है. वजह ये है कि कूड़े का उठान करने वाली कंपनियों के हजारों कर्मचारियों को असम में विधानसभा चुनावों के लिए वोट डालने के लिए जाना. असमविधानसभा चुनाव के लिए आठ अप्रैल को मतदान होना है. जाहिर है कि जो सफाई कर्मचारी वोट डालने के गए हैं, वह 12 अप्रैल तक ही लौट पाएंगे. तब तक यूपी के लखनऊ सहित नोएडा, गाजियाबाद, अलीगढ़, मेरठ, मुरादाबाद, सहारनपुर, फिरोजाबाद, आगरा, मथुरा, कानपुर, झांसी, बरेली, शाहजहांपुर, गोरखपुर, प्रयागराज और वाराणसी आदि में गहरों घरों के कूड़ा उठान की समस्या बनी रहेगी.
कूड़ा उठान की व्यवस्था प्रभावित होने के लोग नाराज हुए तो नगर विकास मंत्री एके शर्मा ने सभी नगर निगमों के आयुक्तों को कूड़ा उठान की वैकल्पिक व्यवस्था करने का निर्देश दिया है. उन्होने के कहा इस मामले में शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी.
नगर निगम के कार्य से लोग खफा
लखनऊ के नगर आयुक्त गौरव कुमार के अनुसार, शहर में साफ-सफाई का कार्य करने और घरों से कूड़ा उठाने का कार्य दो कंपनियों रामकी और लायंस एनवायरो की मदद से किया जा रहा है. शहर के 77 वार्डों में रामकी कंपनी कूड़ा एकत्र करने काम करती है। इस कंपनी के करीब 600 कर्मचारी घरों से कूड़ा कलेक्शन का काम करते हैं.
जबकि शहर के 33 वार्डों में लायंस एनवायरो कंपनी कूड़ा कलेक्शन का काम करती है. इस कंपनी के सौ से अधिक कर्मचारी कंपनी की गाड़ियों से सड़क किनारे डंप किए गए कूड़े को उठाने का कार्य करते हैं. इन दोनों कंपनियों के आधे से अधिक कर्मचारी असम विधानसभा चुनाव में वोट डालने के लिए परिवार के साथ चले गए हैं.
इस वजह से शहर में अधिकांश इलाकों में कूड़ा उठान पर असर पड़ा है. नगर निगम के कर्मचारियों पर काम का बोझ पड़ा है, इसके बाद भी शहर में साफ - सफाई रखने के प्रयास किए जा रही है. जिन कंपनियों के कर्मचारी असम गए हैं, वह भी वैकल्पिक कर्मचारियों की मदद से घरों से कूड़ा उठान करवा रही हैं, लेकिन वैकल्पिक कर्मचारियों को शहर के सभी मोहल्लों और घरों के बारे पूरी जानकारी नहीं है.
इस वजह से लखनऊ के बहुत से घर-मोहल्ले और अपार्टमेंट में जहां कूड़ा कलेक्शन के लिए कर्मचारी नहीं पहुंच पा रहे हैं वहां लोग शिकायत कर रहे हैं. लोग नगर निगम के कामकाज को खराब बता रहे हैं. सूबे के अन्य नगर निगमों का भी ऐसा ही हाल है. हर नगर निगम से करीब 400 कर्मचारी वोटिंग करने के लिए असम गए है.
एक साथ इतने कर्मचारी के असम जाने के सफाई का काम प्रभावित हुआ है, इस तरह की समस्या से खड़ी होगी? इस बारे में नगर निगमों के आयुक्तों ने सोचा भी नहीं था, जिसके चलते ही सूबे के 17 नगर निगमों में पहली बार कूड़े को लेकर लोग परेशान हो रहे हैं और सरकार को कोस रहे हैं.
लोग हुए परेशान तो मंत्री से लेकर अफसर हुए सक्रिय
जिसके चलते यूपी के सभी 17 नगर निगमों में सड़कों के किनारे कूड़े का नजर आ रहा है क्योंकि कूड़ा कलेक्शन प्रभावित हो चुका है. लखनऊ में मुख्यमंत्री आवास, मंत्री आवास की सड़कों के किनारे तो कूड़ा नजर नहीं आता लेकिन शहर के अन्य सभी इलाकों में हर सुबह हटाया जाने वाला कूड़ा देर शाम तक नहीं हटाया जा रहा ही.
पुराने लखनऊ चौक इलाके में तो स्थिति और भी खराब है. चौक क्षेत्र में रहने वाले लोग शिकायत कर रहे हैं, इस इलाके के कई मोहल्लों में पांच दिन से कूड़ा लेने वाले नहीं आ रहे हैं. घरों में कूड़ा बढ़ता जा रहा है. बदबू फैल रही है. घर के आसपास कोई ऐसी जगह भी नहीं जा कूड़ा फेंका जा सके. लोग परेशान है.
लोगों की इस परेशानी को दूर करने का प्रयास नगर निगम और कूड़ा उठाने का कार्य करने वाली कंपनियों के कर्मचारी कर रहे हैं. रामकी कंपनी के परियोजना प्रमुख अभय रंजन का कहना है कि कुछ कर्मचारी बाराबंकी व आसपास से बुलाए गए हैं. वह नए हैं इससे कुछ जगह समस्या आ रही होगी मगर जहां से शिकायत आती है उसे तुरंत दूर कराया जाता है.
लायंस एनवायरो के मुखिया रणधीर सिंह भी लोगों की दिक्कतों को दूर करने की बात कह रहे हैं. लखनऊ के नगर आयुक्त गौरव कुमार के अनुसार कूड़ा कलेक्शन की समस्या को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है. कंपनियों को वैकल्पिक इंतजाम करने को कहा गया है, दो तीन दिनों में पहले की तरह ही कूड़े का उठान होने लगेगा. सूबे के नगर विकास मंत्री एके शर्मा ने भी दावा किया है सभी 17 नगर निगमों में कूड़े के उठान की व्यवस्था को दुरुस्त करने का निर्देश दिया गया है.