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यूपी चुनाव: दलबदलुओं का गढ़ है फतेहाबाद विधानसभा, भाजपा, बसपा और सपा में रहा है मुख्य मुकाबला

By विशाल कुमार | Updated: January 24, 2022 12:08 IST

सपा ने बाहुबली अशोक दीक्षित की बेटी रूपाली दीक्षित को टिकट दिया है जबकि बसपा ने शैलेंद्र प्रताप सिंह उर्फ शैलू को मैदान में उतारा है। वहीं, भाजपा ने अपने मौजूदा विधायक जितेंद्र वर्मा पर भरोसा न दिखाते हुए बसपा छोड़कर आए छोटे लाल वर्मा को टिकट दिया है।

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ठळक मुद्देआगरा जिले के तहत आने वाला फतेहाबाद विधानसभा सीट दलबदलुओं का गढ़ रहा है।सपा ने बाहुबली अशोक दीक्षित की बेटी रूपाली दीक्षित को टिकट दिया है।बसपा ने नए चेहरे शैलेंद्र प्रताप सिंह उर्फ शैलू को मैदान में उतारा है।

उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव में आगरा जिले के तहत आने वाला फतेहाबाद विधानसभा सीट दलबदलुओं का गढ़ रहा है और इस बार पर विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ 19 प्रत्याशी चुनावी मैदा में हैं।

सपा-बसपा ने नए चेहरों पर तो भाजपा ने दलबदलू पर किया भरोसा

समाजवादी पार्टी और बसपा ने जहां इस बार नए चेहरों पर दांव खेला है तो भाजपा ने अपने मौजूदा विधायक जितेंद्र वर्मा पर भरोसा न दिखाते हुए बसपा छोड़कर आए छोटे लाल वर्मा को टिकट दिया है। 2012 में बसपा की टिकट पर फतेहाबाद में जीत दर्ज करने वाले छोटेलाल वर्मा 2017 में भाजपा से टिकट न मिलने पर चुनाव से पहले बसपा में शामिल हो गए थे।

भाजपा ने अपने प्रत्याशी जितेंद्र वर्मा का टिकट काटा तो वो रातोंरात सपा में शामिल हो गए और अखिलेश यादव ने उन्हें फतेहाबाद सपा का जिलाध्यक्ष नियुक्त कर दिया।

जितेंद्र वर्मा के सपा में शामिल होते ही पार्टी ने पहले से घोषित प्रत्याशी राजेश शर्मा का टिकट अचानक काटकर बाहुबली अशोक दीक्षित की बेटी रूपाली दीक्षित को टिकट दे दिया जिन्होंने पिछले चुनाव में भाजपा के प्रत्याशी के तौर पर लड़ रहे जितेंद्र वर्मा का प्रचार किया था, जो कि फतेहाबाद सीट 34 हजार वोटों से जीते थे।

विदेश से पढ़ाई और नौकरी करके लौटीं 34 वर्षीय रूपाली दीक्षित के पिताजी अशोक दीक्षित बिल्डर हैं और तीन बार आगरा से चुनाव लड़ चुके हैं और हत्या के मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद इस समय जेल में हैं। सपा से पहले भाजपा में रहीं रूपाली को 2017 में भाजपा ने टिकट नहीं दिया था जिसके बाद इस बार उन्होंने सपा का दामन थाम लिया है। 

वहीं, बसपा ने नए चेहरे शैलेंद्र प्रताप सिंह उर्फ शैलू को मैदान में उतारा है। कांग्रेस से होतम सिंह निषाद को प्रत्याशी बनाया गया है।

दलबदलुओं का गढ़

फतेहाबाद सीट से सबसे ज्यादा पांच बार कांग्रेस ने जीत दर्ज की है। 4 बार भाजपा, 3 बार जनता दल, 2 बार सोशलिस्ट पार्टी के विधायक बने. वहीं एक-एक बार जनता पार्टी, बसपा और आरपीआई के कैंडिडेट जीत चुके हैं।

इस बार भाजपा प्रत्याशी छोटे लाल वर्मा ने पहली बार 1993 में भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था. इसके बाद साल 2002 में भी उन्होंने पार्टी के टिकट पर जीत हासिल की थी. हालांकि, 2012 के चुनाव से पहले उन्होंने बसपा का दामन थाम लिया था और जीत भी हासिल की थी. अब एक बार फिर वह भाजपा के टिकट पर मैदान में हैं.

जनता दल से राजनीति की शुरुआत कर 1991 में विधानसभा चुनाव जीतने वाले विजयपाल सिंह को 1993 के मध्यावधि चुनाव में हार का सामना कपना पड़ा था जिसके बाद उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया था. इसके बाद उन्होंने 1996 में दोबारा जीत हासिल की थी. 2018 में उन्होंने राज्यसभा सांसद बना दिया गया.

जातीय समीकरण

फतेहाबाद सीट पर जातीय समीकरण अधिक मायने रखता है क्योंकि  यह ठाकुर और निषाद बाहुल्य क्षेत्र है. कस्बों में वैश्य वर्ग की जनसंख्या ज्यादा है. यही तीन वर्ग इस सीट से विधायक की किस्मत तय करते हैं. इस सीट से निषाद प्रत्याशी चार बार जीत चुके हैं।

यहां क्षत्रिय-75 हजार, निषाद- 60 हजार, ब्राह्मण-40 हजार, कुशवाहा-25 हजार, गुर्जर-वैश्य 15-15 हजार की जनसंख्या में हैं।

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